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गजब हाल : नौ माह में ही छात्रा ने हासिल कर ली कक्षा पांच तक की शिक्षा
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- फोटो : SITAPUR
पिसावां (सीतापुर)। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के कारनामे भी अजब-गजब के हैं। एक प्रधानाध्यापक ने नौ माह में ही एक बच्ची को कक्षा से पांच तक की शिक्षा दे दी। बच्ची का दाखिला जन्म से चार वर्ष पहले ही लेकर उसे पढ़ा लिखाकर उत्तीर्ण कर दिया। उसके बाद बाकायदा अपने हस्ताक्षर से विद्यालय की मुहर लगाकर उसकी टीसी काट दी। जब यह टीसी विद्यालय से बाहर पहुंची तो हाय तौबा मच गई। अब विभाग ऐसे लापरवाह शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहा है।
पिसावां विकासखंड के अल्लीपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक द्वारा एक छात्रा के जन्म से चार वर्ष छह दिन पहले ही दाखिला ले लिया। विद्यालय के हाजिरी रजिस्टर में नियमित उसकी उपस्थिति दर्ज होती रही। इसके अलावा छात्रा को मार्कशीट एवं रिजल्ट भी उत्तीर्ण का दिया जाता रहा। अल्लीपुर प्राथमिक विद्यालय में कुसुमलता कक्षा पांच में पढ़ती थी। कक्षा पांच पास करने के बाद उसे विद्यालय से प्रस्थान प्रमाण पत्र(टीसी) प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत कर दिया गया था।
इस प्रस्थान प्रमाण पत्र पर विद्यालय में उसकी जन्म तिथि 14 जुलाई 2015 दर्ज है। जबकि छात्र का विद्यालय में प्रथम प्रवेश 20 जुलाई 2011 को अंकित है। विद्यालय में प्रवेश के अंतिम कालम में 1 अप्रैल 2015 दर्ज है। टीसी पर छात्रा के विद्यालय छोडने की तिथि 31 अप्रैल 2016 लिखी गई है। जबकि टीसी काटने की तिथि 25 अप्रैल 2016 है।
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ऐसे में प्रमाणपत्र के अनुसार जब बच्ची का जन्म नहीं हुआ था तब से वह विद्यालय में पढ़ रही है। अगर जन्मतिथि उसकी 2015 थी तो वह महज नौ माह के अंदर ही एक से पांच तक की कक्षाएं उत्तीर्ण करके अगली कक्षा में चली गई है। इस तरह की प्रधानाध्यापक द्वारा की गई मानवीय भूल छात्रा के भविष्य के साथ भारी पड़ सकती है।
बीईओ शैलेंद्र कुमार शुक्ला का कहना है कि यह टीसी 2016 की है, इसे देखकर यह फर्जी लग रही है। फिलहाल प्रवेश पंजिका से सत्यापन कराकर इसे सत्यता परखी जाएगी। उसके बाद ही लापरवाही के मामले में कार्रवाई होगी।
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पिसावां विकासखंड के अल्लीपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक द्वारा एक छात्रा के जन्म से चार वर्ष छह दिन पहले ही दाखिला ले लिया। विद्यालय के हाजिरी रजिस्टर में नियमित उसकी उपस्थिति दर्ज होती रही। इसके अलावा छात्रा को मार्कशीट एवं रिजल्ट भी उत्तीर्ण का दिया जाता रहा। अल्लीपुर प्राथमिक विद्यालय में कुसुमलता कक्षा पांच में पढ़ती थी। कक्षा पांच पास करने के बाद उसे विद्यालय से प्रस्थान प्रमाण पत्र(टीसी) प्रधानाध्यापक द्वारा निर्गत कर दिया गया था।
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इस प्रस्थान प्रमाण पत्र पर विद्यालय में उसकी जन्म तिथि 14 जुलाई 2015 दर्ज है। जबकि छात्र का विद्यालय में प्रथम प्रवेश 20 जुलाई 2011 को अंकित है। विद्यालय में प्रवेश के अंतिम कालम में 1 अप्रैल 2015 दर्ज है। टीसी पर छात्रा के विद्यालय छोडने की तिथि 31 अप्रैल 2016 लिखी गई है। जबकि टीसी काटने की तिथि 25 अप्रैल 2016 है।
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ऐसे में प्रमाणपत्र के अनुसार जब बच्ची का जन्म नहीं हुआ था तब से वह विद्यालय में पढ़ रही है। अगर जन्मतिथि उसकी 2015 थी तो वह महज नौ माह के अंदर ही एक से पांच तक की कक्षाएं उत्तीर्ण करके अगली कक्षा में चली गई है। इस तरह की प्रधानाध्यापक द्वारा की गई मानवीय भूल छात्रा के भविष्य के साथ भारी पड़ सकती है।
बीईओ शैलेंद्र कुमार शुक्ला का कहना है कि यह टीसी 2016 की है, इसे देखकर यह फर्जी लग रही है। फिलहाल प्रवेश पंजिका से सत्यापन कराकर इसे सत्यता परखी जाएगी। उसके बाद ही लापरवाही के मामले में कार्रवाई होगी।