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प्रभु को पाना है तो उनके भक्तों को जानिये : इंद्रेश महाराज
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नैमिषारण्य में कथा कहते इंद्रेश महाराज।
- फोटो : नैमिषारण्य में कथा कहते इंद्रेश महाराज।
नैमिषारण्य (सीतापुर)। प्रभु की भक्ति प्राप्त करनी है तो उनके भक्तों के चरित्र को जानना चाहिए। ये आपकी श्री हरि से मिलन की इच्छा को और भी तीव्र करेगा। ऐसी ही भक्ति ताज बेगम की है, जिन्होंने गोविंद के विग्रह दर्शन किए बिना ही उन्हें निराकार रूप में प्राप्त कर लिया। शुक्रवार को हनुमान गढ़ी कथा प्रांगण में बड़े महंत बजरंग दास के सानिध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास इंद्रेश जी महाराज ने भक्तों को यह प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि बाल गोपाल की परम भक्त ताज बेगम एक बार आगरा से बृज क्षेत्र गई थीं। वहां उन्होंने श्रीनाथ जी का दूर से दर्शन किया था। इसके बाद वो तन से तो आगरा गईं पर उनका मन बृज क्षेत्र में ही रह गया। बाद में वह आगरा से बृज क्षेत्र क्या आईं, बस यहीं की होकर रह गई। उन्होंने अपने जीवन में कभी श्रीकृष्ण के विग्रह के दर्शन नहीं किए, लेकिन उनकी भक्ति ऐसी थी कि जो स्वरूप वह मन में भगवान का सोचती थीं, भगवान वैसा ही शृंगार करते थे।
जीवन के अंतिम चरण में गोविंद स्वयं उन्हें लेकर अपने लोक गए और उनके द्वारा अधूरे लिखे हुए पद को भी उन्होंने पूरा किया। वह पद आज भी बड़े भाव से गाया जाता है। कथाव्यास ने भगवान की बाल लीलाओं का बड़े ही रसपूर्ण तरीके से वर्णन किया। इस दौरान महामंडलेश्वर चिदंबरानंद सरस्वती व व्यास पीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री ने प्रवचन दिए। इस दौरान नैमिष आचार्य रमेश शास्त्री, राधा वल्लभ, रंजीत शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि बाल गोपाल की परम भक्त ताज बेगम एक बार आगरा से बृज क्षेत्र गई थीं। वहां उन्होंने श्रीनाथ जी का दूर से दर्शन किया था। इसके बाद वो तन से तो आगरा गईं पर उनका मन बृज क्षेत्र में ही रह गया। बाद में वह आगरा से बृज क्षेत्र क्या आईं, बस यहीं की होकर रह गई। उन्होंने अपने जीवन में कभी श्रीकृष्ण के विग्रह के दर्शन नहीं किए, लेकिन उनकी भक्ति ऐसी थी कि जो स्वरूप वह मन में भगवान का सोचती थीं, भगवान वैसा ही शृंगार करते थे।
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जीवन के अंतिम चरण में गोविंद स्वयं उन्हें लेकर अपने लोक गए और उनके द्वारा अधूरे लिखे हुए पद को भी उन्होंने पूरा किया। वह पद आज भी बड़े भाव से गाया जाता है। कथाव्यास ने भगवान की बाल लीलाओं का बड़े ही रसपूर्ण तरीके से वर्णन किया। इस दौरान महामंडलेश्वर चिदंबरानंद सरस्वती व व्यास पीठाधीश अनिल कुमार शास्त्री ने प्रवचन दिए। इस दौरान नैमिष आचार्य रमेश शास्त्री, राधा वल्लभ, रंजीत शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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