फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   Mentally ill brother's land was fraudulently seized, justice was delivered after 18 years.

Sitapur News: धोखे से मानसिक बीमार भाई की हथियाई जमीन, 18 साल बाद इंसाफ

Sat, 25 Oct 2025 11:33 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Sat, 25 Oct 2025 11:33 PM IST
विज्ञापन
Mentally ill brother's land was fraudulently seized, justice was delivered after 18 years.
सीतापुर। लहरपुर के सोहरिया गांव के मजरा मोहारी निवासी रामजीवन की जमीन उनके ही भाई रामपाल ने अपनी पत्नी सुदामा के नाम बैनामा करवा ली। इस बैनामे को निरस्त करने के लिए एक वाद दायर हुआ। कोर्ट के आदेश पर 18 साल बाद वादी पक्ष को इंसाफ मिला।
विज्ञापन


मोहारी निवासी मानसिक रूप से बीमार रामजीवन की जमीन उनके भाई रामपाल ने लालच में अपनी पत्नी सुदामा के नाम बैनामा करवा ली। बैनामे के दौरान रामजीवन के मानसिक बीमार होने की बात छिपाई गई। यह बैनामा 5 अक्तूबर 2007 को करवाया गया। इस बैनामे के बदले रामजीवन को रुपये भी नहीं दिए गए। हालांकि बैनामे में 50 हजार रुपये देने का जिक्र किया गया, जो गलत पाया गया।
विज्ञापन

मामले में रामजीवन के एक अन्य भाई हीरालाल ने वाद मित्र की हैसियत से बैनामा निरस्त कराने के लिए न्यायालय सिविल जज (जूनियर डिवीजन) में वाद दायर किया। न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी में सुनवाई के दौरान छह वाद बिंदुओं पर गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई जारी रही। इस दौरान रामजीवन की मृत्यु हो गई। सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/ एफटीसी आकांक्षा पिपिल ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस बैनामे को निरस्त करने का आदेश दिया। वहीं, बैनामा निरस्तीकरण के आधार पर वादी के विधिक उत्तराधिकारी का नाम खतौनी में दर्ज करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बैंक पासबुक से खुला राज
रामजीवन के पिता का नाम महावीर था। महावीर के चार पुत्र हीरालाल, बाबूराम, रामपाल व रामजीवन थे। रामजीवन सबसे छोटे थे। वह जन्म से मानसिक बीमार थे। महावीर की मृत्यु पर उनकी 31 बीघा 12 बिसवां जमीन उनके चारों पुत्रों के नाम आ गई। रामजीवन के हिस्से की जमीन पर गन्ने की खेती होती थी। उसका पैसा बैंक खाते में आता था। इसके लिए सांडा स्थित भगीरथ ग्रामीण बैंक में 23 सितंबर 1993 को रामपाल द्वारा ग्राम प्रधान बिंद्रा प्रसाद के सहयोग से रामजीवन का बचत खाता संख्या 4787 खोला है। इसमें रामजीवन के हिस्से की जमीन का गन्ने का पैसा आता था। इसका संचालन बैंकिंग नियमावली के अनुसार ग्राम प्रधान बिंद्रा प्रसाद व भाई रामपाल के माध्यम से होता था।
रामजीवन की मानसिक बीमारी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सकरन में इलाज भी जारी रहा। हालांकि इस इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ। इस बैंक की पासबुक को ही रामजीवन के मानसिक बीमार होने का दस्तावेजी साक्ष्य माना गया। इसी आधार पर बैनामा निरस्त हुआ।


विधि विशेषज्ञ बोले- सर्वोच्च न्यायालय की नजीर है अहम
विधि विशेषज्ञ मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे वाद जहां किसी बैनामे के दस्तावेज को निरस्त करने की प्राथमिक मांग हो, राजस्व न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। यह वाद धारा 31 विनिर्दिष्ट अनुतोष अधिनियम के तहत सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आते हैं। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा गोरखनाथ बनाम एच एन सिंह 1973 एआईआर (एससी) 2451 व इंद्र देव बनाम रामप्यारी 1982 लॉ सूट (एएलएल) 763 के मामले में स्थापित विधि के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अपनी भूमि का हस्तांतरण किसी शून्य या शून्यीकरण भूलेख द्वारा करता है तो उसे सिविल न्यायालय में उस विलेख को निरस्त या शून्य घोषित कराने का अधिकार है। चाहे वह भूमि कृषि योग्य हो। न्यायालय यह मानता है कि ऐसे वादों का मुख्य अनुतोष दस्तावेज यानि बैनामे का निरस्तीकरण है। इस केस में बैंक पासबुक से रामजीवन का मानसिक बीमार होना प्रमाणित हुआ। ऐसे में बैनामा निरस्त किया गया। वादी पक्ष को न्याय मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed