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चार सालों से कई मनरेगा मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ

Sun, 21 Feb 2021 01:11 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Feb 2021 01:11 AM IST
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Many MNREGA workers have not been paid for four years
सीतापुर। मनरेगा मजदूरों को रोजगार देने के मामले में जिले ने भले ही यूपी में टॉप किया हो लेकिन पिछले चार सालों से श्रमिकों की लाखों की गाढ़ी कमाई खामियों की वजह से फंसी पड़ी है। श्रमिकों के खाते में ब्लॉकों से रकम भेजने के बाद भी रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन (पैसा वापस आने) से जिम्मेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब वे खामियों को दुरुस्त कर फिर से रकम भेजने के लिए नए-नए जतन करने में जुट गए हैं।
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दरअसल, मनरेगा के तहत जॉब कॉर्ड धारकों को एक वित्तीय साल में सौ दिन का रोजगार देने का प्रावधान है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के परिवार के भरण-पोषण में कोई दिक्कत न हो। मनरेगा मजदूर को 201 रुपये प्रतिदिन की दर से पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है।
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मजदूरों को रोजगार देने में जिला अव्वल साबित हुआ है, इससे विभागीय अफसरों से लेकर कर्मी तक फूले नहीं समा रहे हैं लेकिन इसी बीच चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर वित्तीय वर्ष 2020-21 तक यानी करीब चार सालों से मजदूरों की मेहनत की गाढ़ी कमाई उन्हें अब तक नहीं मिल सकी है। मजदूरी करने के बाद भी पैैसे उनके हाथ में अब तक नहीं पहुंच सका है।
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उपायुक्त श्रम रोजगार कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-21 तक संबंधित ब्लॉकों से मजदूरों के खाते में रकम ट्रांसफर करने के लिए 4241 बार ट्रांजेक्शन किया गया लेकिन ये ट्रांजेक्शन लगातार रिजेक्ट होते चले गए। विभागीय जानकारों के मुताबिक कितने मजदूरों को पैसा नहीं मिला है, इसकी सटीक जानकारी मिलना मुश्किल है।
एक श्रमिक के खाते में रकम भेजने के लिए कई-कई बार ट्रांजेक्शन किया जाता है लेकिन वह फेल हो जाता है। ऐसे में ट्रांजेक्शन की संख्या तो बढ़ती रहती है पर मजदूरों का आंकड़ा नहीं मिल पाता है। पिछले चार सालों में रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन 4241 के हिसाब से औसतन अलग-अलग ब्लॉकों में करीब डेढ़ हजार के करीब मजदूर होंगे जिनका पारिश्रमिक अभी फंसा हुआ है।
विभागीय जानकार बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर 2020-21 के बीच अभी 45 लाख 44 हजार 510 रुपया है जो कि रिजेक्टेड ट्रांजेक्शन के बाद वापस आ चुका है। इससे डीसी मनरेगा से लेकर ब्लॉकों के जिम्मेदार तक परेशान हैं। श्रमिकों के खाते में फिर से रकम भेजने के लिए वे इस बार कील-कांटा पूरी तरह से दुरुस्त करने में तेजी से लगे हैं।

डीसी मनरेगा सुशील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर 2021 तक सौ दिन रोजगार के तहत मजदूरों के खाते में पारिश्रमिक की रकम डालने के लिए 4241 बार ट्रांजेक्शन किए गए जो रिजेक्ट होते गए। इन वित्तीय वर्षों का करीब 45 लाख से अधिक रुपया श्रमिकों का फंसा हुआ है। अब इन पैसों को श्रमिकों के खाते में भेजने के लिए ब्लॉकवार एक-एक श्रमिक के खाते को देखा जा रहा है। उनके सही खाते व पासबुक की जानकारी ली जा रही है। जिनके के पास यह व्यवस्था नहीं है, उनका खाता डाक विभाग में खुलवाकर वेबसाइट के जरिए भुगतान कराने की तैयारी है।
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