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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Sitapur: The boundary wall of the Mission School's land, vested in the state government, was razed.

Sitapur: मिशन स्कूल की जमीन की बाउंड्रीवाल जमींदोज, आठ जेसीबी ने किया ध्वस्त, 100 करोड़ है कीमत

Fri, 10 Jul 2026 02:32 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर
अमर उजाला नेटवर्क, सीतापुर Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 10 Jul 2026 02:32 PM IST
सार

राज्य सरकार में निहित जमीन की कीमत लगभग 100 करोड़ है। इस भूमि पर नगर पालिका परिषद की ओर से वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी की जा रही है। इस जमीन पर बनी स्कूल की बाउंड्रीवाल को ध्वस्त किया जा चुका है।

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Sitapur: The boundary wall of the Mission School's land, vested in the state government, was razed.
जमीन पर बनी स्कूल की बाउंड्रीवाल को ध्वस्त किया गया। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सीतापुर शहर के सिविल लाइन स्थित मिशन स्कूल की राज्य सरकार में निहित जमीन की बाउंड्री वॉल को शुक्रवार को जमीदोज कर दिया गया। जिलाधिकारी न्यायालय ने इस जमीन को राज्य सरकार में निहित कर दिया है। सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडे एसडीएम सदर डॉक्टर जनार्दन तहसीलदार अजीत जायसवाल शुक्रवार को 8 जेसीबी लेकर मिशन स्कूल पहुंचे। पुलिस बल की मौजूदगी में राज्य सरकार में निहित जमीन की बाउंड्री वॉल को ध्वस्त कर दिया गया।

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डीएम कोर्ट ने राज्य सरकार में निहित की थी जमीन
सिविल लाइंस स्थित मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल की 3.562 हेक्टेयर नजूल भूमि का अनुदान  जिलाधिकारी न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। डीएम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्व कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर विद्यालय के मुख्य द्वार पर 34 पन्नों का नोटिस चस्पा किया था। लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की इस भूमि पर नगर पालिका परिषद की ओर से वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी की जा रही है। इस जमीन पर बनी स्कूल की बाउंड्रीवाल को शुक्रवार को ध्वस्त किया गया।
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1862 की सेल डीड को नहीं मिली मान्यता
विद्यालय प्रबंधन ने भूमि पर स्वामित्व साबित करने के लिए वर्ष 1862 की कथित क्रय-विलेख (सेल डीड) प्रस्तुत की थी। प्रबंधन का दावा था कि यह भूमि उनकी फ्री-होल्ड संपत्ति है। हालांकि न्यायालय ने इस दावे को अस्वीकार कर दिया। आदेश में उल्लेख किया गया कि प्रबंधन स्वयं वर्ष 1906 की लीज डीड और नजूल रजिस्टर में दर्ज अभिलेखों के आधार पर वर्षों से लगान जमा करता रहा है। ऐसे में निजी स्वामित्व का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नजूल भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिस पर अंतिम अधिकार सरकार का होता है।
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