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Sitapur News: कचूरा स्कूल में बच्चे डिजिटल माध्यम से हासिल कर रहे हैं शिक्षा
Thu, 16 Oct 2025 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 16 Oct 2025 11:39 PM IST
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सीतापुर। पिसावां ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल कचूरा के प्रधानाध्यापक अनुराग शुक्ला ने नवाचार और समर्पण के साथ शिक्षा का एक नया मॉडल बनाया है। उनके स्कूल में बच्चों की बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को मजबूत करने के साथ जीवन कौशल सीखने की प्रक्रिया भी शुरू हुई है।
अनुराग शुक्ला 16 साल से प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई में सुधार किया, बल्कि स्कूल में डिजिटल शिक्षा और व्यावहारिक कौशल को भी बढ़ावा दिया। स्कूल में प्रोजेक्टर और वीडियो के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया।
साथ ही प्रयोगशाला के जरिए बच्चों को पंचर ठीक करना, खाना बनाना, सर्किट बोर्ड बनाना, गार्डनिंग जैसी व्यावहारिक कौशल सिखाई जाती हैं। इतिहास और संस्कृति की समझ बढ़ाने के लिए बच्चों को ऐतिहासिक स्थलों पर भी ले जाया जाता है। उन्होंने बताया कि जब वह देखते हैं कि बच्चे प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा के जरिए वास्तविक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं तो अत्यंत संतोष मिलता है।
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पहले स्कूल में संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को अंग्रेजी में लिखना नहीं आता था। शिक्षक साथियों के साथ खुद वर्कबुक तैयार की। इससे बच्चों को काफी मदद मिली। वह लिखना व बोलना सीख गए। पिछले तीन वर्षों में 14 छात्र आय आधारित छात्रवृत्ति योग्यता परीक्षा में चयनित हुए हैं। इनमें से दो ने जिले में 9वीं रैंक हासिल की। स्कूल में लड़कियों का नामांकन अब लड़कों से अधिक है।
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अनुराग शुक्ला 16 साल से प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हैं। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ पढ़ाई में सुधार किया, बल्कि स्कूल में डिजिटल शिक्षा और व्यावहारिक कौशल को भी बढ़ावा दिया। स्कूल में प्रोजेक्टर और वीडियो के माध्यम से पढ़ाई को रोचक बनाया।
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साथ ही प्रयोगशाला के जरिए बच्चों को पंचर ठीक करना, खाना बनाना, सर्किट बोर्ड बनाना, गार्डनिंग जैसी व्यावहारिक कौशल सिखाई जाती हैं। इतिहास और संस्कृति की समझ बढ़ाने के लिए बच्चों को ऐतिहासिक स्थलों पर भी ले जाया जाता है। उन्होंने बताया कि जब वह देखते हैं कि बच्चे प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा के जरिए वास्तविक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं तो अत्यंत संतोष मिलता है।
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पहले स्कूल में संसाधनों की कमी के कारण बच्चों को अंग्रेजी में लिखना नहीं आता था। शिक्षक साथियों के साथ खुद वर्कबुक तैयार की। इससे बच्चों को काफी मदद मिली। वह लिखना व बोलना सीख गए। पिछले तीन वर्षों में 14 छात्र आय आधारित छात्रवृत्ति योग्यता परीक्षा में चयनित हुए हैं। इनमें से दो ने जिले में 9वीं रैंक हासिल की। स्कूल में लड़कियों का नामांकन अब लड़कों से अधिक है।