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Sitapur News: कर्ज चुकाने परदेस गए थे बेटे, शवों का इंतजार
Sun, 11 Oct 2026 12:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:11 AM IST
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रामपुर मथुरा। गुजरात में हुए हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और कर्ज चुकाने की उम्मीद लेकर परदेस गए कमाऊ बेटों की मौत की खबर से गांव में मातम पसरा है। शनिवार को दिनभर परिजन अपनों के शवों का इंतजार करते रहे। घरों में गूंजती चीख-पुकार और आंसुओं ने माहौल को गमगीन बनाए रखा। किसी को बेटे के इलाज में लिया कर्ज चुकाना था तो किसी को शादी का उधार उतारना था। कोई गिरवी रखा खेत छुड़ाने के लिए गुजरात में मजदूरी कर रहा था।
मृतक संदीप के पिता होली ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड और बहू रेनू के नाम मनरेगा जॉब कार्ड बना है। गांव में काम मिलता था, लेकिन चौका नदी में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण मजदूरी नहीं मिल पा रही थी।
पोते सचिन के दिल के इलाज में करीब पांच लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसे चुकाने की उम्मीद में संदीप करीब दो माह पहले गुजरात गया था। वहां उसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलना तय हुआ था, लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला था। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी कमाई से धीरे-धीरे कर्ज उतर जाएगा, मगर हादसे ने सबकुछ छीन लिया।
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मृतक कुलदीप की मां रामरानी ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड था, लेकिन मनरेगा जॉब कार्ड नहीं था। गुजरात में करीब 25 हजार रुपये महीने की कमाई होने के कारण वह पिछले दस वर्षों से वहीं मजदूरी कर रहा था। पांच माह पहले उसकी शादी हुई थी। शादी में करीब दो लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसे चुकाने के लिए वह शादी के तुरंत बाद ही गुजरात चला गया था। मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मृतक संदीप के पिता होली ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड और बहू रेनू के नाम मनरेगा जॉब कार्ड बना है। गांव में काम मिलता था, लेकिन चौका नदी में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण मजदूरी नहीं मिल पा रही थी।
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पोते सचिन के दिल के इलाज में करीब पांच लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसे चुकाने की उम्मीद में संदीप करीब दो माह पहले गुजरात गया था। वहां उसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलना तय हुआ था, लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला था। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी कमाई से धीरे-धीरे कर्ज उतर जाएगा, मगर हादसे ने सबकुछ छीन लिया।
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मृतक कुलदीप की मां रामरानी ने बताया कि बेटे के नाम श्रम कार्ड था, लेकिन मनरेगा जॉब कार्ड नहीं था। गुजरात में करीब 25 हजार रुपये महीने की कमाई होने के कारण वह पिछले दस वर्षों से वहीं मजदूरी कर रहा था। पांच माह पहले उसकी शादी हुई थी। शादी में करीब दो लाख रुपये का कर्ज हो गया था। इसे चुकाने के लिए वह शादी के तुरंत बाद ही गुजरात चला गया था। मां का रो-रोकर बुरा हाल है।