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नर्सों की हड़ताल से चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं
Amarujala Bureau
Updated Fri, 02 Sep 2016 11:27 PM IST
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हड़ताल से सरकारी दफ्तरों में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : अमर उजाला
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श्रमिक यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को जिले में हड़ताल का मिला जुला असर दिखा। हड़ताल का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिखा। नर्सों के काम न करने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी। इस दौरान संविदा कर्मियों से जैसे-तैसे काम चलाया गया।
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शुक्रवार को नर्सों की हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। मरीजों को लेकर तीमारदार भटकते रहे। हालांकि जैसे ही नर्सें हड़ताल पर गईं, संविदाकर्मी व ट्रेनी को इलाज में सहयोग पर लगवा दिया गया। हालांकि इस दौरान अधिकारियों को व्यवस्थाएं संभालने में पसीने-पसीने होना पड़ा। खुद सीएमओ ओपीडी में बैठकर मरीजों को देख रहे थे।
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सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह सुबह 8 बजे जिला अस्पताल पहुंचे और ओपीडी में पहुंचे। यहां पर उन्होंने मरीजों को देखना शुरू किया। सबसे बुरा हाल इमरजेंसी का था। यहां पर हालत ये थी कि डॉ. एमके प्रजापति को इमरजेंसी ड्यूटी पर लगाया गया था। वे त्वचा रोग विशेषज्ञ हैं। जिसकी वजह से ओपीडी के मरीज भी इमरजेंसी पहुंच रहे थे। वार्डों की हालत यह थी कि प्रत्येक वार्ड में एक संविदा नर्स के साथ ट्रेनी नर्सों व ब्वायज को तैनात किया गया था। इमरजेंसी में मरीजों के तीमारदारों को मरीजों की ड्रेसिंग खुद ही करनी पड़ी।
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मुख्य सचिव के आदेश पर सीएमओ ने संभाली ओपीडी
सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह शुक्रवार सुबह अचानक जिला अस्पताल पहुंचे। यह देखते ही अधीनस्थ व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गए। उन्हें डर था कि कहीं खामियों पर नजर पड़ने के बाद सीएमओ फटकार न लगा दें, लेकिन वह ओपीडी में बैठ गए और मरीजों को देखने लगे। फिर पता चला कि गुरुवार को मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने सीएमओ तक को चार घंटे तक ओपीडी में बैठने का निर्देश दिया है। इस बदलाव से लोग खुश दिखे।
बढ़ाया जाए न्यूनतम वेतन
आयकर कार्यालय के प्रांगण में राजपत्रित आयकर अधिकारी व कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर अपनी मांगों को लेकर परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था केंद्र सरकार के उदासीन रवैये के कारण मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी है। इसकी प्रमुख वजह यह है सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन न बढ़ाया जाना है। इस मौके पर रामकरन गौतम, प्रशांत मिश्र, संजय कुमार, अंकुर त्रिपाठी, मनोज आदि मौजूद रहे।
बीएसएनएल कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
बीएसएनएलईयू व नेशनल फेडरेशन इंपलाइज यूनियन बीएसएनएल के बैनर तले कर्मियों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया, हालांकि भारतीय टेलीकॉम इंपलाइज यूनियन के कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए। सभी संचार सेवाओं की बहाली में जुटे रहे।
हड़ताल से कुछ संचार सेवाएं लड़खड़ाई रहीं। जिस कारण उपभोक्ताओं को परेशानियां उठानी पड़ीं। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों ने ट्रेड यूनियन के आह्वान पर तालाबंदी रखी। प्रदर्शनकारियों ने श्रमिक विरोधी, जनविरोधी व प्रत्यक्ष विेदशी निवेश बढ़ाने व निजीकरण करने के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले पीडब्लूडी कार्यालय में कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया।