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कन्याओं को भोग लगाकर लिया आशीर्वाद
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आलम नगर स्थित दुर्गा मंदिर में आरती उतारते पुजारी। (संवाद)
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। चैत्र नवरात्र के 9वें दिन भक्तों को दोहरा आध्यात्मिक आनंद मिला। मां सिद्धदात्री के साथ ही राम जन्मोत्सव भी मनाया गया। घरों व मंदिरों में कन्या भोज कराकर दक्षिणा दी गई। इस दौरान कोविड की रोकथाम का खास ध्यान रखा गया। पैर धुलने की परंपरा निभाई गई। कन्याओं के हाथ भी सैनिटाइज कराए गए। शाम को जनमानस प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव में डूब गया। मंदिर परिसर दशरथ नंदन के जयकारों से गूंज उठे।
मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री के पूजन को लेकर भक्तों में गजब का उत्साह देखा गया। घरों व मंदिरों में भोर से ही पकवानों की खुशबू आने लगी। पकवान तैयार होने के बाद से कन्याओं को भोज कराने का दौर शुरू हो गया। घरों व मंदिरों में कन्याओं के आते ही उनके पैर धुले गए और क्रूर कोरोना से बचाव के लिए हाथ सैनिटाइज कराए गए।
शहर के पंजाबी धर्मशाला मंदिर, दुर्गा मंदिर आलमनगर, शीतला देवी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, घूरामऊं मंदिर, गायत्री मंदिर जेलरोड, मां संकटा देवी मंदिर महमूदाबाद, सोनसरी देवी मंदिर रेउसा आदि मंदिरों में कन्याओं को भोज कराने का आयोजन किया गया।
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ज्यादातर मंदिरों में दही जलेबी और घरों में कन्याओं को पूड़ी सब्जी का भोग लगाया गया। भक्तों ने दक्षिणा व उपहार देकर देवियों का आशीर्वाद प्राप्त किया। शाम होते ही जनमानस मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव में डूब गया। मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठे। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करके भक्तों ने भगवान के दर्शन किए।
भक्तों ने मां से मांगा यश व वैभव
पुराणों के मुताबिक मां कमल के पुष्प पर विराजमान मां सिद्धिदात्री को भगवन विष्णु की पत्नी कहा जाता है। इन्हें लाघिमा, प्रकाम्य, वशित्व, प्राप्ति आदि कुल आठ नामों से भी जाना जाता है। इसलिए भक्तों ने मां सिद्धिदात्री का पूजन करके यश और वैभव की प्राप्त करने की कामना की। कोविड के चलते तमाम भक्त मंदिरों तक नहीं पहुंच पाए, उन्होंने पंडितों और आचार्यों से फोन या फिर ऑनलाइन जानकारी लेकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन करते हुए मां को प्रसन्न किया।
श्रीराम का मनाया जन्मोत्सव
जिले में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। शहर और नैमिषारण्य में खास उल्लास रहा। शहर के सीताराम मंदिर आर्यनगर, छोटा हनुमान मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर और नैमिषारण्य के हनुमान गढ़ी, सिद्धेश्वर मंदिर, आयोध्या धाम के साथ ही तीर्थ नगरी के अन्य मंदिरों में दशरथ नंदन का जन्मोत्सव मनाया गया। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का पूजन किया।
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मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री के पूजन को लेकर भक्तों में गजब का उत्साह देखा गया। घरों व मंदिरों में भोर से ही पकवानों की खुशबू आने लगी। पकवान तैयार होने के बाद से कन्याओं को भोज कराने का दौर शुरू हो गया। घरों व मंदिरों में कन्याओं के आते ही उनके पैर धुले गए और क्रूर कोरोना से बचाव के लिए हाथ सैनिटाइज कराए गए।
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शहर के पंजाबी धर्मशाला मंदिर, दुर्गा मंदिर आलमनगर, शीतला देवी मंदिर, संतोषी माता मंदिर, घूरामऊं मंदिर, गायत्री मंदिर जेलरोड, मां संकटा देवी मंदिर महमूदाबाद, सोनसरी देवी मंदिर रेउसा आदि मंदिरों में कन्याओं को भोज कराने का आयोजन किया गया।
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ज्यादातर मंदिरों में दही जलेबी और घरों में कन्याओं को पूड़ी सब्जी का भोग लगाया गया। भक्तों ने दक्षिणा व उपहार देकर देवियों का आशीर्वाद प्राप्त किया। शाम होते ही जनमानस मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव में डूब गया। मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठे। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करके भक्तों ने भगवान के दर्शन किए।
भक्तों ने मां से मांगा यश व वैभव
पुराणों के मुताबिक मां कमल के पुष्प पर विराजमान मां सिद्धिदात्री को भगवन विष्णु की पत्नी कहा जाता है। इन्हें लाघिमा, प्रकाम्य, वशित्व, प्राप्ति आदि कुल आठ नामों से भी जाना जाता है। इसलिए भक्तों ने मां सिद्धिदात्री का पूजन करके यश और वैभव की प्राप्त करने की कामना की। कोविड के चलते तमाम भक्त मंदिरों तक नहीं पहुंच पाए, उन्होंने पंडितों और आचार्यों से फोन या फिर ऑनलाइन जानकारी लेकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन करते हुए मां को प्रसन्न किया।
श्रीराम का मनाया जन्मोत्सव
जिले में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। शहर और नैमिषारण्य में खास उल्लास रहा। शहर के सीताराम मंदिर आर्यनगर, छोटा हनुमान मंदिर, बड़ा हनुमान मंदिर और नैमिषारण्य के हनुमान गढ़ी, सिद्धेश्वर मंदिर, आयोध्या धाम के साथ ही तीर्थ नगरी के अन्य मंदिरों में दशरथ नंदन का जन्मोत्सव मनाया गया। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का पूजन किया।