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200 घरों को खतरा
सीतापुर/अमर उजाला
Updated Mon, 31 Aug 2015 11:22 PM IST
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टापू के कटान की जद में आने से पचीसा गांव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। कटान के चलते टापू पर बसे 200 परिवार भयभीत हैं। उधर, बैराजों से एक बार फिर एक लाख क्यूसेक पानी शारदा व घाघरा नदियों में छोड़ा गया है।
बीते एक माह से रेउसा क्षेत्र के निर्मल पुरवा, रामलाल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, पासिन पुरवा, दुर्गा पुरवा, सिसैया बाजार समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में घाघरा का पानी कहर बरपा रहा था। बाढ़ के बाद नदी ने तटीय क्षेत्र में जमकर कटान हुई। इस दौरान नदी का दायरा करीब सौ फीट सीतापुर की तरफ बढ़ी।
इससे नदी के बीच एक टापू आ गया। उस पर आबाद पचीसा गांव आबाद है। इस टापू को पचीसा नदी का नाम दिया गया है। इस गांव में 200 से अधिक परिवार घर बनाकर रहते हैं। सभी खेती कर परिवार पालते हैं।
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रविवार रात से नदी में सीतापुर की तरफ वाले तट पर कटान रुकी है लेकिन टापू पर आबाद गांव के लिए खतरा बढ़ गया है। क्योंकि नदी का पानी किनारा छोड़ अब टापू को काटने लगा है।
कटान की स्थिति देख टापू पर बसे गांव के सैकड़ों लोग दहशत में आ गए हैं। कटान की रफ्तार तेज बताई जा रही है। टापू पर आबाद परिवारों ने कटान को देखते हुए घरेलू सामान समेटना शुरू कर दिया है। वे नावों से नदी पार कर सुरक्षित ठिकानों को जाने की तैयारी में हैं।
टापू के दोनों तरफ नदी बहती है इसलिए टापू पूरी तरह से असुरक्षित हो गया है। वहां बसे लोगों का कहना है कि नदी का कटान तेज होते ही खुद को बचाने के लिए उन्हें नावों पर बैठकर सुरक्षित ठिकानों पर जाना पड़ेगा। उनके चेहरों पर टापू का अस्तित्व समाप्त होने का खौफ साफ नजर आ रहा है।
इससे पहले उन्होंने अपने घरों व गांवों का वजूद मिटते देखा है। दूसरी तरफ घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से करीब 104884 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी इतना नही है कि इस क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सके।
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बीते एक माह से रेउसा क्षेत्र के निर्मल पुरवा, रामलाल पुरवा, गोड़ियन पुरवा, पासिन पुरवा, दुर्गा पुरवा, सिसैया बाजार समेत डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में घाघरा का पानी कहर बरपा रहा था। बाढ़ के बाद नदी ने तटीय क्षेत्र में जमकर कटान हुई। इस दौरान नदी का दायरा करीब सौ फीट सीतापुर की तरफ बढ़ी।
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इससे नदी के बीच एक टापू आ गया। उस पर आबाद पचीसा गांव आबाद है। इस टापू को पचीसा नदी का नाम दिया गया है। इस गांव में 200 से अधिक परिवार घर बनाकर रहते हैं। सभी खेती कर परिवार पालते हैं।
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रविवार रात से नदी में सीतापुर की तरफ वाले तट पर कटान रुकी है लेकिन टापू पर आबाद गांव के लिए खतरा बढ़ गया है। क्योंकि नदी का पानी किनारा छोड़ अब टापू को काटने लगा है।
कटान की स्थिति देख टापू पर बसे गांव के सैकड़ों लोग दहशत में आ गए हैं। कटान की रफ्तार तेज बताई जा रही है। टापू पर आबाद परिवारों ने कटान को देखते हुए घरेलू सामान समेटना शुरू कर दिया है। वे नावों से नदी पार कर सुरक्षित ठिकानों को जाने की तैयारी में हैं।
टापू के दोनों तरफ नदी बहती है इसलिए टापू पूरी तरह से असुरक्षित हो गया है। वहां बसे लोगों का कहना है कि नदी का कटान तेज होते ही खुद को बचाने के लिए उन्हें नावों पर बैठकर सुरक्षित ठिकानों पर जाना पड़ेगा। उनके चेहरों पर टापू का अस्तित्व समाप्त होने का खौफ साफ नजर आ रहा है।
इससे पहले उन्होंने अपने घरों व गांवों का वजूद मिटते देखा है। दूसरी तरफ घाघरा, शारदा व बनबसा बैराजों से करीब 104884 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी इतना नही है कि इस क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सके।