{"_id":"5b44fc3e4f1c1bc1248b59eb","slug":"171531247678-sitapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले में सात साल में बढ़ गई पांच लाख की आबादी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जिले में सात साल में बढ़ गई पांच लाख की आबादी
Updated Wed, 11 Jul 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वर्ष 2011 में थे 45 लाख और अब 2018 में हो गए करीब 50 लाख
सीतापुर। जनसंख्या नियंत्रण के लिए चल रही योजनाएं जिले में फ्लॉप हो रही है। इसकी तस्दीक आंकड़े कर रहे है। वर्ष 2011 में जिले की आबादी 45 लाख थी।वर्तमान साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 50 लाख के ऊपर पहुंच गई है। जबकि जनसंख्या स्थिरता को जिले में कई योजनाएं चल रही है। फिर भी इस पर अपेक्षित लगाम नहीं लग पा रही है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी करीब 45 लाख थी। इसमें 24 लाख पुरुष व 21 लाख महिलाएं शामिल थीं। उसके बाद जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कई योजनाएं चलाई गई। लेकिन इनका प्रभाव जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रहा है।
सात साल गुजरने के बाद 2018 में यह आबादी बढ़कर 50 लाख के ऊपर पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसमें कमी आई है। पहले जहां एक परिवार में औसतन चार बच्चे थे। अब यह घटकर 3.1 पर आ गए हैं। यानी आबादी पर लगाम लग रही है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
विज्ञापन
साल 2025 तक यह अनुपात लक्ष्य के अनुसार घटाकर 2.1 पर लाना है। इसके लिए योजनाएं चल रही हैं। ‘हम दो, हमारे दो’ वाला कॉन्सेप्ट पूरा करने के लिए योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
क्या चल रहीं योजनाएं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जनसंख्या स्थिरता के लिए दो योजनाएं चलाई जा रही है। एक योजना में जनसंख्या के प्रति जागरुकता फैलाई जा रही है। परिवार नियोजन के तौर तरीके बताए जा रहे हैं। जैसे कॉपर्टी, कंडोम आदि शामिल हैं। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि 19 वर्ष के बाद अपने बच्चे की शादी करें।
दो साल बाद पहला बच्चा। दूसरे में कम से कम तीन साल का अंतर होना चाहिए। दो बच्चे के बाद परिवार नियोजन को अपनाएं। इसी प्रकार दूसरी योजना में अंतरा इंजेक्शन व छाया गोली के बारे में बताया जा रहा है। यह दोनों दवाएं एकदम नुकसानदायक नहीं है। शरीर पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
पुरुष नसबंदी में है फिसड्डी
परिवार नियोजन अपनाने में जिले के पुरुष फिसड्डी हो रहे हैं। पुरुषों का आंकड़ा बढ़ने के बजाए लगातार गिर रहा है। पिछले साल की बात की जाए तो 36 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी। इस बार यह घटकर केवल 10 पर पहुंच गई है।
इसी प्रकार अगर महिलाओं की बात की जाए तो यह इसमें पुरुषों से दो कदम आगे ही चल रही है। पिछले साल करीब सात हजार महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 8100 पहुंच गई है। इसमें एक हजार से अधिक की वृद्धि हुई है।
भ्रांतियां पुरुषों को कर रहीं नसबंदी से दूर
चिकित्सकों का कहना है कि महिला नसबंदी से पुरुषों की बहुत ही आसान प्रक्रिया है। पुरुषों में ऊपरी तौर से ही नसबंदी हो जाती है जबकि महिलाओं में पेट के अंदर से प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन पुुरुषों में यह भ्रांतियां फैल गई है कि इससे शरीर कमजोर हो जाता है।
वह सेक्स करने लायक नहीं बचता है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। न तो इससे कमजोरी आती है न ही सेक्स कम होता है। केवल पुुरुष में बच्चा पैदा न करने की कमी हो जाती है। अन्य कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए विभाग लगातार जागरुकता कार्यक्रम चला रहा है।
परिवार नियोजन के चल रहे कार्यक्रम
