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Sitapur News: बाघिन के बाद अब बाघ भी पकड़ में आया
Sun, 05 Oct 2025 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sun, 05 Oct 2025 11:54 PM IST
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पिंजरे में कैद हुआ बाघ।
सीतापुर। महोली के नरनी गांव में पिछले 45 दिनों से दहशत का पर्याय बना बाघ रविवार शाम 6:15 पर पिंजरे में कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने ट्रैंकुलाइज कर उसे पकड़ लिया। 20 सितंबर को वन विभाग की टीम ने यहां से एक बाघिन को भी पकड़ा था। बाघिन इस समय गोरखपुर प्राणि उद्यान में है।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पकड़े गए बाघ का वजन करीब 250 किलोग्राम व उम्र करीब पांच से सात वर्ष के बीच है। उसका चिकित्सीय परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद बाघ को छोड़े जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
नरनी गांव निवासी सौरभ दीक्षित 22 अगस्त को देर शाम खेतों की ओर गए थे। इसी दौरान बाघ ने सौरभ को निवाला बनाया था। घटना के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर की अगुवाई में टीम ने नरनी स्थित कमांड सेंटर में डेरा जमा लिया था। कड़ी मशक्कत के बाद 20 सितंबर को 300 किलो वजनी बाघिन को वन विभाग की टीम ट्रैंकुलाइज कर सकी थी। इसके बाद से लगातार बाघ को पकड़ने की कवायद जारी थी।
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सूत्रों के अनुसार बाघ को पकड़ने के लिए तीन पिंजरे व दस ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। थर्मल ड्रोन से भी बाघ पर नजर रखी जा रही थी। इस बीच बाघ लगातार चकमा देते हुए छह पड़वे खा गया। रविवार रात एक बार फिर वन विभाग की टीम ने डीएफओ नवीन खंडेलवाल व दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर के नेतृत्व में रणनीति बनाई। नरनी गांव से श्यामजीरा की ओर जाने वाले पुराने मार्ग से 20 मीटर दूर एक पिंजरा लगाया गया।
इस स्थान पर पिंजरे के पास पड़वे को बांधा गया। रविवार शाम करीब सवा छह बजे बाघ पड़वे का शिकार करने आया। डॉ. दयाशंकर ने बाघ पर निशाना लगाकर डार्ट शूट किया। एक ही डार्ट शूट किया गया। डार्ट लगने के बाद बाघ करीब 50 मीटर दौड़ा और फिर बेहोश हो गया। इसके बाद टीम ने उसे पिंजरे में कैद कर लिया।
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डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि पकड़े गए बाघ का वजन करीब 250 किलोग्राम व उम्र करीब पांच से सात वर्ष के बीच है। उसका चिकित्सीय परीक्षण किया जा रहा है। इसके बाद बाघ को छोड़े जाने पर निर्णय लिया जाएगा।
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नरनी गांव निवासी सौरभ दीक्षित 22 अगस्त को देर शाम खेतों की ओर गए थे। इसी दौरान बाघ ने सौरभ को निवाला बनाया था। घटना के बाद दुधवा टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर की अगुवाई में टीम ने नरनी स्थित कमांड सेंटर में डेरा जमा लिया था। कड़ी मशक्कत के बाद 20 सितंबर को 300 किलो वजनी बाघिन को वन विभाग की टीम ट्रैंकुलाइज कर सकी थी। इसके बाद से लगातार बाघ को पकड़ने की कवायद जारी थी।
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सूत्रों के अनुसार बाघ को पकड़ने के लिए तीन पिंजरे व दस ट्रैप कैमरे लगाए गए थे। थर्मल ड्रोन से भी बाघ पर नजर रखी जा रही थी। इस बीच बाघ लगातार चकमा देते हुए छह पड़वे खा गया। रविवार रात एक बार फिर वन विभाग की टीम ने डीएफओ नवीन खंडेलवाल व दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर के नेतृत्व में रणनीति बनाई। नरनी गांव से श्यामजीरा की ओर जाने वाले पुराने मार्ग से 20 मीटर दूर एक पिंजरा लगाया गया।
इस स्थान पर पिंजरे के पास पड़वे को बांधा गया। रविवार शाम करीब सवा छह बजे बाघ पड़वे का शिकार करने आया। डॉ. दयाशंकर ने बाघ पर निशाना लगाकर डार्ट शूट किया। एक ही डार्ट शूट किया गया। डार्ट लगने के बाद बाघ करीब 50 मीटर दौड़ा और फिर बेहोश हो गया। इसके बाद टीम ने उसे पिंजरे में कैद कर लिया।