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किसानों को राहत का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो/ सीतापुर
Updated Fri, 28 Aug 2015 11:56 PM IST
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इनकी बर्बाद फसलों के मुआवजे के लिए प्रशासन ने पौने तीन अरब की डिमांड शासन से की थी। पर महज 46.85 करोड़ ही मिले। इससे 2373 गांवों के सापेक्ष महज 656 गांवों के किसानों को ही रकम वितरित की जा सकी। जबकि 1717 गांवों के पीड़ित किसान आज भी मुआवजे की राहत ताक रहे हैं।
पर इनकी आस पूरी नहीं हो सकी है। इंतजार का सब्र टूटने पर अब पीड़ित किसान आंदोलन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने पर जुटे हैं।
मालूम हो कि बीते फरवरी से अप्रैल के मघ्य आईं दैवीय आपदा से जिले में रबी फसलों को खासा नुकसान हुआ था। दैवीय आपदा से बर्बाद फसलों का जिला प्रशासन ने ग्रामवार राजस्व कर्मिर्यो से सर्वे कराकर 27812.63 लाख बजट की मांग की थी।
डिमांड के सापेक्ष शासन स्तर से महज 46.85 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। 656 गांवों के 138282 किसानों में यह रकम वितरित की गई थी। जबकि 1717 गांवों के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। यह किसान आज भी राहत पाने की बाट जोह रहे हैं। राहत राशि को लेकर पीड़ित किसान आंदोलन के जरिए हक की आवाज भी उठा रहे हैं।
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पर इनकी आस पूरी नहीं हो सकी है। इंतजार का सब्र टूटने पर अब पीड़ित किसान आंदोलन के जरिए अपनी आवाज बुलंद करने पर जुटे हैं।
मालूम हो कि बीते फरवरी से अप्रैल के मघ्य आईं दैवीय आपदा से जिले में रबी फसलों को खासा नुकसान हुआ था। दैवीय आपदा से बर्बाद फसलों का जिला प्रशासन ने ग्रामवार राजस्व कर्मिर्यो से सर्वे कराकर 27812.63 लाख बजट की मांग की थी।
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डिमांड के सापेक्ष शासन स्तर से महज 46.85 लाख रुपये का बजट जारी किया गया था। 656 गांवों के 138282 किसानों में यह रकम वितरित की गई थी। जबकि 1717 गांवों के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है। यह किसान आज भी राहत पाने की बाट जोह रहे हैं। राहत राशि को लेकर पीड़ित किसान आंदोलन के जरिए हक की आवाज भी उठा रहे हैं।
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