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कई संक्रमित गांवों में कोरोना जांच के लिए नहीं पहुंचीं टीमें
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सीतापुर। कोरोना का संक्रमण शहरों के साथ गांवों में भी फैल चुका है, गांवों के हालात बेहतर नजर नहीं आ रहे हैं। कागजों पर भले ही 60 फीसद जांचें गांवों में होने का दावा किया जा रहा है लेकिन कई पीड़ित गांवों में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच सकी हैं जबकि इन गांवों में कई लोग बुखार, जुखाम व सर्दी से ग्रसित हैं। ऐसी सूरत में पीड़ित लोग इधर-उधर इलाज करा रहे हैं।
कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर ने गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। अब भले ही संक्रमण के मामलों में थोड़ी कमी आ रही है लेकिन संक्रमण बना हुआ है। जिले में कई ऐसे बड़े गांव है जिनकी आबादी पांच हजार से अधिक है। इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
गांवों के तमाम लोगों में बुखार, जुखाम सहित कोरोना के कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं आ रही हैं। इससे कोविड मरीज की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। टीमों के अभाव में जांच नहीं हुई तो इनको कोरोना किट भी नहीं मिल सकी है। ऐसे में ये लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं। ओपीडी सेवा बंद होने से इनको सरकारी अस्पतालों में इलाज भी नहीं मिल पा रहा है।
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कई ऐसे प्रभावित गांव भी हैं जहां पर कई पॉजिटिव मामले आ चुके हैं लेकिन इनके संपर्क में आए लोगों की जांच नहीं हुई। इसके अलावा गांव के अन्य लोग भी जांच के दायरे से बाहर ही रहे हैं। रामपुर मथुरा विकासखंड के ग्रामीण रमेश का कहना है अगर गांव में कोई केस निकलता है तो कम से कम आस-पड़ोस के लोगों की तो जांच हो सकती है लेकिन टीमें आती ही नहीं है।
सीएचसी दूर होने की वजह सेे कौन जांच कराने जाए। परसेंडी इलाके के जुबैर का कहना हैं गांव में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जांच के अभाव में लोग पैरासीटामॉल की गोली खाकर खुद ही इलाज कर रहे हैं।
लहरपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत लछननगर की आबादी करीब छह हजार है। इस गांव में कई लोग बुखार, खांसी व जुखाम से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई टीम नहीं पहुंची है। केवल कोविड टीकाकरण हुआ है। इससे लोग इधर-उधर इलाज करा रहे हैं।
लहरपुर के नबीनगर की आबादी करीब सात हजार है। गांव में एक बार भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से टीम नहीं पहुंची जबकि गांव में कई लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। ये लोग होम आइसोलेट भी हुए थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई।
ग्रामीणों का कहना है अगर सही से जांच करा ली जाए तो कई अन्य लोग भी संक्रमित मिल सकते हैं। कुछ ऐसा ही हाल सादीपुर गांव का है। यहां की आबादी छह हजार है जिनमें से महज 70-80 लोगों की एक बार कोविड जांच हुई थी।
रामपुर मथुरा विकासखंड के कस्बा बहादुरगंज की आबादी करीब नौ हजार है। यहां पर कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके बावजूद महज दो सौ लोगों की ही कोविड की जांच हुई है। गोंडा देवरिया गांव की आबादी करीब 10 हजार है। यहां पर तीन सौ लोगों की कोविड की जांच हुई थी जिनमें कई लोग संक्रमित मिले थे।
कस्बा रामपुर मथुरा की आबादी 12 हजार है जिसमें 700 लोगों की कोविड की जांच हो चुकी है। मीरानगर गांव की आबादी 11 हजार है। करीब 350 लोगों ने कोविड की जांच कराई थी। पॉजिटिव मरीजों को गांव में ही होम क्वारंटीन करा दिया गया था।
