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Sitapur News: 712 मेगावाट पहुंची बिजली की डिमांड, कटौती से बढ़ी परेशानी
Tue, 28 May 2024 02:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 28 May 2024 02:31 AM IST
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सीतापुर। जिले में बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। एक सप्ताह के अंदर बिजली की डिमांड बढ़कर 712 मेगावाट तक पहुंच गई है। 20 मई को बिजली की डिमांड करीब 650 मेगावाट थी। वहीं अप्रैल माह में बिजली की डिमांड 600 मेगावाट थी।
बिजली विभाग का दावा है कि भरपूर बिजली मिल रही है लेकिन दावे के विपरीत शहर से लेकर गांवों में जमकर कटौती हो रही है। शहर में सोमवार को 20 से अधिक मोहल्लों में चार से पांच घंटे की लंबी कटौती हुई। 200 से अधिक गांवों में मुश्किल से पांच से छह घंटे की बिजली की सप्लाई हुई।
भवानीपुर उपकेंद्र से जुड़े विकास नगर, खूबपुर, नवीन चौक, कांशीराम कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में सोमवार को सुबह करीब दो घंटे बिजली की कटौती हुई। इससे घरों में पानी का संकट खड़ा हो गया।
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हबीबपुर व तरीनपुर मोहल्लों में भी तीन घंटे तक बिजली गुल रही। पुराने सीतापुर के मिरदही टोला, चौबेटोला, मुंशीगंज, ताड़कनाथ मंदिर सहित अन्य मोहल्लों में तीन घंटे बिजली गुल रही। दिन में करीब 12 से 15 बार ट्रिपिंग हुई। बार-बार बिजली की आवाजाही से इन्वर्टर भी ठप हो गए।
उपभोक्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई। उसके बाद ही हालात सुधर सकें। इसी तरह रामपुर मथुरा इलाके के करीब 50 गांवों में मुश्किल से 24 घंटे में पांच से छह घंटे ही बिजली कह सप्लाई हो रही है। लहरपुर, पिसावां, मिश्रिख, बिसवां के करीब 150 गांवों के भी हालात इसी तरह बने हुए हैं। यह समस्या जर्जर तार टूटने व जंफर उड़ने व ट्रांसफॉर्मर फुंकने की वजह से उत्पन्न हो रही है।
दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है डिमांड
इस समय गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। 43 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है तो हर तरफ इलेक्ट्राॅनिक उपकरण जमकर चल रहे हैं। इसके चलते बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। मई माह में बिजली की खपत 650 से 712 मेगावाट तक पहुंच गई है। बिजली विभाग का कहना है अगर गर्मी से राहत नहीं मिली तो यह डिमांड और अधिक पहुंच जाएगी।
कटौती का फसलों पर पड़ रहा असर
जिले में बिजली कटौती का असर फसलों पर भी पड़ रहा है। चार से पांच घंटे गांवों में बिजली पहुंचने व लो वोल्टेज के चलते ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। इससे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि इस समय जब गर्मी तेज पड़ रही है तो फसलें सूख न जाए किसानों को पानी लगाने की जरूरत है। लेकिन आपूर्ति के अभाव में वह निजी साधन से सिंचाई करते है तो उन्हें काफी अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
हो रही है फॉल्ट
जिले में बिजली डिमांड के मुताबिक मिल रही है। लेकिन फॉल्ट की वजह से दिक्कत आ रही है। इसी वजह से कटौती करनी पड़ रही है।
नंदलाल, अधीक्षण अभियंता
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बिजली विभाग का दावा है कि भरपूर बिजली मिल रही है लेकिन दावे के विपरीत शहर से लेकर गांवों में जमकर कटौती हो रही है। शहर में सोमवार को 20 से अधिक मोहल्लों में चार से पांच घंटे की लंबी कटौती हुई। 200 से अधिक गांवों में मुश्किल से पांच से छह घंटे की बिजली की सप्लाई हुई।
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भवानीपुर उपकेंद्र से जुड़े विकास नगर, खूबपुर, नवीन चौक, कांशीराम कॉलोनी सहित अन्य मोहल्लों में सोमवार को सुबह करीब दो घंटे बिजली की कटौती हुई। इससे घरों में पानी का संकट खड़ा हो गया।
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हबीबपुर व तरीनपुर मोहल्लों में भी तीन घंटे तक बिजली गुल रही। पुराने सीतापुर के मिरदही टोला, चौबेटोला, मुंशीगंज, ताड़कनाथ मंदिर सहित अन्य मोहल्लों में तीन घंटे बिजली गुल रही। दिन में करीब 12 से 15 बार ट्रिपिंग हुई। बार-बार बिजली की आवाजाही से इन्वर्टर भी ठप हो गए।
उपभोक्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई। उसके बाद ही हालात सुधर सकें। इसी तरह रामपुर मथुरा इलाके के करीब 50 गांवों में मुश्किल से 24 घंटे में पांच से छह घंटे ही बिजली कह सप्लाई हो रही है। लहरपुर, पिसावां, मिश्रिख, बिसवां के करीब 150 गांवों के भी हालात इसी तरह बने हुए हैं। यह समस्या जर्जर तार टूटने व जंफर उड़ने व ट्रांसफॉर्मर फुंकने की वजह से उत्पन्न हो रही है।
दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है डिमांड
इस समय गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। 43 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है तो हर तरफ इलेक्ट्राॅनिक उपकरण जमकर चल रहे हैं। इसके चलते बिजली की डिमांड बढ़ती जा रही है। मई माह में बिजली की खपत 650 से 712 मेगावाट तक पहुंच गई है। बिजली विभाग का कहना है अगर गर्मी से राहत नहीं मिली तो यह डिमांड और अधिक पहुंच जाएगी।
कटौती का फसलों पर पड़ रहा असर
जिले में बिजली कटौती का असर फसलों पर भी पड़ रहा है। चार से पांच घंटे गांवों में बिजली पहुंचने व लो वोल्टेज के चलते ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। इससे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि इस समय जब गर्मी तेज पड़ रही है तो फसलें सूख न जाए किसानों को पानी लगाने की जरूरत है। लेकिन आपूर्ति के अभाव में वह निजी साधन से सिंचाई करते है तो उन्हें काफी अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
हो रही है फॉल्ट
जिले में बिजली डिमांड के मुताबिक मिल रही है। लेकिन फॉल्ट की वजह से दिक्कत आ रही है। इसी वजह से कटौती करनी पड़ रही है।
नंदलाल, अधीक्षण अभियंता