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शिक्षा के आंगन में नहीं हो सका सरस्वती का पदार्पण

Tue, 19 Apr 2022 12:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2022 12:03 AM IST
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Saraswati's debut could not happen in the courtyard of education
पिसावां में राजकीय बालिका इंटर कालेज महमदापुर द्वतीय में उगी झाड़िया। -संवाद - फोटो : SITAPUR
पिसावां (सीतापुर)। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज महम्मदापुर द्वितीय कागजों पर चल रहा है। चार साल बाद भी शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। केवल एक शिक्षक व एक चपरासी को संबद्ध करके कॉलेज का संचालन कराया जा रहा है। विद्यालय में स्टाफ न होने से अभिभावक भी बच्चों को यहां दाखिला नहीं करवा रहे हैं। इससे क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षा के लिए भटकना पड़ रहा है।
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करीब सात वर्ष पहले सपा सरकार में 2015 में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की आधारशिला रखी गई थी। उस समय लोगों में आस जगी थी कि अब छात्राओं को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। उन्हें आसानी से बालिकाओं की निशुल्क पढ़ाई का लाभ मिलेगा। करोड़ों की लागत से दो वर्ष में ही विद्यालय का भवन बनकर तैयार हो गया था। 2017 में भाजपा सरकार बनते ही आनन-फानन में मानक विहीन कॉलेज भवन को माध्यमिक शिक्षा विभाग को हैंडओवर करा दिया गया था। 2018 से कॉलेज केवल कागजों पर ही चल रहा है।
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शुरुआत में डीआईओएस ने यहां पर राजकीय इंटर कॉलेज बीहटगौर में तैनात श्यामनाथ सिंह को विद्यालय का प्रभार दिया था। यह दिसंबर 2020 तक कॉलेज चलाते रहे। उसके बाद बीहटगौर कॉलेज के ही विनोद कुमार को यहां प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर संबद्ध कर दिया गया है। सुधीर कुमार मिश्र परिचारक के पद पर 2018 से संबद्ध हैं। इन दोनों के अलावा अन्य किसी भी स्टॉफ की तैनाती नहीं हो सकी है।
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जब शिक्षकों की तैनाती नहीं है तो छात्राएं भी दाखिला नहीं ले रही है। बालिकाओं के लिए कुुर्सी, लाइब्रेरी, प्रयोगशाला सहित कोई इंतजाम भी नहीं है। इससे इस क्षेत्र की बालिकाएं प्राइवेट कॉलेजों में दाखिला लेकर पढ़ाई पूरी कर रही है। छात्राओं का कहना है कि अगर शिक्षकों की तैनाती कर दी जाए तो यहां पर काफी सहूलियत मिलेंगी।
टूटने लगा विद्यालय भवन
कॉलेज में पानी की टंकी, शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, कार्यालय, स्वागतकक्ष, शौचालय के साथ खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान है। लेकिन इन कक्षों में कोई भी सामग्री नहीं है। केवल भवन बना हुआ है। विद्यालय का बिजली बिल करीब तीन लाख बकाया होने के कारण कनेक्शन भी काट दिया गया है।

भवन हैंडओवर हुए महज पांच वर्ष ही बीते है लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह जर्जर होता जा रहा है। पूरे परिसर को झाड़ियों ने घेर रखा है। शिक्षण कक्ष की खिड़की दरवाजों में दीमक लगकर टूट रहे हैं। दीवार व छतों से प्लास्टर टूटने लगा है। बरसात में छतों से पानी टपकने लगता है। परिसर में बनी पानी की टंकी केवल शोपीस बनकर रह गई है।
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