एसीएमओ डॉ. पीके सिंह ने बताया कि जिले में रोजाना साढ़े तीन हजार से अधिक जांचें हो रही हैं। मैन पॉवर के अनुसार करीब 60 फीसद जांचे गांवों में रोजाना होती हैं। प्रभावित गांवों में टीमें पहुंच रही हैं। अगर कहीं नहीं पहुंच सकी हैं तो वहां भी टीमें जाकर संदिग्धों की जांच करके उनको किट मुहैय्या कराएंगी।
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कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर ने गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। अब भले ही संक्रमण के मामलों में थोड़ी कमी आ रही है लेकिन संक्रमण बना हुआ है। जिले में कई ऐसे बड़े गांव है जिनकी आबादी पांच हजार से अधिक है। इन गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
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गांवों के तमाम लोगों में बुखार, जुखाम सहित कोरोना के कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं लेकिन फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं आ रही हैं। इससे कोविड मरीज की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। टीमों के अभाव में जांच नहीं हुई तो इनको कोरोना किट भी नहीं मिल सकी है। ऐसे में ये लोग झोलाछाप से इलाज करा रहे हैं। ओपीडी सेवा बंद होने से इनको सरकारी अस्पतालों में इलाज भी नहीं मिल पा रहा है।
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कई ऐसे प्रभावित गांव भी हैं जहां पर कई पॉजिटिव मामले आ चुके हैं लेकिन इनके संपर्क में आए लोगों की जांच नहीं हुई। इसके अलावा गांव के अन्य लोग भी जांच के दायरे से बाहर ही रहे हैं। रामपुर मथुरा विकासखंड के ग्रामीण रमेश का कहना है अगर गांव में कोई केस निकलता है तो कम से कम आस-पड़ोस के लोगों की तो जांच हो सकती है लेकिन टीमें आती ही नहीं है।
सीएचसी दूर होने की वजह सेे कौन जांच कराने जाए। परसेंडी इलाके के जुबैर का कहना हैं गांव में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जांच के अभाव में लोग पैरासीटामॉल की गोली खाकर खुद ही इलाज कर रहे हैं।
लहरपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत लछननगर की आबादी करीब छह हजार है। इस गांव में कई लोग बुखार, खांसी व जुखाम से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है गांव में अभी तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई टीम नहीं पहुंची है। केवल कोविड टीकाकरण हुआ है। इससे लोग इधर-उधर इलाज करा रहे हैं।
लहरपुर के नबीनगर की आबादी करीब सात हजार है। गांव में एक बार भी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से टीम नहीं पहुंची जबकि गांव में कई लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। ये लोग होम आइसोलेट भी हुए थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं आई।
ग्रामीणों का कहना है अगर सही से जांच करा ली जाए तो कई अन्य लोग भी संक्रमित मिल सकते हैं। कुछ ऐसा ही हाल सादीपुर गांव का है। यहां की आबादी छह हजार है जिनमें से महज 70-80 लोगों की एक बार कोविड जांच हुई थी।
रामपुर मथुरा विकासखंड के कस्बा बहादुरगंज की आबादी करीब नौ हजार है। यहां पर कई लोग संक्रमित हो चुके हैं। इसके बावजूद महज दो सौ लोगों की ही कोविड की जांच हुई है। गोंडा देवरिया गांव की आबादी करीब 10 हजार है। यहां पर तीन सौ लोगों की कोविड की जांच हुई थी जिनमें कई लोग संक्रमित मिले थे।
कस्बा रामपुर मथुरा की आबादी 12 हजार है जिसमें 700 लोगों की कोविड की जांच हो चुकी है। मीरानगर गांव की आबादी 11 हजार है। करीब 350 लोगों ने कोविड की जांच कराई थी। पॉजिटिव मरीजों को गांव में ही होम क्वारंटीन करा दिया गया था।
एसीएमओ डॉ. पीके सिंह ने बताया कि जिले में रोजाना साढ़े तीन हजार से अधिक जांचें हो रही हैं। मैन पॉवर के अनुसार करीब 60 फीसद जांचे गांवों में रोजाना होती हैं। प्रभावित गांवों में टीमें पहुंच रही हैं। अगर कहीं नहीं पहुंच सकी हैं तो वहां भी टीमें जाकर संदिग्धों की जांच करके उनको किट मुहैय्या कराएंगी।