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17 घर व 20 बीघा भूमि जलमग्न
Sitapur
Updated Fri, 19 Jul 2013 05:32 AM IST
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सीतापुर। जिले के रामपुर मथुरा व रेउसा क्षेत्र में घाघरा का कहर जारी है। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से तीन गांव पानी से घिर गए हैं। बीते 24 घंटों के दौरान रेउसा व तंबौर इलाकाें में कटान थमी है, लेकिन रामपुर मथुरा में तेज कटान हो रही है, जिससे 17 घर नदी समा गए हैं। 15 घर कटान के मुहाने पर हैं। साथ ही करीब 20 बीघा कृषि भूमि भी कट गई है। वहीं बाढ़ग्रस्त इलाकों में संपर्क मार्गों के कटने से आवागमन भी ठप है।
रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में नदी के जलस्तर में दो फुट तक की बढ़ोतरी हो गई है, जिससे अंगरौरा, भागवतपुरवा, पुरैना में पानी बढ़ गया है। कमतापुरवा, बलेसरपुरवा, कनरखी गांव पानी से घिर गए हैं। शुकुलपुरवा के मजरा कमतापुरवा में गुनेराज, भारत, नानमून, बद्री, रामविजय, राजेंद्र, हरेंद्र, रामकेवल, राजकुमार, विदेश, लौकुश, लक्ष्मण, जग्गन, अमरजीत, शिवनारायन, झिनकू, रामवृक्ष के घर कट गए हैं। इनमें चार पक्के घर शामिल हैं। वहीं गांव के हरीलाल, रामचंदर, मंगल, यूथ, विमल, पारस, कपिल, ध्रुवचंद्र, अर्जुन, उमरचंद, रवींद्र, रामानंद, राजेंदर, बाबूराम, दिनेश, गुलाब, अशोक के घर कटान के मुहाने पर हैं। फैतुल्लापुर से रामपुर मथुरा की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह से कट गई है, जिससे आवागमन ठप है। दुबेपुरवा व मनेरा गांवों में कृषि भूमि कट रही है, जिससे यहां करीब 20 बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई। कमतापुरवा गांव के लोगों का कहना है कि लेखपाल द्वारा कटान का सर्वे नहीं किया जा सका है। वहीं नावों के अभाव में लोगाें को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर बढ़ने से गोलोककोडर के मजरों में पानी घुसना शुरू हो गया है। हालांकि जलस्तर बढ़ने के बाद कटान थमी है, लेकिन मेड़ईपुरवा में अभी भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। उधर, प्रशासन द्वारा मारूबेहड़ व काशीपुर क्षेत्र में बाढ़ चौकियों से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है, लेकिन यह मदद नाकाफी साबित हो रही है। काशीपुर, असईपुर, अंधपुर, शेखूपुर कम्हरिया, बढ़ईनपुरवा गांव के लोग भी गांवों में पानी घुसने से दहशत में हैं।
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तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा के जलस्तर में गिरावट होने से बोधवा, बरछता, बसंतापुर, परेवा, नकहा, मीतमऊ व भमैला गांवों में पानी निकल गया है। हालांकि दोपहर बाद से नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह तक जलस्तर एक बार फिर बढ़ा तो इन गांवों में पानी बढ़ सकता है। लहरपुर तहसील क्षेत्र के सोन्सरी, मुसियाना, रमपुरवा गांवों में कटान के कारण कृषि भूमि कट रही है, जिससे बीते 24 घंटों के दौरान करीब 10 बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई है।
......
बैराजों से छोड़ा गया 3.32 लाख क्यूसेक पानी
पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण लखीमपुर स्थित बैराजों से गांजर की नदियों में पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को तीनों बैराजों से तीन लाख 32 हजार 012 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शारदा बैराज से 100103 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। जबकि बनबसा से 97474 व गिरिजा बैराज से 134435 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण जिले की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है।
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रामपुर मथुरा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में नदी के जलस्तर में दो फुट तक की बढ़ोतरी हो गई है, जिससे अंगरौरा, भागवतपुरवा, पुरैना में पानी बढ़ गया है। कमतापुरवा, बलेसरपुरवा, कनरखी गांव पानी से घिर गए हैं। शुकुलपुरवा के मजरा कमतापुरवा में गुनेराज, भारत, नानमून, बद्री, रामविजय, राजेंद्र, हरेंद्र, रामकेवल, राजकुमार, विदेश, लौकुश, लक्ष्मण, जग्गन, अमरजीत, शिवनारायन, झिनकू, रामवृक्ष के घर कट गए हैं। इनमें चार पक्के घर शामिल हैं। वहीं गांव के हरीलाल, रामचंदर, मंगल, यूथ, विमल, पारस, कपिल, ध्रुवचंद्र, अर्जुन, उमरचंद, रवींद्र, रामानंद, राजेंदर, बाबूराम, दिनेश, गुलाब, अशोक के घर कटान के मुहाने पर हैं। फैतुल्लापुर से रामपुर मथुरा की ओर जाने वाली सड़क पूरी तरह से कट गई है, जिससे आवागमन ठप है। दुबेपुरवा व मनेरा गांवों में कृषि भूमि कट रही है, जिससे यहां करीब 20 बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई। कमतापुरवा गांव के लोगों का कहना है कि लेखपाल द्वारा कटान का सर्वे नहीं किया जा सका है। वहीं नावों के अभाव में लोगाें को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में घाघरा का जलस्तर बढ़ने से गोलोककोडर के मजरों में पानी घुसना शुरू हो गया है। हालांकि जलस्तर बढ़ने के बाद कटान थमी है, लेकिन मेड़ईपुरवा में अभी भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। उधर, प्रशासन द्वारा मारूबेहड़ व काशीपुर क्षेत्र में बाढ़ चौकियों से राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है, लेकिन यह मदद नाकाफी साबित हो रही है। काशीपुर, असईपुर, अंधपुर, शेखूपुर कम्हरिया, बढ़ईनपुरवा गांव के लोग भी गांवों में पानी घुसने से दहशत में हैं।
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तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा के जलस्तर में गिरावट होने से बोधवा, बरछता, बसंतापुर, परेवा, नकहा, मीतमऊ व भमैला गांवों में पानी निकल गया है। हालांकि दोपहर बाद से नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ना शुरू हो गया है। शुक्रवार सुबह तक जलस्तर एक बार फिर बढ़ा तो इन गांवों में पानी बढ़ सकता है। लहरपुर तहसील क्षेत्र के सोन्सरी, मुसियाना, रमपुरवा गांवों में कटान के कारण कृषि भूमि कट रही है, जिससे बीते 24 घंटों के दौरान करीब 10 बीघा जमीन कटकर नदी में समा गई है।
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बैराजों से छोड़ा गया 3.32 लाख क्यूसेक पानी
पहाड़ों पर हो रही बारिश के कारण लखीमपुर स्थित बैराजों से गांजर की नदियों में पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। गुरुवार को तीनों बैराजों से तीन लाख 32 हजार 012 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। शारदा बैराज से 100103 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। जबकि बनबसा से 97474 व गिरिजा बैराज से 134435 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण जिले की नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है।