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अमावस्या पर नैमिष में उमड़े श्रद्धालु
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नैमिषारण्य (सीतापुर)। सावन मास की अमावस्या पर गुरुवार को धार्मिक एवं पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य के चक्रतीर्थ समेत गोमती नदी के तट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ व गोमती नदी में स्नान किया और सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजन अर्चन किया।
मां ललिता देवी मंदिर समेत अन्य मंदिर व मठों में पूजा अर्चना की और देवी-देवताओं से सुख समृद्धि की मन्नतें मांगीं। पुरोहितों के मुताबिक अमावस्या पर करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। प्रत्येक माह की अमावस्या पर नैमिषारण्य की तपोभूमि पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
गुरुवार को अमावस्या को लेकर एक दिन पहले बुधवार की शाम से ही श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचने लगे थे। कोई रेल तो कोई रोडवेज बस या फिर निजी वाहनों से नैमिषारण्य पहुंचा। रात को नैमिषारण्य का नजारा देखने लायक था।
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अलसुबह श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ, गोमती के राजघाट, देवदेवेश्वर घाट एवं रुद्रावर्त घाट पर स्नान कर पूजन अर्चन किया और पुरोहितों एवं साधु- सन्यासियों को दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मां ललिता देवी के दर्शन कर परिवार कल्याण की कामना की। इसके बाद यहां के विभिन्न दर्शनीय स्थलों व्यासगद्दी, सूतगद्दी, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, बालाजी, त्रिशक्ति धाम, नारदानंद आश्रम, पहला आश्रम आदि का दर्शन कर पुण्य प्राप्त किया। सुबह कुछ देर हल्की बूंदाबांदी होने से श्रद्धालुओं को असुविधा हुई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ स्थितियां सामान्य हो गईं।
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मां ललिता देवी मंदिर समेत अन्य मंदिर व मठों में पूजा अर्चना की और देवी-देवताओं से सुख समृद्धि की मन्नतें मांगीं। पुरोहितों के मुताबिक अमावस्या पर करीब डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। प्रत्येक माह की अमावस्या पर नैमिषारण्य की तपोभूमि पर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ता है।
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गुरुवार को अमावस्या को लेकर एक दिन पहले बुधवार की शाम से ही श्रद्धालु नैमिषारण्य पहुंचने लगे थे। कोई रेल तो कोई रोडवेज बस या फिर निजी वाहनों से नैमिषारण्य पहुंचा। रात को नैमिषारण्य का नजारा देखने लायक था।
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अलसुबह श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ, गोमती के राजघाट, देवदेवेश्वर घाट एवं रुद्रावर्त घाट पर स्नान कर पूजन अर्चन किया और पुरोहितों एवं साधु- सन्यासियों को दान दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मां ललिता देवी के दर्शन कर परिवार कल्याण की कामना की। इसके बाद यहां के विभिन्न दर्शनीय स्थलों व्यासगद्दी, सूतगद्दी, हनुमान गढ़ी, कालीपीठ, बालाजी, त्रिशक्ति धाम, नारदानंद आश्रम, पहला आश्रम आदि का दर्शन कर पुण्य प्राप्त किया। सुबह कुछ देर हल्की बूंदाबांदी होने से श्रद्धालुओं को असुविधा हुई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ स्थितियां सामान्य हो गईं।