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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sitapur News ›   40 years after convicted cashier gets five years in jail

40 साल बाद दोषी कैशियर को पांच साल कैद

Fri, 06 Oct 2017 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 06 Oct 2017 11:41 PM IST
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 40 साल पहले पावर कॉर्पोरेशन में हुए गबन के मामलों में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रूपाली सक्सेना ने शुक्रवार को कैशियर सैय्यद कमर आबिद को दोषी ठहराते हुए उसे पांच साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 88 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को प्रत्येक मामलों में चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

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दोषी कैशियर पावर कॉर्पोरेशन से रिटायर हो चुका है और उस पर गबन के आठ अलग-अलग मामले चल रहे थे। सीजेएम न्यायालय के इस सबसे पुराने मुकदमे की अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी अभियोजन अधिकारी आरसी लाल ने की। 15 हजार रुपये के गबन के इस मामले में पांच लोग नामजद थे। जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। जबकि दो को हाईकोर्ट से राहत मिली थी। फैसले के दौरान शेष दो आरोपियों में से एक को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बरी कर दिया।
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8 नवंबर 1977 को विद्युत परीक्षण खंड सीतापुर के तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरसी गुप्ता ने कार्यभार ग्रहण करने के दौरान कार्यालय के टीआई रजिस्टर की जांच की। इस दौरान कुछ प्रविष्टियों में ओवर राइटिंग मिली। जांच में उन्हें रुपये की हेरफेर का पता लगा। इस पर उन्होंने सीतापुर कोतवाली में 15 हजार 230 रुपये की वित्तीय अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई थी। साथ ही पावर कॉर्पोरेशन के तत्कालीन कैशियर सैय्यद कमर आबिद, लेखाकार शारदा प्रसाद, नरेंद्र नाथ, अब्दुल हसन अंसारी व राकेश प्रताप सिंह को नामजद किया था।
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जांच के बाद पुलिस ने पांचों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। इस दौरान नरेंद्र नाथ की मृत्यु होने तथा 25 अक्तूबर 1989 को उच्च न्यायालय की ओर से राकेश प्रताप सिंह व अब्दुल हसन अंसारी को उन्मोचित किए जाने से शेष दो के विरुद्ध मुकदमे का विचारण किया गया। लंबी सुनवाई के दौरान अंतत: सीजेएम सीतापुर ने दोषियों के विरुद्ध लंबित सभी आठों मुकदमे एक ही प्रकार के होने के आधार पर समेकित करते हुए अपना फैसला सुनाया। जिसमें शारदा प्रसाद को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया गया।


लेकिन तत्कालीन कैशियर सैय्यद कमर आबिद को शासकीय धन के गबन व प्रपत्रों में हेरफेर का आरोपी पाते हुए पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही आठों मामलों में अलग-अलग 11-11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अर्थदंड जमा न करने पर दोषी को प्रत्येक मुकदमे में चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ेगा।

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