फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   In the electoral riot, this time the person of every 18th house was beating

चुनावी दंगल में इस बार हर 18वें घर का शख्स ठोंक रहा ताल

Thu, 22 Apr 2021 11:01 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 22 Apr 2021 11:01 PM IST
विज्ञापन
In the electoral riot, this time the person of every 18th house was beating
सीतापुर। मतदान की तारीख नजदीक आते ही गांवों में चुनावी सरगर्मियां भी तेज होती जा रही हैं। वक्त के हिसाब से लोगों में चुनाव को लेकर दिलचस्पी भी तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे सत्ता की चाह या फिर सरकारी योजनाओं के लिए आने वाले भारी भरकम बजट से अपने विकास की भी उम्मीदें बलवती हो रहीं हैं। समय के साथ लोगों में चुनावी दंगल जीतने की होड़ मची है।
विज्ञापन

ये हम नहीं इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में किस्मत आजमाने उतरे प्रत्याशियों का आंकड़ा बता रहा है। जिले के हर 18वें घर से एक शख्स चुनावी मैदान में है। अब देखना ये होगा कि चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है। जिले के ग्रामीण अंचल में करीब 7 लाख 50 हजार परिवार निवास करते हैं। इनमें इस बार पंचायत चुनाव में करीब 42 हजार लोग किस्मत आजमा रहे हैं।
विज्ञापन

ग्रामीणों में चुनाव का चस्का सिर चढ़कर बोल रहा है। हर किसी का कोई न कोई नजदीकी पंचायत चुनाव में ताल ठोंक रहा है। आलम यह है कि हर 18वें घर से एक व्यक्ति किसी न किसी पद के लिए चुनाव लड़ रहा है। कोई प्रधानी की ताक में है, कोई बीडीसी बनना चाहता है तो कोई जिले के सर्वोच्च सदन यानी जिला पंचायत की कुर्सी पर बैठने की ख्वाहिश लेकर गांव की गलियों की खाक छान रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके अलाव बड़ी संख्या में उम्मीदवार ग्राम पंचायत सदस्य बनने के लिए मनुहार कर रहे हैं। ऐसे में गांवों में चुनावी उल्लास देखते ही बन रहा है। दादा, चाचा, भाई, भाभी को जिताने के लिए वोट मांगे जा रहे हैं। इसके लिए वोटरों को रिझाने के लिए कई तरह के जतन भी हो रहे हैं। चुनाव की तारीख करीब आते ही दावतों का सिलसिला भी चरम पर है। (संवाद)
ठप्पा तो परदे में लगना है...
शहरों के लोग ग्रामीणों के बुद्धि कौशल को लेकर भले ही कई तरह के मजाक बनाते हों, लेकिन उनमें बुद्धिमत्ता की कोई कमी नहीं हैं। पंचायत चुनाव में इसकी बानगी देखने को मिल रही है। चुनावी मैदान में ज्यादा उम्मीदवार होने के बावजूद ग्रामीण सबको संतुष्ट कर रहे हैं, जो उम्मीदवार दरवाजे पर आता है उसके मन मुताबिक दो-चार बातें कहकर उसका मनोबल बढ़ाकर चलता कर देते हैं। कटिया के बुजुर्ग मनोहर अंगूठा छाप हैं। वह कहते हैं कि ठप्पा तो पर्दे में लगाना है, फिर किसी से न कहने से क्या फायदा। ऐसे में जो मिल जाए उससे प्यारे से दो-चार बातें करने में क्या नुकसान है।

सबसे ज्यादा प्रधान पद के उम्मीदवार
पंचायत चुनाव में लोगों को प्रधानी की चाह कुछ ज्यादा ही है। इस पद पर अन्य पदों की अपेक्षा ज्यादा उम्मीदवार हैं। 1,596 पदों पर 14 हजार 170 उम्मीदवार मैदान में हैं। बीडीसी में 1,978 पदों के लिए 9 हजार 954 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहें हैं। जिला पंचायती के 79 पदों के सापेक्ष 1,265 उम्मीदवार चुनावी समर में हैं। ग्राम पंचायत के 20 हजार से अधिक पदों के लिए उम्मीदवारों की कमी है। इसमें सिर्फ 16 हजार 972 ने ही पर्चा दाखिल किया है। ऐसे में बाकी के पदों पर निर्विरोध चुनाव होना तय है।
1599 ग्राम पंचायतें जिले में
1596 ग्राम पंचायतों में चुनाव
1978 बीडीसी के पद जिले में
79 जिला पंचायत सदस्य जिले में
20000 से अधिक ग्राम पंचायत सदस्य के पद
14170 प्रधान पद के हैं दावेदार
9954 क्षेत्र पंचायत सदस्य के दावेदार
1265 डीडीसी के उम्मीदवार
16972 ग्राम पंचायत सदस्य के प्रत्याशी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed