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Sitapur News: बोआई पर खाद का संकट, केंद्रों पर लंबी कतार
Sun, 10 Nov 2024 12:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 10 Nov 2024 12:23 AM IST
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सीतापुर। वितरण के लिए खाद का स्टॉक उपलब्ध न होने के कारण सहकारी साधन समितियों पर खाद का टोटा कायम बना है। ऐसे में खेत तैयार होने के बाद भी रबी की बोआई पिछड़ने से किसान परेशानहाल हैं। उन्हें बाजार से महंगे दाम पर खाद की खरीद के लिए विवश होना पड़ रहा है। जानकारी के बाद भी कृषि विभाग के अधिकारी किसानों से जुड़ी इस परेशानी का निस्तारण कराने को लेकर उदासीन बने हैं।
शनिवार की दोपहर में बुजुर्ग किसान रामनरेश डीएपी की आस में 22 किमी दूर रामपुर कला इलाके के गांव सैर से महमूदाबाद की गल्ला मंडी के इफको केंद्र पहुंचे थे। बताया कि उनको लाही की बुआई करनी है। उनके यहां डीएपी नहीं मिल रही है। दो घंटे से कतार में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल सकी। मजबूरी में बाजार से महंगी दर पर खाद खरीदना पड़ती है। कुछ ऐसी ही समस्या करीब 24 किमी दूर थाना सदरपुर के हेलेपारा गांव से आए किसान मनीष कुमार की थी। उन्होंने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। उन्होंने खेत में सरसों, गेहूं बोया है। डीएपी की सख्त जरूरत है लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है। मजबूरन बाजार से महंगी दर पर एनपीके लेना पड़ रही है।
खाद पाने के लिए सेंटरों पर मारामारी
डीएपी को लेकर खाद सेंटरों पर मारामारी मची है। रोजाना सुबह से ही सहकारी समितियों पर किसानों की लंबी लाइनें लग जाती हैं। इसके बावजूद किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही गल्ला मंडी में बने इफको किसान सेवा केंद्र पर भी डीएपी नहीं है।
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ठगे जा रहे किसान
रामपुर मथुरा (सीतापुर) विकास क्षेत्र में आठ साधन सहकारी समितियां हैं। इन दिनों किसी भी समिति पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। किसान की बेबसी का फायदा कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते किसान बाजार से महंगी खाद की खरीद कर खुद का ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
मिश्रिख में भी पूर्व की तरह इस वर्ष भी डीएपी की उपलब्धता केंद्रों पर न के बराबर है। डीएपी की किल्लत के चलते किसान डीएपी की जगह मजबूरी में एनपीके का प्रयोग करना पड़ रहा है।
12 सौ की जगह 16 सौ में मिल रही बोरी
किसान कप्तान सिंह ने बताया कि सुबह केंद्र पर डीएपी लेने आए थे लेकिन यहां एनपीके ही उपलब्ध है। बाहर प्राइवेट दुकानों पर 16 सौ रुपये में बोरी मिल रही है जबकि सरकारी केंद्र पर 12 सौ रुपये बोरी का दाम है। डीएपी न मिल पाने के कारण बोआई में भी देरी हो रही है। केंद्र सचिव अशोक कुमार शुक्ल ने बताया कि केंद्र पर 200 बोरी एनपीके उपलब्ध है।
बॉयो एनपीके का प्रयोग करने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के हेड वरिष्ठ वैज्ञानिक विशेषज्ञ डा. दया श्रीवास्तव ने बताया कि किसान अपनी फसलों में डीएपी की जगह एनपीके का इस्तेमाल कर सकते हैं। एनपीके भी न मिलने पर विकल्प के तौर पर एएसएफ का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को बॉयो एनपीके का प्रयोग करने की सलाह भी दी।
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शनिवार की दोपहर में बुजुर्ग किसान रामनरेश डीएपी की आस में 22 किमी दूर रामपुर कला इलाके के गांव सैर से महमूदाबाद की गल्ला मंडी के इफको केंद्र पहुंचे थे। बताया कि उनको लाही की बुआई करनी है। उनके यहां डीएपी नहीं मिल रही है। दो घंटे से कतार में लगने के बाद भी खाद नहीं मिल सकी। मजबूरी में बाजार से महंगी दर पर खाद खरीदना पड़ती है। कुछ ऐसी ही समस्या करीब 24 किमी दूर थाना सदरपुर के हेलेपारा गांव से आए किसान मनीष कुमार की थी। उन्होंने बताया कि सुबह से लाइन में लगे हैं। उन्होंने खेत में सरसों, गेहूं बोया है। डीएपी की सख्त जरूरत है लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल रही है। मजबूरन बाजार से महंगी दर पर एनपीके लेना पड़ रही है।
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खाद पाने के लिए सेंटरों पर मारामारी
डीएपी को लेकर खाद सेंटरों पर मारामारी मची है। रोजाना सुबह से ही सहकारी समितियों पर किसानों की लंबी लाइनें लग जाती हैं। इसके बावजूद किसानों को डीएपी नहीं मिल पा रही गल्ला मंडी में बने इफको किसान सेवा केंद्र पर भी डीएपी नहीं है।
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ठगे जा रहे किसान
रामपुर मथुरा (सीतापुर) विकास क्षेत्र में आठ साधन सहकारी समितियां हैं। इन दिनों किसी भी समिति पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। किसान की बेबसी का फायदा कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते किसान बाजार से महंगी खाद की खरीद कर खुद का ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
मिश्रिख में भी पूर्व की तरह इस वर्ष भी डीएपी की उपलब्धता केंद्रों पर न के बराबर है। डीएपी की किल्लत के चलते किसान डीएपी की जगह मजबूरी में एनपीके का प्रयोग करना पड़ रहा है।
12 सौ की जगह 16 सौ में मिल रही बोरी
किसान कप्तान सिंह ने बताया कि सुबह केंद्र पर डीएपी लेने आए थे लेकिन यहां एनपीके ही उपलब्ध है। बाहर प्राइवेट दुकानों पर 16 सौ रुपये में बोरी मिल रही है जबकि सरकारी केंद्र पर 12 सौ रुपये बोरी का दाम है। डीएपी न मिल पाने के कारण बोआई में भी देरी हो रही है। केंद्र सचिव अशोक कुमार शुक्ल ने बताया कि केंद्र पर 200 बोरी एनपीके उपलब्ध है।
बॉयो एनपीके का प्रयोग करने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के हेड वरिष्ठ वैज्ञानिक विशेषज्ञ डा. दया श्रीवास्तव ने बताया कि किसान अपनी फसलों में डीएपी की जगह एनपीके का इस्तेमाल कर सकते हैं। एनपीके भी न मिलने पर विकल्प के तौर पर एएसएफ का प्रयोग कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को बॉयो एनपीके का प्रयोग करने की सलाह भी दी।