जिले की आबादी में पहले की अपेक्षा कमी आई है। इस समय 3.1 की दर से जनसंख्या बढ़ रही है। हां पुरुषों में जरुर कुछ कम जागरुकता है। इसी वजह से वह कम नसबंदी करा रहे है। इसके लिए लगातार परिवार नियोजन के कार्यक्रम चल रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही टारगेट पूरा किया जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र शाही, एसीएमओ/फैमिली प्लानिंग ऑफीसर
विज्ञापन
सीतापुर। जनसंख्या नियंत्रण के लिए चल रही योजनाएं जिले में फ्लॉप हो रही है। इसकी तस्दीक आंकड़े कर रहे है। वर्ष 2011 में जिले की आबादी 45 लाख थी।वर्तमान साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 50 लाख के ऊपर पहुंच गई है। जबकि जनसंख्या स्थिरता को जिले में कई योजनाएं चल रही है। फिर भी इस पर अपेक्षित लगाम नहीं लग पा रही है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी करीब 45 लाख थी। इसमें 24 लाख पुरुष व 21 लाख महिलाएं शामिल थीं। उसके बाद जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कई योजनाएं चलाई गई। लेकिन इनका प्रभाव जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रहा है।
विज्ञापन
सात साल गुजरने के बाद 2018 में यह आबादी बढ़कर 50 लाख के ऊपर पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इसमें कमी आई है। पहले जहां एक परिवार में औसतन चार बच्चे थे। अब यह घटकर 3.1 पर आ गए हैं। यानी आबादी पर लगाम लग रही है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
विज्ञापन
साल 2025 तक यह अनुपात लक्ष्य के अनुसार घटाकर 2.1 पर लाना है। इसके लिए योजनाएं चल रही हैं। ‘हम दो, हमारे दो’ वाला कॉन्सेप्ट पूरा करने के लिए योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
क्या चल रहीं योजनाएं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जनसंख्या स्थिरता के लिए दो योजनाएं चलाई जा रही है। एक योजना में जनसंख्या के प्रति जागरुकता फैलाई जा रही है। परिवार नियोजन के तौर तरीके बताए जा रहे हैं। जैसे कॉपर्टी, कंडोम आदि शामिल हैं। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि 19 वर्ष के बाद अपने बच्चे की शादी करें।
दो साल बाद पहला बच्चा। दूसरे में कम से कम तीन साल का अंतर होना चाहिए। दो बच्चे के बाद परिवार नियोजन को अपनाएं। इसी प्रकार दूसरी योजना में अंतरा इंजेक्शन व छाया गोली के बारे में बताया जा रहा है। यह दोनों दवाएं एकदम नुकसानदायक नहीं है। शरीर पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
पुरुष नसबंदी में है फिसड्डी
परिवार नियोजन अपनाने में जिले के पुरुष फिसड्डी हो रहे हैं। पुरुषों का आंकड़ा बढ़ने के बजाए लगातार गिर रहा है। पिछले साल की बात की जाए तो 36 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी। इस बार यह घटकर केवल 10 पर पहुंच गई है।
इसी प्रकार अगर महिलाओं की बात की जाए तो यह इसमें पुरुषों से दो कदम आगे ही चल रही है। पिछले साल करीब सात हजार महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 8100 पहुंच गई है। इसमें एक हजार से अधिक की वृद्धि हुई है।
भ्रांतियां पुरुषों को कर रहीं नसबंदी से दूर
चिकित्सकों का कहना है कि महिला नसबंदी से पुरुषों की बहुत ही आसान प्रक्रिया है। पुरुषों में ऊपरी तौर से ही नसबंदी हो जाती है जबकि महिलाओं में पेट के अंदर से प्रक्रिया अपनाई जाती है। लेकिन पुुरुषों में यह भ्रांतियां फैल गई है कि इससे शरीर कमजोर हो जाता है।
वह सेक्स करने लायक नहीं बचता है। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। न तो इससे कमजोरी आती है न ही सेक्स कम होता है। केवल पुुरुष में बच्चा पैदा न करने की कमी हो जाती है। अन्य कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए विभाग लगातार जागरुकता कार्यक्रम चला रहा है।
परिवार नियोजन के चल रहे कार्यक्रम
जिले की आबादी में पहले की अपेक्षा कमी आई है। इस समय 3.1 की दर से जनसंख्या बढ़ रही है। हां पुरुषों में जरुर कुछ कम जागरुकता है। इसी वजह से वह कम नसबंदी करा रहे है। इसके लिए लगातार परिवार नियोजन के कार्यक्रम चल रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही टारगेट पूरा किया जाएगा।
-डॉ. सुरेंद्र शाही, एसीएमओ/फैमिली प्लानिंग ऑफीसर