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परिषदीय स्कूलों में घटे 40 फीसदी विद्यार्थी
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सीतापुर में एलिया इलाके के प्राथमिक विद्यालय अटरिया में किचन के पास उगी झाड़ियां। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। कोरोनाकाल भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन विद्यालयों पर इसका असर अब भी साफ दिखाई दे रहा है। परिषदीय विद्यालयों में करीब 40 फीसदी विद्यार्थियों की संख्या घट गई है। लगभग 60 फीसदी बच्चे ही स्कूल आ रहे है। नौनिहालों को गुणवत्तापरक भोजन मिलना मुश्किल हो रहा है।
परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों को रोजाना दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसके लिए सप्ताहवार मेन्यू तय है। अमर उजाला टीम ने सोमवार को स्कूलों में बन रहे एमडीएम की रियलटी देखी तो कई जगहों पर खामियां नजर आईं। एलिया विकासखंड में लोकल मसाले का उपयोग होते मिला। जबकि शासन की सख्त हिदायत है कि भोजन पकाने में सिर्फ ब्रांडेड मसाले ही उपयोग किए जाएं।
कई विद्यालयों में मेन्यू के विपरीत भोजन पकाया जा रहा था। भोजन की गुणवत्ता भी खराब मिली। कोरोना के बाद जब विद्यालय खुल रहे है तो छात्र संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम हो रही है। 60 फीसदी से कम ही नौनिहाल पढ़ने आ रहे हैं। किसी विद्यालय में बच्चों की हाजिरी महज 30 फीसदी ही मिली। इसके पीछे शिक्षक कोरोना होने की बात कह रहे है। शिक्षकों का कहना है कि कोरोना भले ही न हो, लेकिन इसका भय अभिभावकों पर जरूर बना हुआ है। इसी वजह से वह बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे है।
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एमडीएम की खराब मिली गुणवत्ता
एलिया विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय अटरिया बाउंड्रीविहीन है। विद्यालय में 131 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। स्कूल में 45 बच्चे ही मिले। एमडीएम बन रहा था। रसोई के किनारे झाड़ियां उगी थी। बच्चे इधर-उधर बैठकर खाना खा रहे थे। कोई शिक्षक इनकी देखरेख के लिए मौजूद नहीं था। बाउंड्री न होने से आवारा पशु वहीं घूम रहे थे। प्राथमिक विद्यालय धौरेमऊ में 238 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। 100 बच्चे ही मौजूद मिले। एमडीएम की गुणवत्ता खराब मिली। यहां पर ब्रांडेड के बजाए लोकल मसाले उपयोग किए जा रहे थे।
मेन्यू के विपरीत बना भोजन
सकरन विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय लश्करपुर में 189 के सापेक्ष 106 नौनिहाल उपस्थित मिले। प्राथमिक विद्यालय मजिलिसपुर में मेन्यू के विपरीत भोजन परोसा गया। सोमवार को सब्जी रोटी बननी चाहिए थी। वहां पर नौनिहालों को तहरी दी गई थी। प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर में बच्चों ने बताया कि सब्जी रोटी खा चुके है। बच्चे मैदान में खेल रहे थे।
बेहद कम मिली संख्या
रामपुर मथुरा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सियारपुर में 186 विद्यार्थी पंजीकृत है। यहां पर केवल 30 बच्चे उपस्थित मिले। लेकिन भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। प्राथमिक विद्यालय रायसेनपुर में 149 के सापेक्ष महज 98 बच्चे मिले। पूर्व माध्यमिक विद्यालय रायसेनपुर में पंजीकृत 106 बच्चों में से 71 बच्चे पढ़ते हुए दिखाई दिए। वहां भी सब्जी रोटी बनी मिली।
घट रही विद्यार्थियों की संख्या
पिसावां विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पिसावां में 216 के सापेक्ष महज 64 बच्चे मिले। प्राथमिक विद्यालय अल्लीपुर में 123 के सापेक्ष 62 बच्चे पढ़ रहे थे। यहां पर बच्चों को आलू व रोटी परोसी गई। प्राथमिक विद्यालय पथरी में 108 बच्चे पंजीकृत मिले। मौके पर केवल 15 बच्चे पढ़ रहे थे। सुबह के समय यहां पर केला वितरित किया गया।
