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पानी ठहरा पर कम नहीं हुईं मुश्किलें

Thu, 23 Jul 2020 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 10:27 PM IST
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Difficulties did not reduce when water stopped
रेउसा/रामपुर मथुरा (सीतापुर)। सरयू का पानी स्थिर होने से बाढ़ की विनाशलीला फिलहाल थम गई है। लेकिन बाढ़ प्रभावितों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। घरों, रास्तों व खेतों में पानी भरा होने से पांच हजार आबादी की दिनचर्या प्रभावित है। खाना बनाने से लेकर रोजमर्रा के जरूरी काम निपटाने में दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। जिले में बाढ़ग्रस्त इलाके में आवागमन जोखिम भरा है। लोग नाव का सहारा ले रहे हैं। बैराजों से गुरुवार को 2 लाख 91 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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पहाड़ों पर बारिश व बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में कमी आने आने से गुरुवार को सरयू नदी का जलस्तर ठहर गया। इससे ब्लॉक रेउसा के बाढ़ग्रस्त मेवड़ी छोलहा, भदिम्मरपुरवा, श्रीरामपुरवा जटपुरवा के घरों में भरा पानी कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी तक पानी भरा होने से लोगों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या हर तरफ पानी होने से खाना बनाने की है। ईंधन, पशु चारे के साथ नित्यक्रिया के लिए भी बाढ़ पीड़ितों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
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पानी से घिरे नगीनापुरवा, मरेली, जैतहिया, दर्जिनरेती, चकपुरवा, दुर्गापुरवा, फौजदारपुरवा आदि गांवो पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा पानी स्थिर होने से फिलहाल टल गया है। लेकिन रास्तों व खेतों में पानी भरा होने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। गुरुवार को तीनों बैराजों से 2 लाख 91 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक खतरा अभी टला नहीं है। उधर रामपुर मथुरा इलाके में सरयू नदी का जलस्तर कम होने के साथ कटान तेज हो गई है।
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गुरुवार को जलस्तर 10 सेमी कमी के साथ 118.80 मीटर दर्ज किया गया। जो खतरे के निशान से 20 सेमी दूर है। जलस्तर में कमी के साथ घरों और सड़कों पर भरे पानी से लोगों को कुछ निजात तो मिली, किन्तु कटान तेज होने से घरों पर मंडरा रहा खतरा बढ़ गया हैं। अंगरौरा, निरंजनपुरवा, महाजनपुरवा तथा शुकुलपुरवा, सुन्दरपुरवा, बुचौपुरवा, झगतुपुरवा सहित 15 से अधिक गांवों में आवागमन के लिए बने मार्गों पर भीषण कीचड़ होने से समस्याएं उत्पन्न हो गई है।

बिसवां तहसीलदार राजकुमार गुप्ता ने बताया कि बैराजों से छोड़ा जाने वाले पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। बाढ़ग्रस्त इलाके में हालात कुछ सुधरे हैं। लगातार नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों को किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।
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