{"_id":"6150b5c88ebc3e01c2577f03","slug":"shoe-stockings-of-newborns-trapped-in-feeding-sitapur-news-lko5974049153","type":"story","status":"publish","title_hn":"फीडिंग में फंसे नौनिहालों के जूता-मोजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फीडिंग में फंसे नौनिहालों के जूता-मोजा
विज्ञापन
कंपोजिट विद्यालय अंबेडकर नगर में पढ़ाई करते छात्र-छात्राए। -संवाद
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। परिषदीय विद्यालयों के नौनिहालों को जूता-मोजा मिलने में इस बार पेंच फंस गया है। इसकी वजह से नौनिहालों को इसका लाभ लेने के लिए इंतजार करना होगा। कारण, इस बार शासन ने जूता-मोजा देने के बजाए सीधे इसका पैसा अभिभावकों को देने का निर्णय लिया है। पर शिक्षकों ने नौनिहालों की ऑनलाइन फीडिंग करने से मना कर दिया। इससे फीडिंग नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से जूता-मोजा मिलने में देरी हो रही है। इससे करीब पांच लाख नौनिहाल प्रभावित हो रहे हैं।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को प्रति वर्ष शासन की तरफ से जूता-मोजा दिए जाते है। ये जूता-मोजा सितंबर तक जिले में आ जाते थे। उसके बाद अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक इनका वितरण हो जाता था। इससे सर्दी की शुरुआत में नौनिहालों को जूता-मोजा मिल जाते थे। लेकिन इस बार सितंबर माह समाप्त की ओर है। लेकिन अभी तक जूता-मोजा का कोई अता पता नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार शासन ने नौनिहालों को जूता-मोजा देने के बजाए सीधे नौनिहालों के अभिभावकों के खातों में पैसा देने का निर्णय लिया है। अभिभावक बैंक से पैसे निकालकर अपने बच्चों के लिए खुद ही जूता मोजा खरीदेंगे। इससे हर बार जूता-मोजा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल ही समाप्त हो जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय के शिक्षकों को नौनिहालों का डाटा ऑनलाइन फीड करने का निर्देश दिया गया है।
विज्ञापन
इस डाटा के आधार पर ही पैसा भेजा जाएगा। शिक्षकों ने इसकी जानकारी होते ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी सूरत में हम यह फीडिंग नहीं करेंगे। इसकी वजह से नौनिहालों को समय से जूता-मोजा मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इससे जिले के करीब पांच लाख नौनिहालों को इसका लाभ लेने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
अन्य योजनाओं का भी मिलेगा पैसा
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार जूता-मोजा का पैसा सीधे अभिभावकों को देने का निर्णय लिया गया है। यह पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। अगर इसमें सफलता मिलती है तो प्रदेश सरकार अन्य लाभ भी अभिभावकों के खाते में भेज सकती है। स्कूली ड्रेस, स्कूली बैग, एमडीएम का भी पैसा सीधे खातों में भेजने की प्लानिंग चल रही है।
शिक्षकों को मिले संसाधन
शासन से सीधे शिक्षकों से फीडिंग करने का फरमान सुना दिया है। लेकिन इसके लिए कोई संसाधन तो दिए नहीं है। बीआरसी पर कंप्यूटर आपरेटर हैं। इनके माध्यम से फीडिंग हो सकती है। शिक्षक आखिर कहां से फीडिंग करा पाएगा। शिक्षक संगठन इसका पुरजोर विरोध करता है।
-रवीद्र दीक्षित, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
नहीं दी गई ट्रेनिंग
एक दिन पहले ही इस फीडिंग को लेकर एप लॉन्च किया गया है। इसके लिए शिक्षकों को कोई ट्रेनिंग तो मिली नहीं है। मोबाइल के माध्यम से सभी बच्चों की फीडिंग करना भी मुश्किल है। ऐसे में प्रदेश सरकार शिक्षकों के बजाए किसी दूसरे से फीडिंग करवाने की जिम्मेदारी तय करें।
- मनीष पांडेय, प्रदेश प्रवक्ता, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ
शुरू हो गई है फीडिंग
इस बार सीधे बच्चों के अभिभावकों को जूता-मोजा का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए बच्चों की फीडिंग शुरू हो गई है। उम्मीद है जल्द ही यह फीडिंग पूरी हो जाएगी।
- सरोज कुमार, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी
विज्ञापन
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को प्रति वर्ष शासन की तरफ से जूता-मोजा दिए जाते है। ये जूता-मोजा सितंबर तक जिले में आ जाते थे। उसके बाद अक्तूबर के प्रथम सप्ताह तक इनका वितरण हो जाता था। इससे सर्दी की शुरुआत में नौनिहालों को जूता-मोजा मिल जाते थे। लेकिन इस बार सितंबर माह समाप्त की ओर है। लेकिन अभी तक जूता-मोजा का कोई अता पता नहीं है।
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार शासन ने नौनिहालों को जूता-मोजा देने के बजाए सीधे नौनिहालों के अभिभावकों के खातों में पैसा देने का निर्णय लिया है। अभिभावक बैंक से पैसे निकालकर अपने बच्चों के लिए खुद ही जूता मोजा खरीदेंगे। इससे हर बार जूता-मोजा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल ही समाप्त हो जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय के शिक्षकों को नौनिहालों का डाटा ऑनलाइन फीड करने का निर्देश दिया गया है।
विज्ञापन
इस डाटा के आधार पर ही पैसा भेजा जाएगा। शिक्षकों ने इसकी जानकारी होते ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी सूरत में हम यह फीडिंग नहीं करेंगे। इसकी वजह से नौनिहालों को समय से जूता-मोजा मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। इससे जिले के करीब पांच लाख नौनिहालों को इसका लाभ लेने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
अन्य योजनाओं का भी मिलेगा पैसा
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार जूता-मोजा का पैसा सीधे अभिभावकों को देने का निर्णय लिया गया है। यह पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाएगा। अगर इसमें सफलता मिलती है तो प्रदेश सरकार अन्य लाभ भी अभिभावकों के खाते में भेज सकती है। स्कूली ड्रेस, स्कूली बैग, एमडीएम का भी पैसा सीधे खातों में भेजने की प्लानिंग चल रही है।
शिक्षकों को मिले संसाधन
शासन से सीधे शिक्षकों से फीडिंग करने का फरमान सुना दिया है। लेकिन इसके लिए कोई संसाधन तो दिए नहीं है। बीआरसी पर कंप्यूटर आपरेटर हैं। इनके माध्यम से फीडिंग हो सकती है। शिक्षक आखिर कहां से फीडिंग करा पाएगा। शिक्षक संगठन इसका पुरजोर विरोध करता है।
-रवीद्र दीक्षित, जिलाध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ
नहीं दी गई ट्रेनिंग
एक दिन पहले ही इस फीडिंग को लेकर एप लॉन्च किया गया है। इसके लिए शिक्षकों को कोई ट्रेनिंग तो मिली नहीं है। मोबाइल के माध्यम से सभी बच्चों की फीडिंग करना भी मुश्किल है। ऐसे में प्रदेश सरकार शिक्षकों के बजाए किसी दूसरे से फीडिंग करवाने की जिम्मेदारी तय करें।
- मनीष पांडेय, प्रदेश प्रवक्ता, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ
शुरू हो गई है फीडिंग
इस बार सीधे बच्चों के अभिभावकों को जूता-मोजा का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए बच्चों की फीडिंग शुरू हो गई है। उम्मीद है जल्द ही यह फीडिंग पूरी हो जाएगी।
- सरोज कुमार, सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी