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Sitapur News: मैं सीतापुर का ऐतिहासिक घंटाघर... खो गया मेरा पुराना वैभव

Tue, 16 Dec 2025 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Tue, 16 Dec 2025 12:01 AM IST
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I am the historic clock tower of Sitapur... my old glory is lost
सीतापुर। मैं सीतापुर का ऐतिहासिक घंटाघर हूं... इस शहर के ह्रदय में रचा बसा हूं। मुझे ब्रिटिश हुकूमत ने सन् 1875 में कॉल्विन क्लॉक टॉवर के रूप में बनवाया था। अपनी विशाल घड़ी और अनूठी बनावट के कारण आज तक मेरी अलग पहचान है। मेरी घड़ी के घंटे की गूंज से लोगों को पहर बदलने का अनुमान होता था। समय के साथ ही बढ़ती उपेक्षा व अतिक्रमण के दंश से मेरा पुराना वैभव व स्वरूप ही खो गया है।
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नए दौर में लोग मुझे भूलते गए। एक दौर था जब मेरी दहलीज से होकर सभी लोग काफी संभलकर निकलते थे। आज उन्हीं लोगों के वारिस मेरी दहलीज़ पर चढ़ बैठे हैं। अतिक्रमण ने मेरे विशालकाय द्वार के साथ दीवारों को बेरंग कर दिया गया। आस पास दुकानें सज गईं...रास्ता संकरा हो गया...मुझ पर होर्डिंग और बिजली के तारों का बोझ लाद दिया गया। मेरे प्रहरियों के छोटे दरवाजों में लोगों ने अवैध दुकानें बना ल। मेरा पूरा रंग रूप ही बदल दिया गया।
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हाल ही में जिलाधिकारी डॉ राजा गणपति आर ने मेरे पुराने वजूद को वापस दिलाने की पहल करते हुए मेरे आस-पास से अतिक्रमण हटाने का निर्देश देकर बड़ी राहत पहुंचाई है। प्रशासन का बुलडोजर अवैध कब्जे तोड़ने लगा, तो मेरे अंदर भी पुराना वजूद पाने की एक आस जगी है। मुझे अतिक्रमण की पीड़ा से मुक्त कराने की एक नोटिस मेरी दीवारों पर चस्पा हुई है। इस नोटिस ने मेरे वजूद को मिटाने की कोशिश करने वालों को खबरदार किया है, वह जल्द मेरे आस पास से अपनी दुकानें व अवैध प्रतिष्ठानों को हटा लें।
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चार भव्य द्वारों में सिमटा है पुराना अतीत
तामसेनगंज निवासी विनीत दीक्षित ने बताया कि घंटाघर चार भव्य द्वारों की एक ऐतिहासिक इमारत है। सभी द्वार पांच सौ मीटर के दायरे में लालबाग चौराहे से लेकर आलमनगर के बीच स्थापित हैं। इसके भव्य द्वार पर एक मीटर व्यास वाली घड़ी भी लगाई गई थी।
बदलते समय के साथ नगर पालिका के हिस्से में इसकी देखरेख का जिम्मा आया। तामसेनगंज के ही सुंंदरलाल रस्तोगी को नगर पालिका ने इसकी घड़ी की सुइयों की मरम्मत का जिम्मा सौंपा। उन्हें इसके लिए एक हजार रुपये का मानदेय भी दिया जाता रहा। इसके बाद यह काम उनके वारिसों के जिम्मे आया। अड़चन आने पर विनीत दीक्षित ने वर्ष 2014-15 घड़ी को दुरुस्त करवाया। इस बीच घंटाघंर के वजूद पर बढ़ते अतिक्रमण के दंश से घंटाघर की सीढि़यों तक को गुपचुप तरह से बंद कर दिया गया।



कई बार शुरू हुई मुहिम बीच में अटकी
घंटाघर को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए कई बार मुहिम चली। लेकिन कुछ समय बाद ही दबाव के चलते बीच में रोक दी गई। एक बार फिर 24 नवंबर को सीतापुर नगर पालिका परिषद ने घंटाघर की बंद दुकानों पर नोटिस चस्पा कर अतिक्रमण करने वालों से इसे स्वयं अपने स्तर से हटवाने की मोहलत दी गई है।



घंटाघर के जीर्णोद्धार की हो रही कवायद
नगर पालिका परिषद के सहायक नगर आयुक्त, वैभव त्रिपाठी ने बताया कि डीएम के निर्देशन में घंटाघर की ऐतिहासिक इमारत के जीर्णोद्धार की कवायद शुरु की गई है। इसके तहत एक बार फिर सर्वे कराकर सभी अतिक्रमण करने वालों नोटिसे भेजी जा रही है। इसके बाद घंटाघर के भव्य द्वारों के दोनों ओर से अतिक्रमण हटवाने के साथ ही इसकी मरम्मत कराने के साथ रंग रोगन कर लेजर लाइटिंग युक्त बनाया जाएगा। ताकि इस ऐतिहासिक इमारत के भव्य स्वरूप में वापस लाया जा सके।
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