सीतापुर: कोर्ट के आदेश पर 15 साल बाद ‘आजाद’ हुई शहीद उधम सिंह की प्रतिमा, गूंजे देशभक्ति के नारे
उधम सिंह की प्रतिमा को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित कराने के लिए भारतीय सिख संगठन की ओर से लंबे समय से विधिक पैरोकारी की जा रही थी। न्यायालय ने प्रतिमा को उचित एवं सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने के उद्देश्य से उसे रिलीज करने का आदेश दिया।
विस्तार
कोर्ट के आदेश पर करीब 15 साल से मिश्रिख कोतवाली के मालखाने में बंद क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह की प्रतिमा बुधवार को ‘आजाद’ हो गई। अदालती आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर प्रतिमा को मालखाने से रिलीज किया गया। प्रतिमा बाहर आते ही सिख समाज और स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ढोल नगाड़ों की थाप के बीच देशभक्ति के नारों के साथ प्रतिमा को नैमिषारण्य स्थित गुरुद्वारा साहिब ले जाया गया।
भारतीय सिख संगठन के जिलाध्यक्ष गुरपाल सिंह ने बताया कि शहीद उधम सिंह की प्रतिमा करीब डेढ़ दशक से कोतवाली के मालखाने में रखी थी। इसे सम्मानजनक स्थान पर स्थापित कराने के लिए भारतीय सिख संगठन की ओर से लंबे समय से विधिक पैरोकारी की जा रही थी। न्यायालय ने प्रतिमा को उचित एवं सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करने के उद्देश्य से उसे रिलीज करने का आदेश दिया।
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बुधवार को एक सैकड़ा से अधिक लोग कोतवाली पहुंचे। आवश्यक लिखापढ़ी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रतिमा को मालखाने से बाहर निकाला गया। इसके बाद ढोल नगाड़ों के साथ लोग प्रतिमा को शोभायात्रा के रूप में नैमिषारण्य ले गए।
गुरपाल सिंह ने कहा कि शहीद उधम सिंह ने देश की आजादी और स्वाभिमान के लिए अपना जीवन न्योछावर किया था। 15 वर्षों तक प्रतिमा का मालखाने में रहना पीड़ादायक था। अब न्यायालय के आदेश से उसे सम्मानजनक स्थान मिलने का रास्ता साफ हुआ है। फिलहाल प्रतिमा गुरुद्वारा साहिब में सुरक्षित रखी गई है। सर्वसम्मति से स्थान तय कर इसे स्थापित किया जाएगा।
मामूली विवाद की सजा शहीद की प्रतिमा को 15 साल भुगतनी पड़ी
नैमिषारण्य के ठाकुर नगर स्थित सार्वजनिक पार्क में मार्च 2010 में शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा स्थापित कराई जा रही थी। कुछ लोगों ने इसका विरोध यह कहते हुए किया कि प्रतिमा स्थापित कराने की अनुमति नहीं ली गई है। इस पर दोनों पक्षों में विवाद गहरा गया। मामला कोतवाली पहुंचा और प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्रतिमा भी कोतवाली में जमा हो गई। विवाद करने वालों की जमानत हो गई लेकिन शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा को 15 साल तक यह सजा काटनी पड़ी। अदालत के आदेश पर 15 साल बाद शहीद ऊधम सिंह की प्रतिमा को आजादी मिली है।
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