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Sitapur News: पिंडदान व तर्पण कर पितरों को किया विदा
Sun, 11 Oct 2026 12:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 11 Oct 2026 12:17 AM IST
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नैमिषारण्य। पितृ विसर्जन अमावस्या के पावन पर्व पर शनिवार को श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और प्रेम से अपने पितरों को विदा किया। इसके साथ ही 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का समापन हो गया। नैमिष के पावन चक्रतीर्थ व आदि गंगा गोमती में स्नान, दान का क्रम शुक्रवार मध्य रात्रि से शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद नाभि गया के नाम से विख्यात तीर्थ में पितरों के निमित्त पिंडदान एवं तर्पण किया।
इस अवसर पर तीर्थ पुरोहितों के घाटों पर भारी भीड़ लगी रही। इस मौके पर जुटे श्रद्धालुओं ने अपने-अपने पितरों के निमित्त दान-पूजन किया। पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन पितरों के धरती पर आने की मान्यता है। पुरोहित सुशील दीक्षित ने बताया कि इस दिन सभी पितृ अपने परिजनों के घर के द्वार पर बैठे रहते हैं। जो व्यक्ति इन्हें अन्न जल प्रदान करता है, उससे प्रसन्न होकर खुशी-खुशी आशीर्वाद देकर पितृलोक लौट जाते हैं।
श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन के क्रम में सबसे पहले चक्रतीर्थ स्थित भूतेश्वर नाथ समेत अन्य देवस्थानों का दर्शन किया। इसके बाद ललिता देवी मंदिर में दर्शन करने वालों की लंबी लाइन लगी रही। इसके अलावा व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, कालीपीठ बालाजी मंदिर, देवपुरी, सत्यनारायण मंदिर समेत अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।
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इस अवसर पर तीर्थ पुरोहितों के घाटों पर भारी भीड़ लगी रही। इस मौके पर जुटे श्रद्धालुओं ने अपने-अपने पितरों के निमित्त दान-पूजन किया। पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन पितरों के धरती पर आने की मान्यता है। पुरोहित सुशील दीक्षित ने बताया कि इस दिन सभी पितृ अपने परिजनों के घर के द्वार पर बैठे रहते हैं। जो व्यक्ति इन्हें अन्न जल प्रदान करता है, उससे प्रसन्न होकर खुशी-खुशी आशीर्वाद देकर पितृलोक लौट जाते हैं।
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श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन के क्रम में सबसे पहले चक्रतीर्थ स्थित भूतेश्वर नाथ समेत अन्य देवस्थानों का दर्शन किया। इसके बाद ललिता देवी मंदिर में दर्शन करने वालों की लंबी लाइन लगी रही। इसके अलावा व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, कालीपीठ बालाजी मंदिर, देवपुरी, सत्यनारायण मंदिर समेत अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।
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