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बारिश में फिर ताल तलैया बनेंगी सड़कें
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सीतापुर। शहर की जलनिकासी की समस्या दशकों से बनी हुई है। इस तरफ कोई ठोस पहल न होने से हल्की सी बरसात में पूरा शहर जलमगन हो जाता है। नालों की सफाई न होने से इस बार भी शहर की करीब दो लाख आबादी को जलभराव से जूझना पड़ेगा। इस समय नालों में कूड़ा भरा हुआ है। अगर समय से नालों की सफाई हो जाती तो काफी हद तक जलनिकासी की समस्या से निजात मिल जाती।
नगर पालिका को भी सफाई की याद तब आती है, जब बरसात शुरू हो जाती है। पर अब झमाझम बारिश को कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में इस बार भी लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ेगा। सीतापुर शहर करीब सात किलोमीटर के दायरे में बसा है। शहर की आबादी करीब दो लाख है। जलनिकासी के लिए शहर में 20 से अधिक छोटे व बड़े नाले बने है।
इनके जरिये जलनिकासी होती है। 12 जून तक आधे नाले भी साफ नहीं हो सके हैं। अगर सफाई होती है तो कुछ प्रमुख स्थानों पर ही नालों को साफ करके छोड़ दिया जाता है। कई जगहों पर नाले पर अतिक्रमण होने की वजह से सफाई में व्यवधान उत्पन्न होता है। इसकी हकीकत दो दिन पहले हुई बरसात में सामने आई थी, जब पूरे शहर में पानी भर गया था।
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यहां तक की लोगों के घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया था। इसकी वजह से तमाम दिक्कतें उठानी पड़ी थी। अभी हालात सुधरे नहीं है। अभी भी कई मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। शहर में बढ़ती नवविकसित कॉलोनी और घटते संसाधन समस्या बने हुए है। नगर पालिका द्वारा नए नालों का निर्माण नहीं करवाया जा रहा है। केवल मोहल्ले में नालियां बनवा दी जाती है, लेकिन उनकी जलनिकासी के लिए खुले प्लाट में ही छोड़ दिया जाता है।
घर में घुस जाते विषैले जीव
शहर के हुसैनगंज मोहल्ले प्लाईवुड फैक्टरी के पीछे एक नई कॉलोनी बसी हुई है। इस मोहल्ले के बाशिंदों ने शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र सौंपा। इसके जरिये कहा कि मोहल्ले में न तो सड़कें और न ही जलनिकासी की व्यवस्था है। पिछले दो वर्षों से हम लोग बराबर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। शिकायत के बाद अफसर गलत आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण कर देते है। इसकी वजह से विषैले जीव जंतु घर के अंदर तक प्रवेश कर जाते है। इस मौके पर गुड्डी देवी, नीलम, संतोष, सूरज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
जलस्तर घटा पर परेशानी बरकरार
तरीनपुर मेला मैदान से गल्ला मंडी की तरफ जाने वाले मार्ग पर अब भी जलभराव है। बारिश के दो दिन गुजरने के बाद जलस्तर घटा है, लेकिन मुसीबतें बरकरार हैं। यहां पर लोग गंदे पानी के बीच से होकर आवागमन कर रहे है। इसकी वजह से उनको काफी दिक्कतें आती है। रात के समय पानी में कीड़े मकौड़े होने से लोगों को खतरा बना हुआ है। नगर पालिका ने जलनिकासी का कोई इंतजाम नहीं कराया है।
साफ नहीं हो सका नाला
शहर के तामसेनगंज मोहल्ले की जलनिकासी के लिए नाला बना है। जून के 12 दिन बीत गए है। इस दौरान तीन बार जोरदार बारिश हो चुकी है। इससे मोहल्ले में जलभराव हो गया था लेकिन अभी तक नाला साफ नहीं हो सका है। नाले की ऊपरी सतह तक पानी भरा हुआ है। बरसात में यह ओवरफ्लो हो जाता है। इससे नाले की गंदगी सड़कों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंच जाती है।
पिछले साल भी नहीं हुई थी सफाई
पुलिस लाइन के पास जंगलीनाथ मंदिर है। इस मंदिर के पड़ोस से आसपास के मोहल्ले की जलनिकासी के लिए नाला बना हुआ है। लेकिन यह नाला भी कूड़ा करकट से पटा पड़ा है। नाले में सिल्ट जमा हो गई है। यहां के लोगों का कहना है कि पिछले साल भी नाले की सफाई नहीं हुई थी। काफी समय पहले सफाई हुई थी तो केवल ऊपरी सतह से कूड़ा हटाकर नाला साफ करने का दावा कर दिया गया था।
