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कोनी गांव में कटान शुरू, नदी में समाया आशियाना
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रेउसा (सीतापुर)। घाघरा ने मंगलवार को कोनी गांव में कटान शुरू कर दी। कोनी में एक आशियाना घाघरा में समा गया और एक अन्य कटान के मुहाने पर है। दोनों परिवार पहले ही गांव से पलायन कर चुके हैं। तीन बीघा खेती योग्य जमीन भी नदी में समा गई है। कटान शुरू होने से कोनी में लोग सहमे हुए हैं।
पिछले एक पखवाड़े से पहाड़ों पर होने वाली बारिश और बैराजों से रोजाना छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा नदी उफना गई है। कोनी गांव नदी के निशाने पर कई दिनों से था। मंगलवार को पानी का तेज बहाव गांव में प्रवेश कर गया। जागेश्वर का मकान घाघरा की लहरों ने लील लिया है।
अब राम निवास का आशियाना कटान के मुहाने पर आ गया है। यह दोनों लोग पहले ही गांव से पलायन कर खेत में शरण ले चुके हैं। कटान शुरू होने से कोनी के ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे हैं। गृहस्थी समेटकर लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। उधर, परमेश्वर पुरवा निवासी मुनीम की तीन बीघा जमीन खेती वाली जमीन भी घाघरा में समा गई है।
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नाव बनाने में जुटे ग्रामीण
बाढ़ की आशंका से ग्रामीणों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खानी हुसैनपुर में रहने वाले सीताराम नाव बनाने में जुट गए हैं। बाढ़ आने पर नाव ही क्षेत्र में आवागमन का प्रमुख साधन बनती हैं। सीताराम ने बताया दो नावों की मरम्मत कर चुके हैं। नई नाव भी बना रहे हैं।
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पिछले एक पखवाड़े से पहाड़ों पर होने वाली बारिश और बैराजों से रोजाना छोड़े जाने वाले लाखों क्यूसेक पानी से घाघरा नदी उफना गई है। कोनी गांव नदी के निशाने पर कई दिनों से था। मंगलवार को पानी का तेज बहाव गांव में प्रवेश कर गया। जागेश्वर का मकान घाघरा की लहरों ने लील लिया है।
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अब राम निवास का आशियाना कटान के मुहाने पर आ गया है। यह दोनों लोग पहले ही गांव से पलायन कर खेत में शरण ले चुके हैं। कटान शुरू होने से कोनी के ग्रामीण भयभीत नजर आ रहे हैं। गृहस्थी समेटकर लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। उधर, परमेश्वर पुरवा निवासी मुनीम की तीन बीघा जमीन खेती वाली जमीन भी घाघरा में समा गई है।
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नाव बनाने में जुटे ग्रामीण
बाढ़ की आशंका से ग्रामीणों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। खानी हुसैनपुर में रहने वाले सीताराम नाव बनाने में जुट गए हैं। बाढ़ आने पर नाव ही क्षेत्र में आवागमन का प्रमुख साधन बनती हैं। सीताराम ने बताया दो नावों की मरम्मत कर चुके हैं। नई नाव भी बना रहे हैं।