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स्टड बहा, मंडराया बाढ़ का खतरा
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रेउसा/तंबौर (सीतापुर)। बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी का असर सरयू व शारदा नदी में दिखने लगा है। गुरुवार को एक बार फिर नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी होने लगी। पानी का बहाव फिर आबादी की ओर बढ़ रहा है। इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदे परेशान हैं। गुरुवार को बैराजों से लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी गांजर में पहुंचने पर नदियां उफनाकर रौद्र रूप धारण कर सकती है। तटीय क्षेत्र के ग्रामीण दहशत में हैं।
तंबौर में शारदा की कटान रोकने के लिए बनाई जा रही साढे़ 12 करोड़ की परियोजना भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। जलस्तर बढ़ने पर पानी के दबाव से स्टड नंबर नौ बह गया है। जियो बैग भी नदी में समा गए है। इससे शारदा के तटीय क्षेत्र के लगभग 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली सरयू व शारदा नदी का जलस्तर बुधवार को कम होने के बाद गुरुवार को फिर बढ़ना शुरू हो गया है। सरयू के किनारे बसे कोनी, जटपुरवा, फौजदारपुरवा, दुर्गापुरवा, नगीनापुरवा आदि गांव फिर से लहरों के निशाने पर है।
जलस्तर में इजाफे से अब जैतहिया और ठेकेदारपुरवा की ओर पानी बढ़ने लगा है। धीमी गति से जमीन का कटान भी शुरू हो गया है। इसी बीच शारदा, गिरिजा और बनबसा बैराजों से गुरुवार को लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ दिया गया है। अगले कुछ घंटों में छोड़ा गया यह पानी जिले में प्रवेश कर जाएगा। लिहाजा, सरयू और शारदा में उफान आने की आशंका है। संभावित बाढ़ का खतरा लगातार बने रहने से ग्रामीण दहशत में हैं।
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तंबौर क्षेत्र के काशीपुर से बढ़इनपुरवा तक शारदा के किनारे स्टड बनाते हुए जियो बैग परक्यून पाइप लगाकर कटान रोकने के लिए 12.50 करोड़ की परियोजना स्वीकृत हुई थी। इस परियोजना में 33 स्टड बनाए जाने हैं। सूत्र बताते हैं कि स्टड नंबर 7 व 8 बनाए बिना ही स्टड नंबर 9 बना दिया गया। इसी बीच नदी का पानी बढ़ने लगा। स्टड नंबर 7 व 8 नहीं बनाए जाने से पानी का सारा दबाव स्टड नंबर 9 पर पड़ने लगा। दबाव झेल नहीं पाने से स्टड नंबर 9 के साथ जियो बैग नदी में समा गए।
लिहाजा, शारदा की तलहटी में बसे काशीपुर, असईपुर, बढ़इनपुरवा, नईबस्ती, समेत करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। शेखूपूर खमरिया को लहरों ने निशाने पर ले लिया है। पानी इस गांव की तलहटी तक पहुंच गया है। ग्रामीण मथुरा प्रसाद अवस्थी, श्याम शंकर, रामानंद, मनोज कुमार, कमला कांत, मिश्रीलाल, विनीत सिंह आदि का आरोप है कि काम देर से शुरू होने से यह नौबत आई है। स्टड नंबर 7 व 8 यदि बनाया गया होता तो पानी का दबाव एक साथ स्टड नंबर 9 पर नहीं पड़ता।
संक्रामक रोगों से कई मवेशियों की मौत
सरयू के किनारे बसे गांवों के बाहर तक पानी भरा होने से संक्रामक रोगों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। जानवरों में बुखार तथा गलाघोंटू रोग पनपने लगा है। टीकाकरण नहीं होने से कई मवेशियों की मौत हो गई है। कोनी निवासी राधे श्याम के तीन मवेशी जबकि नरायण, नंदराम, छोटेलाल का एक-एक मवेशी जान गंवा चुके है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर टीकाकरण शुरू कर दिया गया होता तो ये हालात नहीं बनते, लेकिन अभी तक किसी गांव में टीकाकरण नहीं किया गया है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
