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Sitapur News: सिर्फ सात होटलों के पास ही है अग्निशमन की एनओसी
Thu, 04 Jun 2026 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:52 PM IST
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ग्रीकगंज स्थित एक होटल के साइड में निकली सरियां। संवाद
सीतापुर। दिल्ली के होटल में हुए अग्निकांड में 22 लोगों की मौत की खबर ने सभी को झकझोर दिया है। जिस होटल में यह घटना हुई उसमें खामियां ही खामियां थीं। जिले के होटलों की हालत भी दिल्ली के उस होटल जैसी ही है। जिले में सिर्फ सात होटलों के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है। इसके अलावा अन्य होटलों के पास एनओसी नहीं है। वह सभी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं।
शहर के 20 से अधिक होटलों में अग्निशमन व्यवस्था के नाम पर सिर्फ आग बुझाने वाले सिलिंडर मात्र ही हैं। इनमें से अधिकांश में इमरजेंसी निकास की सुविधा ही नहीं है। कहीं लिफ्ट खराब है तो कहीं सीढि़यों के पास ही बिजली के तार फैले हैं। शहर के आसपास में पांच ऐसे होटल हैं, जिन्होंने अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है। इसके अलावा एक गेस्ट हाउस संचालक के पास भी एनओसी है। सिधौली व महमूदाबाद के एक-एक होटल के पास भी एनओसी है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह ने बताया कि होटल संचालन की अनुमति सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय से जारी होती है। दमकल विभाग सिर्फ रिपोर्ट लगाने का काम करता है। कई बार होटल संचालकों अवगत कराया जा चुका है कि वह एनओसी ले लें, ताकि मानकों की अनदेखी न हो सके।
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इनके पास है एनओसी
होटल मयूर, होटल लैंडमार्क, होटल स्काई, होटल रुद्रा, होटल वृंदा, होटल चंद्रा सिधौली, होटल फौजी महमूदाबाद और द नारायण (गेस्टहाउस)
कूदने पर भी गंवानी पड़ सकती है जान, बेसमेंट में बनी हैं दुकानें
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह ने बृहस्पतिवार को जिले के कई होटलों की जांच की। अधिकांश होटलों में खामियां मिली हैं। उन्होंने बताया कि सुखदेई होटल में आग बुझाने वाला सिस्टम दुरुस्त नहीं मिला है। होटल नारायण इन व आकाश में फायर सिलिंडरों को चेक करके अग्नि सुरक्षा के अन्य इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। होटल अमन में भी जांच की गई है। वहीं, संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने भी पड़ताल की। जिसमें यह निकलकर आया कि जिले में कुछ होटल ऐसे भी हैं जो कि दूसरी या तीसरी मंजिल पर बने हैं। इनके नीचे दुकानें हैं। ग्रीकगंज स्थित होटल अमन की इमारत के बेसमेंट में दुकानें बनी हैं। फिर एक हॉल दिखा, जिसमें छोटे कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा ऊपर होटल है। होटल के बाईं ओर कोई इमारत नहीं बनी है। इस तरफ सरियों का काफी बड़ा जाल सा बिछा है। अगर कोई आपात स्थिति में वहां से कूद भी जाए तो बुरी तरह से चोटिल हो सकता है।
लिफ्ट खराब, इमरजेंसी निकास बंद
बड़े हनुमान मंदिर के पास आबादी में स्थित होटल निमिषा के निचले हिस्से में दुकानें हैं। नीचे एक पुरानी लिफ्ट लगी है जो कि बंद मिली। ऊपर पहुंचने पर रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि होटल में 14 कमरे हैं। पूर्व में होटल में खाना भी बनता था। कुछ समय पहले खाना बनाना बंद कर दिया गया था। रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि इमरजेंसी निकास तो है। मगर उसको मालिक ने किन्हीं कारणों से बंद करा दिया है। (संवाद)
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शहर के 20 से अधिक होटलों में अग्निशमन व्यवस्था के नाम पर सिर्फ आग बुझाने वाले सिलिंडर मात्र ही हैं। इनमें से अधिकांश में इमरजेंसी निकास की सुविधा ही नहीं है। कहीं लिफ्ट खराब है तो कहीं सीढि़यों के पास ही बिजली के तार फैले हैं। शहर के आसपास में पांच ऐसे होटल हैं, जिन्होंने अग्निशमन विभाग से एनओसी ले रखी है। इसके अलावा एक गेस्ट हाउस संचालक के पास भी एनओसी है। सिधौली व महमूदाबाद के एक-एक होटल के पास भी एनओसी है।
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मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह ने बताया कि होटल संचालन की अनुमति सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय से जारी होती है। दमकल विभाग सिर्फ रिपोर्ट लगाने का काम करता है। कई बार होटल संचालकों अवगत कराया जा चुका है कि वह एनओसी ले लें, ताकि मानकों की अनदेखी न हो सके।
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इनके पास है एनओसी
होटल मयूर, होटल लैंडमार्क, होटल स्काई, होटल रुद्रा, होटल वृंदा, होटल चंद्रा सिधौली, होटल फौजी महमूदाबाद और द नारायण (गेस्टहाउस)
कूदने पर भी गंवानी पड़ सकती है जान, बेसमेंट में बनी हैं दुकानें
मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष सिंह ने बृहस्पतिवार को जिले के कई होटलों की जांच की। अधिकांश होटलों में खामियां मिली हैं। उन्होंने बताया कि सुखदेई होटल में आग बुझाने वाला सिस्टम दुरुस्त नहीं मिला है। होटल नारायण इन व आकाश में फायर सिलिंडरों को चेक करके अग्नि सुरक्षा के अन्य इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। होटल अमन में भी जांच की गई है। वहीं, संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने भी पड़ताल की। जिसमें यह निकलकर आया कि जिले में कुछ होटल ऐसे भी हैं जो कि दूसरी या तीसरी मंजिल पर बने हैं। इनके नीचे दुकानें हैं। ग्रीकगंज स्थित होटल अमन की इमारत के बेसमेंट में दुकानें बनी हैं। फिर एक हॉल दिखा, जिसमें छोटे कार्यक्रम होते हैं। इसके अलावा ऊपर होटल है। होटल के बाईं ओर कोई इमारत नहीं बनी है। इस तरफ सरियों का काफी बड़ा जाल सा बिछा है। अगर कोई आपात स्थिति में वहां से कूद भी जाए तो बुरी तरह से चोटिल हो सकता है।
लिफ्ट खराब, इमरजेंसी निकास बंद
बड़े हनुमान मंदिर के पास आबादी में स्थित होटल निमिषा के निचले हिस्से में दुकानें हैं। नीचे एक पुरानी लिफ्ट लगी है जो कि बंद मिली। ऊपर पहुंचने पर रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि होटल में 14 कमरे हैं। पूर्व में होटल में खाना भी बनता था। कुछ समय पहले खाना बनाना बंद कर दिया गया था। रिसेप्शनिस्ट ने बताया कि इमरजेंसी निकास तो है। मगर उसको मालिक ने किन्हीं कारणों से बंद करा दिया है। (संवाद)