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Sitapur News: गन्ने की ट्रॉली पर 180 किलो कटौती से रोष
Thu, 06 Feb 2025 12:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 06 Feb 2025 12:35 AM IST
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रामपुर मथुरा क्षेत्र के गोंडा-देवरिया गन्ना क्रय केंद्र पर खड़ीं ट्रॉलियां। संवाद
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। किसान सहकारी चीनी मिल के तौल केंद्र गोंडा देवरिया पर प्रति ट्रॉली 180 किलो की कटौती की जा रही है। किसानों के मुताबिक कांटा दुरुस्त करने के दौरान सेटिंग सही नहीं की गई है। इसके अलावा ढुलाई के लिए वाहन के अभाव में दो दिन से तौल ठप है। तौल केंद्र पर शोषण होने से किसानों में रोष व्याप्त है। हालांकि, मिल प्रशासन समस्याओं के शीघ्र निस्तारण का दावा कर रहा है।
गोंडा देवरिया तौल केंद्र पर बड़े पैमाने पर समस्याएं बनी हुई हैं। किसान बलकार सिंह ने बताया कि करीब एक सप्ताह से तौल कांटा चार प्रतिशत पर चल रहा है। प्रति ट्राॅली करीब 180 किलो गन्ने की कतौली की जा रही है। तौल केंद्र प्रभारी व टेक्नीशियन बताते हैं कि अब इससे कम पर सेटिंग नहीं की जा सकती है। इतने पर ही तौल करनी होगी।
किसान रिंकू सिंह ने कहा कि खून-पसीने की मेहनत से गन्ना पैदा करते हैं। सट्टा बनवाने से लेकर बिक्री करने तक शोषण किया जाता है। तैयार फसल की तौल करवाने में प्रति 40 क्विंटल पर 180 किलो गन्ने की कटौती कर ली जा रही है।
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रविंद्र ने कहा कि कांटा क्लर्क से बात करने पर बताया जाता है कि मिल गेट तक गन्ना पहुंचवाने में गन्ने का जो नुकसान होता है, इस कटौती से उसकी भरपाई की जाएगी। विजय ने कहा कि दो दिनों से तौल भी बंद है। बताया जा रहा है कि गन्ना ढुलाई के लिए लगी गाड़ियां नहीं आ रही हैं।
किसानों ने बताया कि ढुलाई के लिए वाहन संचालित कराने वाले ठेकेदार अक्सर मनमानी करते हैं जिससे तौल केंद्र पर गाड़ियां कई दिनों तक खड़ी रहती हैं। इस दौरान भी गन्ना सूखने से नुकसान उठाना पड़ता है।
पर्ची के अभाव में खेत में सूख रहा गन्ना
किसान सहकारी चीनी मिल महमूदाबाद पेराई सत्र के शुभारंभ से ही क्षमता के अनुरूप नहीं चल पाई। शुरुआती चरण में क्षमता से कम पेराई होने से पर्ची भी कम निर्गत की गईं। खेत में खड़ीं गन्ने की फसल पर्ची के अभाव में सूखने लगी है। किसान हरदयाल, रिंकू, विश्वनाथ, रविंद्र व ज्ञान सिंह के खेत में करीब पांच से लेकर आठ बीघे तक गन्ना अभी लगा हुआ है। इन लोगों का कहना है कि जिनके पास गन्ना अब नहीं है, उनके नाम पर्चियां आ रही हैं किंतु हमारा गन्ना खेतों में ही खराब हो रहा है। मिल प्रशासन ने कहा था कि स्टैंडिंग सर्वे कराएंगे, वह भी नहीं हो रहा है।
दूर होंगी समस्याएं
पहले की अपेक्षा अब मिल काफी ठीक तरह से काम कर रहा है। तौल केंद्र की समस्याओं को शीघ्र निस्तारित किया जाएगा। तकनीकी समस्याओं को भी दूर कराया जाएगा।
- सुभाष चंद्र पांडेय, मुख्य गन्ना अधिकारी, सहकारी चीनी मिल
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गोंडा देवरिया तौल केंद्र पर बड़े पैमाने पर समस्याएं बनी हुई हैं। किसान बलकार सिंह ने बताया कि करीब एक सप्ताह से तौल कांटा चार प्रतिशत पर चल रहा है। प्रति ट्राॅली करीब 180 किलो गन्ने की कतौली की जा रही है। तौल केंद्र प्रभारी व टेक्नीशियन बताते हैं कि अब इससे कम पर सेटिंग नहीं की जा सकती है। इतने पर ही तौल करनी होगी।
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किसान रिंकू सिंह ने कहा कि खून-पसीने की मेहनत से गन्ना पैदा करते हैं। सट्टा बनवाने से लेकर बिक्री करने तक शोषण किया जाता है। तैयार फसल की तौल करवाने में प्रति 40 क्विंटल पर 180 किलो गन्ने की कटौती कर ली जा रही है।
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रविंद्र ने कहा कि कांटा क्लर्क से बात करने पर बताया जाता है कि मिल गेट तक गन्ना पहुंचवाने में गन्ने का जो नुकसान होता है, इस कटौती से उसकी भरपाई की जाएगी। विजय ने कहा कि दो दिनों से तौल भी बंद है। बताया जा रहा है कि गन्ना ढुलाई के लिए लगी गाड़ियां नहीं आ रही हैं।
किसानों ने बताया कि ढुलाई के लिए वाहन संचालित कराने वाले ठेकेदार अक्सर मनमानी करते हैं जिससे तौल केंद्र पर गाड़ियां कई दिनों तक खड़ी रहती हैं। इस दौरान भी गन्ना सूखने से नुकसान उठाना पड़ता है।
पर्ची के अभाव में खेत में सूख रहा गन्ना
किसान सहकारी चीनी मिल महमूदाबाद पेराई सत्र के शुभारंभ से ही क्षमता के अनुरूप नहीं चल पाई। शुरुआती चरण में क्षमता से कम पेराई होने से पर्ची भी कम निर्गत की गईं। खेत में खड़ीं गन्ने की फसल पर्ची के अभाव में सूखने लगी है। किसान हरदयाल, रिंकू, विश्वनाथ, रविंद्र व ज्ञान सिंह के खेत में करीब पांच से लेकर आठ बीघे तक गन्ना अभी लगा हुआ है। इन लोगों का कहना है कि जिनके पास गन्ना अब नहीं है, उनके नाम पर्चियां आ रही हैं किंतु हमारा गन्ना खेतों में ही खराब हो रहा है। मिल प्रशासन ने कहा था कि स्टैंडिंग सर्वे कराएंगे, वह भी नहीं हो रहा है।
दूर होंगी समस्याएं
पहले की अपेक्षा अब मिल काफी ठीक तरह से काम कर रहा है। तौल केंद्र की समस्याओं को शीघ्र निस्तारित किया जाएगा। तकनीकी समस्याओं को भी दूर कराया जाएगा।
- सुभाष चंद्र पांडेय, मुख्य गन्ना अधिकारी, सहकारी चीनी मिल