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नये भवन की आस में तोड़ दिया पुराना घर

Wed, 08 Jun 2022 12:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 12:27 AM IST
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Old house demolished in the hope of new building
पुराना सीतापुर में अधूरा पड़ा प्रधानमंत्री आवास। -संवाद - फोटो : SITAPUR
सीतापुर। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी बजट के अभाव में परेशान हैं। योजना के तहत पहली किस्त मिलते ही उन्होंने अपने कच्चे घर को तोड़कर नया घर बनाना शुरू कर दिया था। अब बजट जारी न होने से काम रुक गया है। छत नहीं पड़ सकी है। बारिश से पहले निर्माण कार्य पूरा होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं।
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ऐसे में लाभार्थी बारिश के डर से सहमे हुए हैं। उनके सामने बारिश में सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है। शहर के करीब 4361 पीएम आवास अधूरे पड़े हैं। आवास पूर्ण करने के लिए लोग जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के रोजाना चक्कर लगा रहे हैं।
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केंद्र सरकार की तरफ से शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित है। इस योजना के तहत एक लाभार्थी को ढाई लाख रुपये भवन बनाने के लिए मिलते हैं। तीन किश्तों में लाभार्थी को बजट प्राप्त होता है। पहली बार में 50 हजार में नीव भरानी होती है। दूसरी किस्त में स्लैप व बिल्डिंग बनाने के लिए 1.50 लाख रुपये मिलते है।
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तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये मिलते है। इससे भवन में प्लास्टर सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। इस समय भवन बनाने में लाभार्थियों को दिक्कतें आ रही है। इस योजना के तहत जिले में 4361 भवन अधूरे पड़े है। किसी लाभार्थी की छत पड़ गई है तो किसी ने केवल नींव ही भराई है तो कोई पहली किस्त आने पर नींव खोदवाने का इंतजार कर रहा है।
किसी को पहली तो किसी को दूसरी व तीसरी किस्त का इंतजार है। जब बजट नहीं मिल रहा है तो लाभार्थी डूडा कार्यालय के चक्कर काट रहे है। वह रोजाना बजट आने का इंतजार कर रहे है। इससे लाभार्थियों को भवन पूर्ण करने में इंतजार करना पड़ रहा है। इस पर डूडा ने इन भवनों को पूर्ण कराने के लिए 33.80 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है, जिससे यह भवन पूरा हो सके।

हर किस्त के बाद होती है जीओ टैगिंग
शहरी पीएम आवास के तहत पहली किस्त मिलने से पहले खाली जमीन की जीओ टैगिंग की जाती है। पहली किस्त मिलने के बाद जब बजट खर्च हो जाता है तो विभाग दूसरी बार उसकी जीओ टैगिंग करवाता है। उसके बाद जब दूसरी किस्त खर्च की जाती है। तीसरी किस्त के लिए जीओ टैगिंग कराई जाती है। यानी प्रत्येक किस्त की मॉनीटरिंग के बाद ही लाभ मिलता है।
बजट के अभाव में भवनों का काम रुका हुआ है। इसके लिए केंद्र सरकार को 33.80 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही यह बजट मिल जाएगा।
- पियूष मिश्रा, सिविल इंजीनियर, डूडा
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