शहर में नाला सफाई का तेजी से अभियान चलाया जा रहा है। कुछ जगहों पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इसकी वजह से बाधा उत्पन्न होती है। पोकलैंड व जेसीबी बराबर नालों की सफाई कर रही है।
- गुरु प्रसाद पांडेय, ईओ
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नगर पालिका को भी सफाई की याद तब आती है, जब बरसात शुरू हो जाती है। पर अब झमाझम बारिश को कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में इस बार भी लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ेगा। सीतापुर शहर करीब सात किलोमीटर के दायरे में बसा है। शहर की आबादी करीब दो लाख है। जलनिकासी के लिए शहर में 20 से अधिक छोटे व बड़े नाले बने है।
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इनके जरिये जलनिकासी होती है। 12 जून तक आधे नाले भी साफ नहीं हो सके हैं। अगर सफाई होती है तो कुछ प्रमुख स्थानों पर ही नालों को साफ करके छोड़ दिया जाता है। कई जगहों पर नाले पर अतिक्रमण होने की वजह से सफाई में व्यवधान उत्पन्न होता है। इसकी हकीकत दो दिन पहले हुई बरसात में सामने आई थी, जब पूरे शहर में पानी भर गया था।
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यहां तक की लोगों के घरों के अंदर तक पानी पहुंच गया था। इसकी वजह से तमाम दिक्कतें उठानी पड़ी थी। अभी हालात सुधरे नहीं है। अभी भी कई मोहल्लों में पानी भरा हुआ है। शहर में बढ़ती नवविकसित कॉलोनी और घटते संसाधन समस्या बने हुए है। नगर पालिका द्वारा नए नालों का निर्माण नहीं करवाया जा रहा है। केवल मोहल्ले में नालियां बनवा दी जाती है, लेकिन उनकी जलनिकासी के लिए खुले प्लाट में ही छोड़ दिया जाता है।
घर में घुस जाते विषैले जीव
शहर के हुसैनगंज मोहल्ले प्लाईवुड फैक्टरी के पीछे एक नई कॉलोनी बसी हुई है। इस मोहल्ले के बाशिंदों ने शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट को शिकायती पत्र सौंपा। इसके जरिये कहा कि मोहल्ले में न तो सड़कें और न ही जलनिकासी की व्यवस्था है। पिछले दो वर्षों से हम लोग बराबर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। शिकायत के बाद अफसर गलत आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण कर देते है। इसकी वजह से विषैले जीव जंतु घर के अंदर तक प्रवेश कर जाते है। इस मौके पर गुड्डी देवी, नीलम, संतोष, सूरज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
जलस्तर घटा पर परेशानी बरकरार
तरीनपुर मेला मैदान से गल्ला मंडी की तरफ जाने वाले मार्ग पर अब भी जलभराव है। बारिश के दो दिन गुजरने के बाद जलस्तर घटा है, लेकिन मुसीबतें बरकरार हैं। यहां पर लोग गंदे पानी के बीच से होकर आवागमन कर रहे है। इसकी वजह से उनको काफी दिक्कतें आती है। रात के समय पानी में कीड़े मकौड़े होने से लोगों को खतरा बना हुआ है। नगर पालिका ने जलनिकासी का कोई इंतजाम नहीं कराया है।
साफ नहीं हो सका नाला
शहर के तामसेनगंज मोहल्ले की जलनिकासी के लिए नाला बना है। जून के 12 दिन बीत गए है। इस दौरान तीन बार जोरदार बारिश हो चुकी है। इससे मोहल्ले में जलभराव हो गया था लेकिन अभी तक नाला साफ नहीं हो सका है। नाले की ऊपरी सतह तक पानी भरा हुआ है। बरसात में यह ओवरफ्लो हो जाता है। इससे नाले की गंदगी सड़कों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंच जाती है।
पिछले साल भी नहीं हुई थी सफाई
पुलिस लाइन के पास जंगलीनाथ मंदिर है। इस मंदिर के पड़ोस से आसपास के मोहल्ले की जलनिकासी के लिए नाला बना हुआ है। लेकिन यह नाला भी कूड़ा करकट से पटा पड़ा है। नाले में सिल्ट जमा हो गई है। यहां के लोगों का कहना है कि पिछले साल भी नाले की सफाई नहीं हुई थी। काफी समय पहले सफाई हुई थी तो केवल ऊपरी सतह से कूड़ा हटाकर नाला साफ करने का दावा कर दिया गया था।
शहर में नाला सफाई का तेजी से अभियान चलाया जा रहा है। कुछ जगहों पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इसकी वजह से बाधा उत्पन्न होती है। पोकलैंड व जेसीबी बराबर नालों की सफाई कर रही है।
- गुरु प्रसाद पांडेय, ईओ