नदियों का जलस्तर घटने से बैराजों से छोड़े गए पानी का खास असर नहीं पड़ा है। एहतियातन लेखपालों के माध्यम से हालातों पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ जैसे अभी कोई हालात नहीं है। गुरुवार को लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी बैराजों से छोड़ा गया है। पहले से घट चुकी नदियों में यह पानी पहुंचने से बहाव दायरे में ही रहेगा।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार, बिसवां
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तंबौर में शारदा की कटान रोकने के लिए बनाई जा रही साढे़ 12 करोड़ की परियोजना भी कारगर साबित नहीं हो पा रही है। जलस्तर बढ़ने पर पानी के दबाव से स्टड नंबर नौ बह गया है। जियो बैग भी नदी में समा गए है। इससे शारदा के तटीय क्षेत्र के लगभग 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिले के गांजरी इलाके से होकर बहने वाली सरयू व शारदा नदी का जलस्तर बुधवार को कम होने के बाद गुरुवार को फिर बढ़ना शुरू हो गया है। सरयू के किनारे बसे कोनी, जटपुरवा, फौजदारपुरवा, दुर्गापुरवा, नगीनापुरवा आदि गांव फिर से लहरों के निशाने पर है।
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जलस्तर में इजाफे से अब जैतहिया और ठेकेदारपुरवा की ओर पानी बढ़ने लगा है। धीमी गति से जमीन का कटान भी शुरू हो गया है। इसी बीच शारदा, गिरिजा और बनबसा बैराजों से गुरुवार को लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी फिर छोड़ दिया गया है। अगले कुछ घंटों में छोड़ा गया यह पानी जिले में प्रवेश कर जाएगा। लिहाजा, सरयू और शारदा में उफान आने की आशंका है। संभावित बाढ़ का खतरा लगातार बने रहने से ग्रामीण दहशत में हैं।
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तंबौर क्षेत्र के काशीपुर से बढ़इनपुरवा तक शारदा के किनारे स्टड बनाते हुए जियो बैग परक्यून पाइप लगाकर कटान रोकने के लिए 12.50 करोड़ की परियोजना स्वीकृत हुई थी। इस परियोजना में 33 स्टड बनाए जाने हैं। सूत्र बताते हैं कि स्टड नंबर 7 व 8 बनाए बिना ही स्टड नंबर 9 बना दिया गया। इसी बीच नदी का पानी बढ़ने लगा। स्टड नंबर 7 व 8 नहीं बनाए जाने से पानी का सारा दबाव स्टड नंबर 9 पर पड़ने लगा। दबाव झेल नहीं पाने से स्टड नंबर 9 के साथ जियो बैग नदी में समा गए।
लिहाजा, शारदा की तलहटी में बसे काशीपुर, असईपुर, बढ़इनपुरवा, नईबस्ती, समेत करीब 15 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। शेखूपूर खमरिया को लहरों ने निशाने पर ले लिया है। पानी इस गांव की तलहटी तक पहुंच गया है। ग्रामीण मथुरा प्रसाद अवस्थी, श्याम शंकर, रामानंद, मनोज कुमार, कमला कांत, मिश्रीलाल, विनीत सिंह आदि का आरोप है कि काम देर से शुरू होने से यह नौबत आई है। स्टड नंबर 7 व 8 यदि बनाया गया होता तो पानी का दबाव एक साथ स्टड नंबर 9 पर नहीं पड़ता।
संक्रामक रोगों से कई मवेशियों की मौत
सरयू के किनारे बसे गांवों के बाहर तक पानी भरा होने से संक्रामक रोगों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। जानवरों में बुखार तथा गलाघोंटू रोग पनपने लगा है। टीकाकरण नहीं होने से कई मवेशियों की मौत हो गई है। कोनी निवासी राधे श्याम के तीन मवेशी जबकि नरायण, नंदराम, छोटेलाल का एक-एक मवेशी जान गंवा चुके है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर टीकाकरण शुरू कर दिया गया होता तो ये हालात नहीं बनते, लेकिन अभी तक किसी गांव में टीकाकरण नहीं किया गया है। इससे ग्रामीणों में रोष है।
नदियों का जलस्तर घटने से बैराजों से छोड़े गए पानी का खास असर नहीं पड़ा है। एहतियातन लेखपालों के माध्यम से हालातों पर नजर रखी जा रही है। बाढ़ जैसे अभी कोई हालात नहीं है। गुरुवार को लगभग तीन लाख क्यूसेक पानी बैराजों से छोड़ा गया है। पहले से घट चुकी नदियों में यह पानी पहुंचने से बहाव दायरे में ही रहेगा।
- राजकुमार गुप्ता, तहसीलदार, बिसवां