विद्यालयों में रोजाना एमडीएम दिया जा रहा है। अगर किसी विद्यालय में गड़बड़ी की जा रही है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
अजीत कुमार, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों को रोजाना दोपहर का भोजन दिया जाता है। इसके लिए सप्ताहवार मेन्यू तय है। अमर उजाला टीम ने सोमवार को स्कूलों में बन रहे एमडीएम की रियलटी देखी तो कई जगहों पर खामियां नजर आईं। एलिया विकासखंड में लोकल मसाले का उपयोग होते मिला। जबकि शासन की सख्त हिदायत है कि भोजन पकाने में सिर्फ ब्रांडेड मसाले ही उपयोग किए जाएं।
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कई विद्यालयों में मेन्यू के विपरीत भोजन पकाया जा रहा था। भोजन की गुणवत्ता भी खराब मिली। कोरोना के बाद जब विद्यालय खुल रहे है तो छात्र संख्या बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम हो रही है। 60 फीसदी से कम ही नौनिहाल पढ़ने आ रहे हैं। किसी विद्यालय में बच्चों की हाजिरी महज 30 फीसदी ही मिली। इसके पीछे शिक्षक कोरोना होने की बात कह रहे है। शिक्षकों का कहना है कि कोरोना भले ही न हो, लेकिन इसका भय अभिभावकों पर जरूर बना हुआ है। इसी वजह से वह बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे है।
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एमडीएम की खराब मिली गुणवत्ता
एलिया विकासखंड का प्राथमिक विद्यालय अटरिया बाउंड्रीविहीन है। विद्यालय में 131 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। स्कूल में 45 बच्चे ही मिले। एमडीएम बन रहा था। रसोई के किनारे झाड़ियां उगी थी। बच्चे इधर-उधर बैठकर खाना खा रहे थे। कोई शिक्षक इनकी देखरेख के लिए मौजूद नहीं था। बाउंड्री न होने से आवारा पशु वहीं घूम रहे थे। प्राथमिक विद्यालय धौरेमऊ में 238 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। 100 बच्चे ही मौजूद मिले। एमडीएम की गुणवत्ता खराब मिली। यहां पर ब्रांडेड के बजाए लोकल मसाले उपयोग किए जा रहे थे।
मेन्यू के विपरीत बना भोजन
सकरन विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय लश्करपुर में 189 के सापेक्ष 106 नौनिहाल उपस्थित मिले। प्राथमिक विद्यालय मजिलिसपुर में मेन्यू के विपरीत भोजन परोसा गया। सोमवार को सब्जी रोटी बननी चाहिए थी। वहां पर नौनिहालों को तहरी दी गई थी। प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर में बच्चों ने बताया कि सब्जी रोटी खा चुके है। बच्चे मैदान में खेल रहे थे।
बेहद कम मिली संख्या
रामपुर मथुरा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय सियारपुर में 186 विद्यार्थी पंजीकृत है। यहां पर केवल 30 बच्चे उपस्थित मिले। लेकिन भोजन की गुणवत्ता ठीक नहीं थी। प्राथमिक विद्यालय रायसेनपुर में 149 के सापेक्ष महज 98 बच्चे मिले। पूर्व माध्यमिक विद्यालय रायसेनपुर में पंजीकृत 106 बच्चों में से 71 बच्चे पढ़ते हुए दिखाई दिए। वहां भी सब्जी रोटी बनी मिली।
घट रही विद्यार्थियों की संख्या
पिसावां विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पिसावां में 216 के सापेक्ष महज 64 बच्चे मिले। प्राथमिक विद्यालय अल्लीपुर में 123 के सापेक्ष 62 बच्चे पढ़ रहे थे। यहां पर बच्चों को आलू व रोटी परोसी गई। प्राथमिक विद्यालय पथरी में 108 बच्चे पंजीकृत मिले। मौके पर केवल 15 बच्चे पढ़ रहे थे। सुबह के समय यहां पर केला वितरित किया गया।
विद्यालयों में रोजाना एमडीएम दिया जा रहा है। अगर किसी विद्यालय में गड़बड़ी की जा रही है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं।
अजीत कुमार, बीएसए