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Sitapur News: सर्दी में बढ़े इंफ्लूएंजा के मरीज, ओपीडी में आ रहे मरीज
Sat, 20 Jan 2024 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 20 Jan 2024 12:35 AM IST
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सीतापुर। ठंड के मौसम में इंफ्लूएंजा का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। यह बच्चों से लेकर कम प्रतिरोधक क्षमता वाले महिला व पुरुष को भी संक्रमित कर रहा है। जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में इस बीमारी से पीड़ित रोजाना 25-30 बच्चे आ रहे हैं।
डिप्टी सीएमओ व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएल गंगवार बताते है कि इंफ्लूएंजा को आमतैार पर फ्लू कहा जाता है। दरअसल यह वायरल संक्रमण है। यह सांस से संबंधित प्रणाली नाक, गला व फेफड़ों पर हमला करता है। इंफ्लूएंजा सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। उनके लिए यह कई बार खतरनाक भी साबित होता है। इसके अलावा उम्रदराज लोग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्तियों को इससे अधिक खतरा है। उन्होंने बताया कि जब भी कोई खांसता, छींकता या बात करता है तब फ्लू के वायरस बूंदों के रूप में हवा में सफर करते हैं।
यह बूंदे कई बार सीधे सांस के माध्यम से दूसरों के शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर देती हैं। इसके अलावा कई बार यह बूंदे मेज, कुर्सी, की-बोर्ड, माउस जैसी सतहों पर एकत्र हो जाती हैं। इनको छूने के बाद जब संबंधित व्यक्ति अपने संक्रमित हाथों को अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूता है तो उनके भी संक्रमित होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जिला अस्पताल की बाल रोग विभाग की ओपीडी में इस तरह के 25-30 बच्चे आ रहे हैं। वहीं फिजीशियन के पास भी इस तरह के 40-50 मरीज आ रहे हैं।
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इंफ्लूएंजा के लक्षण
इंफ्लूएंजा के प्रमुख लक्षण बुखार, मांसपेशियों में खिंचाव, सर और शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान, भूख कम लगना, सुस्ती लगना, खांसी, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी और अचानक तेज बुखार हैं।
तरल पदार्थ का करें सेवन
संचारी रोग के प्रभारी डॉ. विवेक सचान बताते हैं कि इंफ्लूएंजा के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें। तरल पदार्थ जैसे सूप आदि पर्याप्त मात्रा में लें। खाने में प्रोटीन दूध, अंडा, पनीर, दाल व चना आदि लें। सांस में तकलीफ होने पर या डीहाइड्रेशन होने पर शीघ्र ही डॉक्टर की सलाह लें। दिन में कम से कम पांच से छह लीटर पानी पिएं। जब पीला या हरा बलगम निकल रहा हो। तभी डॉक्टर की सलाह से एंटीबॉयोटिक का प्रयोग करें।
ऐसे करें बचाव
-खांसते या छींकते समय मुंह को ढकें।
-बीमार व्यक्ति को ऑफिस या स्कूल न भेजें।
-तुलसी, अदरक, हल्दी, शहद, आंवला, दालचीनी और गुड़ व चने का प्रयोग करें।
-खाने से पहले अपने साबुन-पानी व सैनिटाइजर से अच्छी तरह हाथ साफ करें।
पर्याप्त हैं दवाएं
जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी पर इसके लिए दवाएं उपलब्ध हैं। जिलेवासियों से भी अपील है कि इस ठंड में अपने बच्चों व खुद को बचाएं। बेवजह बाहर निकलने से बचें। घर पर रहकर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
डा. हरपाल सिंह, सीएमओ
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डिप्टी सीएमओ व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएल गंगवार बताते है कि इंफ्लूएंजा को आमतैार पर फ्लू कहा जाता है। दरअसल यह वायरल संक्रमण है। यह सांस से संबंधित प्रणाली नाक, गला व फेफड़ों पर हमला करता है। इंफ्लूएंजा सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। उनके लिए यह कई बार खतरनाक भी साबित होता है। इसके अलावा उम्रदराज लोग, गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्तियों को इससे अधिक खतरा है। उन्होंने बताया कि जब भी कोई खांसता, छींकता या बात करता है तब फ्लू के वायरस बूंदों के रूप में हवा में सफर करते हैं।
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यह बूंदे कई बार सीधे सांस के माध्यम से दूसरों के शरीर में प्रवेश कर उसे संक्रमित कर देती हैं। इसके अलावा कई बार यह बूंदे मेज, कुर्सी, की-बोर्ड, माउस जैसी सतहों पर एकत्र हो जाती हैं। इनको छूने के बाद जब संबंधित व्यक्ति अपने संक्रमित हाथों को अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूता है तो उनके भी संक्रमित होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जिला अस्पताल की बाल रोग विभाग की ओपीडी में इस तरह के 25-30 बच्चे आ रहे हैं। वहीं फिजीशियन के पास भी इस तरह के 40-50 मरीज आ रहे हैं।
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इंफ्लूएंजा के लक्षण
इंफ्लूएंजा के प्रमुख लक्षण बुखार, मांसपेशियों में खिंचाव, सर और शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान, भूख कम लगना, सुस्ती लगना, खांसी, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी और अचानक तेज बुखार हैं।
तरल पदार्थ का करें सेवन
संचारी रोग के प्रभारी डॉ. विवेक सचान बताते हैं कि इंफ्लूएंजा के लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें। हरी पत्तेदार सब्जियों का नियमित सेवन करें। तरल पदार्थ जैसे सूप आदि पर्याप्त मात्रा में लें। खाने में प्रोटीन दूध, अंडा, पनीर, दाल व चना आदि लें। सांस में तकलीफ होने पर या डीहाइड्रेशन होने पर शीघ्र ही डॉक्टर की सलाह लें। दिन में कम से कम पांच से छह लीटर पानी पिएं। जब पीला या हरा बलगम निकल रहा हो। तभी डॉक्टर की सलाह से एंटीबॉयोटिक का प्रयोग करें।
ऐसे करें बचाव
-खांसते या छींकते समय मुंह को ढकें।
-बीमार व्यक्ति को ऑफिस या स्कूल न भेजें।
-तुलसी, अदरक, हल्दी, शहद, आंवला, दालचीनी और गुड़ व चने का प्रयोग करें।
-खाने से पहले अपने साबुन-पानी व सैनिटाइजर से अच्छी तरह हाथ साफ करें।
पर्याप्त हैं दवाएं
जिला अस्पताल सहित सभी सीएचसी पर इसके लिए दवाएं उपलब्ध हैं। जिलेवासियों से भी अपील है कि इस ठंड में अपने बच्चों व खुद को बचाएं। बेवजह बाहर निकलने से बचें। घर पर रहकर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
डा. हरपाल सिंह, सीएमओ