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मुद्दे दरकिनार, जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण की दिखी बयार

Fri, 25 Feb 2022 12:38 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Feb 2022 12:38 AM IST
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Issues sidelined, the winds of caste equation and polarization seen
सीतापुर। चुनावी शंखनाद के बाद से सियासी फिजां में गूंज रहे महंगाई, बेरोजगारी के मुद्दों का मतदान के दिन बुधवार को बहुत असर नजर नहीं आया। वोट की चोट करने आए लोगों की जुबां पर विकास का मुद्दा जरूर था, लेकिन इन सबके बीच जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण की बयार काफी दिखी। मुद्दों को दरकिनार कर जातीय समीकरण पर मतदाता वोटिंग करने को आतुर दिखा।
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जिले की कई सीटों पर मतदाताओं के बिखराव से सियासी समीकरण उलझे नजर आ रहे हैं। अब नतीजा क्या होता है, इसके लिए तो 10 मार्च का इंतजार करना पड़ेगा। आठ जनवरी को जिले में चुनावी शंखनाद होने के बाद से ही सियासी माहौल दिन पर दिन गरमाता चला गया। हर दिन जिले की सियासत में नए-नए घटनाक्रम ने रोमांच को और धार देने की कोशिश की। फिर चाहे टिकट का बंटवारा हो, प्रत्याशी के चयन का फंसा पेच हो।
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हर मसले को लेकर सियासी चौसर काफी अहम रही, लेकिन चुनावी दंगल में पहलवानों के उतरने के बाद रण जीतने के लिए तरह-तरह के मुद्दों को आधार बनाया गया। चौथे चरण के तहत 23 फरवरी को मतदान को सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई थी। आठ जनवरी से लेकर 23 फरवरी यानी की करीब 45 दिनों तक जिले में छिड़े सत्ता के संग्राम को लेकर मुद्दों को उछाला जा रहा था। पुराने मामलों को नया कर चुनावी रंग देने की कोशिश की जा रही थी।
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मुद्दों के जरिये प्रत्याशियों की कुछ पुरानी कमियों को भी उजागर कर मात देने की कोशिश की, फिर चाहे सियासी दिग्ग्जों का मंच हो या फिर सियासी मोहरों का जनसंपर्क। उन मामलों को पुरजोर तरीके से उठाने की पूरी कोशिश की, जिनके जरिए एक-दूसरे की दुखती रग को दबाया जा सका। उम्मीद थी कि मतदान के दिन इन मुद्दों को उछाला जाएगा, लेकिन बुधवार को ऐसा कहीं नहीं दिखा।
हर जगह पर इन मुद्दों का शोर नहीं था। हालांकि, मतदान करने आने वाले लोगों में महंगाई, बेरोजगारी और विकास की बातें थीं, लेकिन इन सबसे ज्यादा जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण हावी दिखा। रामकोट क्षेत्रके एक पोलिंग बूथ पर पहुंची महिला मतदाता ने कहा कि उसके लिए प्रत्याशी अहम है। महोली विधानसभा क्षेत्र के शेरपुर प्राथमिक विद्यालय के पोलिंग बूथ पर पहली बार मतदान करने पहुंचे युवा ने कहा कि प्रत्याशी के चेहरे पर ही उसने वोटिंग की है।
अब मतदाताओं के इस बदले हुए मिजाज को लेकर सियासी रणनीतिकार अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं, लेकिन इससे समीकरण भी उलझने लगे हैं। सदर विधानसभा, महोली, हरगांव, मिश्रिख, बिसवां, सिधौली, लहरपुर, सेवता, महमूदाबाद तक वोटरों का मिजाज का भांपना आसान नहीं है। मतदाता मौन है। कई जगहों पर पूछने पर भी वह कुछ नहीं बोले। मुस्कुरा दिए।

नहीं कर पा रहे सटीक आंकलन
जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर हुए मतदान के बाद अब दलों से लेकर प्रत्याशियों की नजरें टिक गई हैं। सीटों के अनुसार मतदाताओं के जनादेश पर नजर डालें तो हर विधानसभा सीटों पर उनका रुझान बदला-बदला है। ऐसे में अभी कुछ पाने की स्थिति में राजनीतिक पंडित भी नहीं हैं। हालांकि, सभी के अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन सटीक आंकलन कर पाना इस बार थोड़ा कठिन है।
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