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बाढ़ पीड़ित पी रहे दूषित पानी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Aug 2016 11:42 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा की बाढ़ से ग्रामीण पहले ही बेघर हो चुके हैं। अब अधिकारियों की लापरवाही से ग्रामीणों के जीवन पर भी संकट मंडरा रहा है। 50 से अधिक गांवों में अब भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं पर उन्हें भोजन तो दूर पीने के पानी के लाले लगे हुए है। बच्चे और बड़े, सभी प्यास से बिलबिलाकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ऐसे में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
गुरुवार को घाघरा के जलस्तर में कमी आई। मगर इसके बाद भी बाढ़ प्रभावितों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। कटान जारी है। मरेली, दुर्गापुरवा, कोनी, बैरागीपुरवा, जिन्नापुरवा, ठेकेदारपुरवा समेत आधा सैकड़ा गांव में घरों के भीतर तक पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में कमी आने से ऊंचे स्थानों से पानी कम हुआ है।
लेकिन निचली जगहों पर पहले की तरह पानी भरा है। जिन गांवों में नाव के जरिये पहुंचा जा सकता है, वहां लंच पैकेट या लइया-चना एक बार पहुंचाने के बाद हफ्तों तक सुध नहीं ली जाती है। साफ पानी का इंतजाम न होने से लोग प्यास से बेचैन होकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। रोशनी के लिए कहने को सोलर लाइटें बांट अफसरों ने कागजी काम पूरा कर लिया पर जरूरतमंदों तक सोलर लाइटें पहुंची ही नहीं हैं।
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घाघरा व शारदा नदियों से घिरकर टापू बन चुके पचीसा गांव में रहने वालों की हालत बदतर होती जा रही है। मीडिया की सुर्खियां बनने पर अफसरों ने पहुंचकर राहत देने की रस्म अदायगी कर पचीसा को भुला दिया। जबकि पचीसा में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कटान के बाद बची दस एकड़ जमीन पर समूचे गांव के लोगों ने शरण ले रखी है।
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ऐसे में संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
गुरुवार को घाघरा के जलस्तर में कमी आई। मगर इसके बाद भी बाढ़ प्रभावितों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। कटान जारी है। मरेली, दुर्गापुरवा, कोनी, बैरागीपुरवा, जिन्नापुरवा, ठेकेदारपुरवा समेत आधा सैकड़ा गांव में घरों के भीतर तक पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में कमी आने से ऊंचे स्थानों से पानी कम हुआ है।
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लेकिन निचली जगहों पर पहले की तरह पानी भरा है। जिन गांवों में नाव के जरिये पहुंचा जा सकता है, वहां लंच पैकेट या लइया-चना एक बार पहुंचाने के बाद हफ्तों तक सुध नहीं ली जाती है। साफ पानी का इंतजाम न होने से लोग प्यास से बेचैन होकर दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। रोशनी के लिए कहने को सोलर लाइटें बांट अफसरों ने कागजी काम पूरा कर लिया पर जरूरतमंदों तक सोलर लाइटें पहुंची ही नहीं हैं।
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घाघरा व शारदा नदियों से घिरकर टापू बन चुके पचीसा गांव में रहने वालों की हालत बदतर होती जा रही है। मीडिया की सुर्खियां बनने पर अफसरों ने पहुंचकर राहत देने की रस्म अदायगी कर पचीसा को भुला दिया। जबकि पचीसा में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कटान के बाद बची दस एकड़ जमीन पर समूचे गांव के लोगों ने शरण ले रखी है।