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Sitapur News: गोमती का तट राम नाम संकीर्तन से गूंजा
Sun, 04 Jan 2026 12:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:31 AM IST
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कल्पवास के लिए बनी झोपड़ी।
नैमिषारण्य (सीतापुर)। गोमती नदी के किनारे देवदेवेश्वर घाट राम नाम संकीर्तन से गुंजायमान होने लगा है। यहां कुश व फूस की बनी झोपड़ियों की अस्थायी राम नगरिया बसाई गई है। संतों व गृहस्थ श्रद्धालुओं ने शनिवार से कल्पवास शुरू कर दिया है। कल्पवास एक माह तक चलेगा।
हर वर्ष गोमती नदी के किनारे सैकड़ों श्रद्धालु कल्पवास करते हैं। कड़ाके की ठंड में लोग जब घरों से निकलना पसंद नहीं करते, ऐसे में अपना घर व भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर गोमती नदी के तट पर सर्द हवाओं के बीच कल्पवासी फूस की झोपड़ी में निवास करते हैं। इस बार कल्पवास करने देश भर के श्रद्धालुगण नैमिष आए हैं। सभी कल्पवासी एक माह तक सूर्योदय से पहले पावन नदी में स्नान करेंगे। इसके बाद पूजन आदि धार्मिक कार्यक्रम का दौर प्रारंभ होगा जो देर शाम तक चलता रहेगा। इस दौरान भजन कीर्तन व राम नाम का संकीर्तन अनवरत चलेगा। इसके अलावा कल्पवासी रात्रि कीर्तन भी करते हैं। कल्पवासी इसे सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि आत्म शुद्धि और संयम का साधना पथ मानते हैं। मान्यता है कि माघ मास में पावन नदी के तट पर कल्पवास से कर्म शुद्ध होते हैं और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
वानर मारुति के साथ कर रहे कल्पवास
महमूदाबाद निवासी राम जीवन दूसरी बार कल्पवास कर रहे हैं। इस बार वह अपने मारुति नामक पालतू वानर के साथ कल्पवास करने आए हैं। कल्पवास के पहले दिन वानर को अपने हाथ से भोजन करा रहे थे। रामजीवन ने बताया कि दीपावली को घायल अवस्था यह वानर मिला था, तबसे यह मेरे साथ ही है।
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प्रभु से मुक्ति की कामना
नैमिषारण्य तीर्थ में पांच वर्षों से कल्पवास का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इस अवधि में हर पूजन कर्म करने या धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा मातृ बनने से बड़ी सुखद अनुभूति होती है। प्रभु से मुक्ति की कामना है।
- केतकी, कल्पवासी
सुखद अनुभूति मिलती
इस कल्पवास के बारे में दो साल पहले जानकारी मिली थी, तब हमने यहां आकर कल्पवास के आनंद का अनुभव किया। इसके बाद से लगातार कल्पवास का धार्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सुखद अनुभूति मिलती है। - अखिलेश दास, कल्पवासी
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हर वर्ष गोमती नदी के किनारे सैकड़ों श्रद्धालु कल्पवास करते हैं। कड़ाके की ठंड में लोग जब घरों से निकलना पसंद नहीं करते, ऐसे में अपना घर व भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर गोमती नदी के तट पर सर्द हवाओं के बीच कल्पवासी फूस की झोपड़ी में निवास करते हैं। इस बार कल्पवास करने देश भर के श्रद्धालुगण नैमिष आए हैं। सभी कल्पवासी एक माह तक सूर्योदय से पहले पावन नदी में स्नान करेंगे। इसके बाद पूजन आदि धार्मिक कार्यक्रम का दौर प्रारंभ होगा जो देर शाम तक चलता रहेगा। इस दौरान भजन कीर्तन व राम नाम का संकीर्तन अनवरत चलेगा। इसके अलावा कल्पवासी रात्रि कीर्तन भी करते हैं। कल्पवासी इसे सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि आत्म शुद्धि और संयम का साधना पथ मानते हैं। मान्यता है कि माघ मास में पावन नदी के तट पर कल्पवास से कर्म शुद्ध होते हैं और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है।
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वानर मारुति के साथ कर रहे कल्पवास
महमूदाबाद निवासी राम जीवन दूसरी बार कल्पवास कर रहे हैं। इस बार वह अपने मारुति नामक पालतू वानर के साथ कल्पवास करने आए हैं। कल्पवास के पहले दिन वानर को अपने हाथ से भोजन करा रहे थे। रामजीवन ने बताया कि दीपावली को घायल अवस्था यह वानर मिला था, तबसे यह मेरे साथ ही है।
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प्रभु से मुक्ति की कामना
नैमिषारण्य तीर्थ में पांच वर्षों से कल्पवास का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। इस अवधि में हर पूजन कर्म करने या धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा मातृ बनने से बड़ी सुखद अनुभूति होती है। प्रभु से मुक्ति की कामना है।
- केतकी, कल्पवासी
सुखद अनुभूति मिलती
इस कल्पवास के बारे में दो साल पहले जानकारी मिली थी, तब हमने यहां आकर कल्पवास के आनंद का अनुभव किया। इसके बाद से लगातार कल्पवास का धार्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सुखद अनुभूति मिलती है। - अखिलेश दास, कल्पवासी