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जहरीली गैस हादसा : बिना रजिस्ट्रेशन के हो रहा था ऑनलाइन कारोबार
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सीतापुर। दि-बालाजी आर्गेनिक्स फैक्टरी से निकली जहरीली गैस ने सात लोगों की जान ली। यह फैक्टरी बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रही थी। कारोबार ऑनलाइन चल रहा था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी कोई एनओसी नहीं ली गई थी। इसका खुलासा डीएम अखिलेश तिवारी ने किया है।
क्षेत्र में अब चर्चा है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है। सालों से तेजाब बनाने वाली फैक्टरी नहर किनारे एक टिन शेड में चल रही थी। इस फैक्टरी की जिम्मेदार अफसरों को भनक तक नहीं लगी। न जांच, न पड़ताल, सब कुछ हवा में चल रहा था।
हादसे में एक पूरा परिवार खत्म हो गया, तब जिम्मेदारों को पता चला कि वहां मौत बांटने वाली कोई फैक्टरी संचालित थी। अब कार्रवाई के नाम पर प्रशासन शवों का विसरा सुरक्षित करेगा। जांच के लिए भरे गए नमूने प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
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उसके बाद सब कुछ रफा-दफा हो जाएगा। पुलिस भी केस दर्ज कर, कुछ लोगों पर कार्रवाई करने के बाद मामले को बंद कर देगी। अभी मौतों के सही कारणों का राजफाश होना बाकी है।
टैंकर से गिरे केमिकल से बनी जहरीली गैस
डीएम ने बताया कि दरी फैक्ट्री के पास एक केमिकल फैक्टरी है। जिसमें रात को टैंकर से कोई लिक्विड उतारा गया था। यह लिक्विड जमीन पर गिरा। शायद इसी से जहरीली गैस बनी है। फैक्टरी के पास ही मजदूर रहते हैं।
गैस की चपेट में आने से इनकी मौत की आशंका है। इस मामले में एनडीआरएफ, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के विशेषज्ञों की टीम को भी जांच के लिए मौके पर बुलाया गया है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम पहुंची।
उसने दूषित पानी, कचरे, मिट्टी व मृतकों द्वारा खाने के लिए तैयार किया गया खाने का सैंपल लिया है। खाने में चावल, दाल आदि के नमूने लिए गए हैं। इसके अलावा पुलिस, एलआईयू, विशेष शाखा, आईबी आदि की टीमें भी मौके पर पहुंच कर जानकारी जुटाई है।
पुलिस ने कराई कांबिंग
दरी फैक्टरी में सात लोगों के शव मिलने के बाद आशंका थी कि जहरीले केमिकल से कुछ और लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसके लिए एसपी एलआर कुमार ने फैक्टरी के आसपास के बड़े दायरे में कांबिंग कराई थी। भारी संख्या में पुलिस फोर्स को मास्क पहनाकर क्षेत्र के खेतों, झाड़ियों आदि में भी कांबिंग कराई थी। कोई प्रभावित व्यक्ति व मवेशी नहीं मिला।
कैमिकल निकाल टैंक की हुई थी धुलाई
सूत्र बताते हैं कि रात को फैक्टरी में एक टैंकर से कैमिकल आया था। उसे दूसरी जगह डंप कर फैक्टरी में ट्यूबवेल चलाया गया। जिससे खाली टैंकर की धुलाई की गई। कहा जा रहा है कि धुलाई के समय केमिकल पानी में मिलकर पड़ोस स्थित दरी फैक्टर में पहुंच गया। दरी फैक्ट्री में एक स्थान पर काफी पानी ठहरा हुआ था। उसमें दुर्गंध आ रही थी। पानी में कुछ जीव-जंतु भी मरे पड़े थे।
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क्षेत्र में अब चर्चा है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है। सालों से तेजाब बनाने वाली फैक्टरी नहर किनारे एक टिन शेड में चल रही थी। इस फैक्टरी की जिम्मेदार अफसरों को भनक तक नहीं लगी। न जांच, न पड़ताल, सब कुछ हवा में चल रहा था।
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हादसे में एक पूरा परिवार खत्म हो गया, तब जिम्मेदारों को पता चला कि वहां मौत बांटने वाली कोई फैक्टरी संचालित थी। अब कार्रवाई के नाम पर प्रशासन शवों का विसरा सुरक्षित करेगा। जांच के लिए भरे गए नमूने प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
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उसके बाद सब कुछ रफा-दफा हो जाएगा। पुलिस भी केस दर्ज कर, कुछ लोगों पर कार्रवाई करने के बाद मामले को बंद कर देगी। अभी मौतों के सही कारणों का राजफाश होना बाकी है।
टैंकर से गिरे केमिकल से बनी जहरीली गैस
डीएम ने बताया कि दरी फैक्ट्री के पास एक केमिकल फैक्टरी है। जिसमें रात को टैंकर से कोई लिक्विड उतारा गया था। यह लिक्विड जमीन पर गिरा। शायद इसी से जहरीली गैस बनी है। फैक्टरी के पास ही मजदूर रहते हैं।
गैस की चपेट में आने से इनकी मौत की आशंका है। इस मामले में एनडीआरएफ, पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण विभाग के विशेषज्ञों की टीम को भी जांच के लिए मौके पर बुलाया गया है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम पहुंची।
उसने दूषित पानी, कचरे, मिट्टी व मृतकों द्वारा खाने के लिए तैयार किया गया खाने का सैंपल लिया है। खाने में चावल, दाल आदि के नमूने लिए गए हैं। इसके अलावा पुलिस, एलआईयू, विशेष शाखा, आईबी आदि की टीमें भी मौके पर पहुंच कर जानकारी जुटाई है।
पुलिस ने कराई कांबिंग
दरी फैक्टरी में सात लोगों के शव मिलने के बाद आशंका थी कि जहरीले केमिकल से कुछ और लोग प्रभावित हो सकते हैं। इसके लिए एसपी एलआर कुमार ने फैक्टरी के आसपास के बड़े दायरे में कांबिंग कराई थी। भारी संख्या में पुलिस फोर्स को मास्क पहनाकर क्षेत्र के खेतों, झाड़ियों आदि में भी कांबिंग कराई थी। कोई प्रभावित व्यक्ति व मवेशी नहीं मिला।
कैमिकल निकाल टैंक की हुई थी धुलाई
सूत्र बताते हैं कि रात को फैक्टरी में एक टैंकर से कैमिकल आया था। उसे दूसरी जगह डंप कर फैक्टरी में ट्यूबवेल चलाया गया। जिससे खाली टैंकर की धुलाई की गई। कहा जा रहा है कि धुलाई के समय केमिकल पानी में मिलकर पड़ोस स्थित दरी फैक्टर में पहुंच गया। दरी फैक्ट्री में एक स्थान पर काफी पानी ठहरा हुआ था। उसमें दुर्गंध आ रही थी। पानी में कुछ जीव-जंतु भी मरे पड़े थे।