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Sitapur News: 50 स्कूलों ने मार दिया एक हजार नौनिहालों का हक
Fri, 19 May 2023 12:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Fri, 19 May 2023 12:39 AM IST
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सीतापुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम से दाखिले न लेने पड़े इसके लिए स्कूलों ने नया खेल कर दिया। करीब एक हजार नौनिहालों के हक पर 50 स्कूलों ने कुछ यूं डाका डाला।
आरटीई एक्ट के पोर्टल पर स्कूल तो पंजीकृत करा दिया, लेकिन इससे बचने का नया तरीका निकालते हुए जीओ टैगिंग नहीं कराई।
जब नौनिहालों ने मनपसंद स्कूल के लिए आवेदन किया तो यह लिस्ट से गायब मिले। आंकड़े खुद ही गवाही दे रहे हैं कि नगर निकाय क्षेत्र के 195 वार्ड में एक भी स्कूल नहीं है। यानि इन विद्यालयों में दाखिले चालू सत्र में नहीं हो सके हालांकि यह स्कूल बराबर संचालित हो रहे हैं।
आरटीई एक्ट के तहत कॉन्वेंट स्कूलों को अपने यहां कक्षा एक में 25 फीसद सीटों पर नौनिहालों को दाखिला देना होता है। इनकी फीस की भरपाई सरकार खुद ही करती है।
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इसके लिए 450 रूपये प्रतिमाह नौनिहालों की फीस निर्धारित है जबकि स्कूलों की फीस इससे करीब चार गुना तक है। स्कूल इस एक्ट को घाटे का सौदा बताकर वह इससे बचने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक जिले में 11 नगर निकाय हैं। इन निकायों के 195 वार्ड में एक भी स्कूल नहीं है। खैराबाद, महमूदाबाद, मिश्रिख, लहरपुर, बिसवां, सीतापुर, तंबौर, पैतेंपुर, महोली, सिधौली व हरगांव है। जबकि अगर आरटीई पोर्टल की बात की जाए तो उस पर जिले 983 विद्यालयों का डाटा दर्ज है।
इनमें करीब 50 ऐसे विद्यालय है जिन्होंने आरटीई एक्ट के डर से अपना पंजीकरण तो करा लिया। जब जीओ टैगिंग का नंबर आया तो वह मुकर गया। इससे जब नौनिहालों ने आवेदन किया तो उनको लिस्ट में विद्यालय गायब मिला। इससे वह चाहकर भी इस सत्र में दाखिला नहीं ले सके। इससे करीब एक हजार नौनिहालों का हक इन स्कूलों ने मार दिया।
बंद हो गया था पोर्टल
जीओ टैगिंग के लिए विद्यालय के आवेदन आए थे। पोर्टल बंद होने के कारण कुछ अभिभावक पंजीकरण नहीं कर सके थे। अब पोर्टल खुलते ही सभी विद्यालयों की जीओ टैगिंग कराई जाएगी।
अजीत कुमार, बीएसए
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आरटीई एक्ट के पोर्टल पर स्कूल तो पंजीकृत करा दिया, लेकिन इससे बचने का नया तरीका निकालते हुए जीओ टैगिंग नहीं कराई।
जब नौनिहालों ने मनपसंद स्कूल के लिए आवेदन किया तो यह लिस्ट से गायब मिले। आंकड़े खुद ही गवाही दे रहे हैं कि नगर निकाय क्षेत्र के 195 वार्ड में एक भी स्कूल नहीं है। यानि इन विद्यालयों में दाखिले चालू सत्र में नहीं हो सके हालांकि यह स्कूल बराबर संचालित हो रहे हैं।
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आरटीई एक्ट के तहत कॉन्वेंट स्कूलों को अपने यहां कक्षा एक में 25 फीसद सीटों पर नौनिहालों को दाखिला देना होता है। इनकी फीस की भरपाई सरकार खुद ही करती है।
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इसके लिए 450 रूपये प्रतिमाह नौनिहालों की फीस निर्धारित है जबकि स्कूलों की फीस इससे करीब चार गुना तक है। स्कूल इस एक्ट को घाटे का सौदा बताकर वह इससे बचने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक जिले में 11 नगर निकाय हैं। इन निकायों के 195 वार्ड में एक भी स्कूल नहीं है। खैराबाद, महमूदाबाद, मिश्रिख, लहरपुर, बिसवां, सीतापुर, तंबौर, पैतेंपुर, महोली, सिधौली व हरगांव है। जबकि अगर आरटीई पोर्टल की बात की जाए तो उस पर जिले 983 विद्यालयों का डाटा दर्ज है।
इनमें करीब 50 ऐसे विद्यालय है जिन्होंने आरटीई एक्ट के डर से अपना पंजीकरण तो करा लिया। जब जीओ टैगिंग का नंबर आया तो वह मुकर गया। इससे जब नौनिहालों ने आवेदन किया तो उनको लिस्ट में विद्यालय गायब मिला। इससे वह चाहकर भी इस सत्र में दाखिला नहीं ले सके। इससे करीब एक हजार नौनिहालों का हक इन स्कूलों ने मार दिया।
बंद हो गया था पोर्टल
जीओ टैगिंग के लिए विद्यालय के आवेदन आए थे। पोर्टल बंद होने के कारण कुछ अभिभावक पंजीकरण नहीं कर सके थे। अब पोर्टल खुलते ही सभी विद्यालयों की जीओ टैगिंग कराई जाएगी।
अजीत कुमार, बीएसए