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1250 रसोइयों की नौकरी पर संकट
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सीतापुर। जिले में एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का विलय होने का सबसे अधिक नुकसान रसोइयों को उठाना पड़ेगा। इनके पदों की संख्या कम हो जाएगी। ऐसे में करीब 1250 रसोइयों की नौकरी पर संकट के बादल छा गए है। बीएसए ने सभी बीईओ से ऐसे रसोइयों की संख्या मांगी है।
परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनवाने के लिए रसोइयां रखी गई है। इनको एक निर्धारित मानदेय पर स्कूल में रखा गया है। अभी तक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में अलग-अलग चल रहे थे। इससे यहां पर दोनों स्कूल का सिस्टम अलग था।
शासन ने इस बार एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एक में संविलयन कर दिया है। इससे यहां दोनों स्कूलों का कंट्रोल एक प्रधानाध्यापक के जरिए होगा। पूरी कार्यव्यवस्था दोनों स्कूलों की एक ही प्रधानाध्यापक के हवाले होगी।
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बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक जिले में 658 प्राथमिक व 600 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का एक में विलय किया जा चुका है। इससे 1258 स्कूलों विलय हो गया है। अब यहां पर कार्यरत रसोइयां हटाई जाएगी। जिम्मेदारों के मुताबिक हर स्कूल से कम से एक रसोइयां हटाया जाएगा। इससे जिले में करीब 1250 रसोइयां की नौकरी चली जाएगी।
यह है मानक
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक 25 नौनिहालों पर एक रसोइयां रखी जाएगी। 25-100 नौनिहालों पर दो, 101 से 200 तक तीन, 201-300 तक चार, 301-1000 तक पांच, 1001-1500 तक छह, 1501 से अधिक पर 7 रसोइयां रखने का मानक तय है।
जिले में इस समय संविलयन हो चुके विद्यालयों में 100 छात्र संख्या होने पर दो रसोइयां कार्यरत है। जब दोनों विद्यालयों के बच्चे एक में मिलाकर जोड़ा जाएगा तो छात्र संख्या 200 के अंदर पहुंचेगी। ऐसे में दोनों विद्यालय से एक रसोइयां को हटना पड़ेगा।
आदेश जारी कर दिया गया है। बीईओ से विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों की संख्या मांगी गई है। संख्या आने पर ही रसोइयों को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
- अजय कुमार, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनवाने के लिए रसोइयां रखी गई है। इनको एक निर्धारित मानदेय पर स्कूल में रखा गया है। अभी तक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में अलग-अलग चल रहे थे। इससे यहां पर दोनों स्कूल का सिस्टम अलग था।
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शासन ने इस बार एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को एक में संविलयन कर दिया है। इससे यहां दोनों स्कूलों का कंट्रोल एक प्रधानाध्यापक के जरिए होगा। पूरी कार्यव्यवस्था दोनों स्कूलों की एक ही प्रधानाध्यापक के हवाले होगी।
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बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक जिले में 658 प्राथमिक व 600 उच्च प्राथमिक विद्यालयों का एक में विलय किया जा चुका है। इससे 1258 स्कूलों विलय हो गया है। अब यहां पर कार्यरत रसोइयां हटाई जाएगी। जिम्मेदारों के मुताबिक हर स्कूल से कम से एक रसोइयां हटाया जाएगा। इससे जिले में करीब 1250 रसोइयां की नौकरी चली जाएगी।
यह है मानक
बेसिक शिक्षा विभाग के मुताबिक 25 नौनिहालों पर एक रसोइयां रखी जाएगी। 25-100 नौनिहालों पर दो, 101 से 200 तक तीन, 201-300 तक चार, 301-1000 तक पांच, 1001-1500 तक छह, 1501 से अधिक पर 7 रसोइयां रखने का मानक तय है।
जिले में इस समय संविलयन हो चुके विद्यालयों में 100 छात्र संख्या होने पर दो रसोइयां कार्यरत है। जब दोनों विद्यालयों के बच्चे एक में मिलाकर जोड़ा जाएगा तो छात्र संख्या 200 के अंदर पहुंचेगी। ऐसे में दोनों विद्यालय से एक रसोइयां को हटना पड़ेगा।
आदेश जारी कर दिया गया है। बीईओ से विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों की संख्या मांगी गई है। संख्या आने पर ही रसोइयों को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
- अजय कुमार, बीएसए