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जिले में बनेगा पहला सरकारी ड्राइविंग इंस्टीट्यूट
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आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन पर बनेगा केंद्र
सीतापुर। नए साल पर ड्राइविंग का शौक रखने वालों को खुशखबरी है। अब उन्हें ड्राइविंग सीखने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें जिला स्तर पर ही बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके लिए जिले में पहला सरकारी ड्राइविंग इंस्टीट्यूट बनेगा। इसमें ड्राइविंग से पहले उनको यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा।
इसमें पास होने पर ही ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग में पास सार्टिफिकेट के आधार पर आपका लाइसेंस बनेगा। इस इंस्टीट्यूट के लिए खैराबाद के आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन चिंहिंत कर ली गई हैं। पहले यहां पर सौ लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उसके बाद क्षमता वृद्धि करते हुए पांच सौ तक बनाई जाएगी।
शासन ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी हैं। उम्मीद है कि जल्द बजट भी रिलीज हो जाएगा। जिले में इस समय ड्राइविंग सीखने के लिए प्राइवेट सेंटर ही चल रहे हैं। यह लोग मनमर्जी के हिसाब से फीस वसूलते हैं। सरकारी स्तर पर कोई भी इंस्टीट्यूट नहीं हैं।
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इससे जब आप लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो पहले ट्रेनिंग (लर्निंग) का बनता है। छह माह बाद उसे परमानेंट किया जाता हैं। इस दौरान आपको ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेनी होती हैं। अब यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। खैराबाद के आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन पर ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा।
यह सेंटर कौशल विकास मिशन के तहत संचालित होगा। इस सेंटर में ड्राइवरों को पहले पाठशाला में जाकर अध्ययन करना होगा। इसमें सफल होने पर वहीं पर ट्रेनिंग करवाई जाएगी। यह प्रशिक्षण छह माह का होगा। शुरुआती चरण में सौ लोगों की ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी।
उसके बाद क्षमता बढ़ा दी जाएगी। पांच सौ से छह सौ तक की कर दी जाएगी। इस प्रस्ताव पर शासन ने मुहर लगा दी हैं। जल्द ही बजट रिलीज होने की उम्मीद है। जिम्मेदारों का कहना हैं कि नए साल पर यह सौगात जिले को मिल जाएगी।
ड्राइविंग लाइसेंस का बदलेगा फॉर्मेट
इस इंस्टीट्यूट के बन जाने से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का फॉर्मेट भी बदल जाएगा। इस समय ड्राइविंग का शौक रखने वाले पहले लर्निंग का लाइसेंस बनवाते हैं। उसके तीन माह बाद इसे स्थाई लाइसेंस में बदल दिया जाता हैं। लर्निंग के दौरान आपको प्रशिक्षण लेना होता हैं।
अब जब इंस्टीट्यूट बन जाएगा तो पहले लर्निंग का लाइसेंस बनवाना होगा। उसके बाद आवेदनकर्ता इस इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेगा। वह तीन माह तक कोर्स को पढ़ेगा। अगले तीन माह वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। छह माह बाद आपको पास का सार्टिफिकेट मिलेगा।
इस सार्टिफिकेट को अब आरटीओ कार्यालय में जमा करेंगे। तभी आपका लाइसेंस परमानेंट होगा। इस दौरान प्रशिक्षणकर्ता से कोई वसूली नहीं की जाएगी। बस उन्हें एक निर्धारित फीस जमा करनी होगी। बिना इस प्रक्रिया को अपनाए लाइसेंस स्थाई नहीं बनेगा।
इंस्टीट्यूट में दी जाएगी शिक्षा
यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने को आवेदकों को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके लिए सीतापुर में सरकारी ड्राइविंग इंस्टीट्यूट खुलेगा। यह इंस्टीट्यूट आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन पर बनेगा। यहां पर सौ आवेदकों को शिक्षित किया जाएगा।
-डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ
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सीतापुर। नए साल पर ड्राइविंग का शौक रखने वालों को खुशखबरी है। अब उन्हें ड्राइविंग सीखने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें जिला स्तर पर ही बेहतर सुविधा मिलेगी। इसके लिए जिले में पहला सरकारी ड्राइविंग इंस्टीट्यूट बनेगा। इसमें ड्राइविंग से पहले उनको यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा।
इसमें पास होने पर ही ड्राइविंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग में पास सार्टिफिकेट के आधार पर आपका लाइसेंस बनेगा। इस इंस्टीट्यूट के लिए खैराबाद के आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन चिंहिंत कर ली गई हैं। पहले यहां पर सौ लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उसके बाद क्षमता वृद्धि करते हुए पांच सौ तक बनाई जाएगी।
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शासन ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी हैं। उम्मीद है कि जल्द बजट भी रिलीज हो जाएगा। जिले में इस समय ड्राइविंग सीखने के लिए प्राइवेट सेंटर ही चल रहे हैं। यह लोग मनमर्जी के हिसाब से फीस वसूलते हैं। सरकारी स्तर पर कोई भी इंस्टीट्यूट नहीं हैं।
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इससे जब आप लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो पहले ट्रेनिंग (लर्निंग) का बनता है। छह माह बाद उसे परमानेंट किया जाता हैं। इस दौरान आपको ड्राइविंग की ट्रेनिंग लेनी होती हैं। अब यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। खैराबाद के आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन पर ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा।
यह सेंटर कौशल विकास मिशन के तहत संचालित होगा। इस सेंटर में ड्राइवरों को पहले पाठशाला में जाकर अध्ययन करना होगा। इसमें सफल होने पर वहीं पर ट्रेनिंग करवाई जाएगी। यह प्रशिक्षण छह माह का होगा। शुरुआती चरण में सौ लोगों की ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी।
उसके बाद क्षमता बढ़ा दी जाएगी। पांच सौ से छह सौ तक की कर दी जाएगी। इस प्रस्ताव पर शासन ने मुहर लगा दी हैं। जल्द ही बजट रिलीज होने की उम्मीद है। जिम्मेदारों का कहना हैं कि नए साल पर यह सौगात जिले को मिल जाएगी।
ड्राइविंग लाइसेंस का बदलेगा फॉर्मेट
इस इंस्टीट्यूट के बन जाने से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का फॉर्मेट भी बदल जाएगा। इस समय ड्राइविंग का शौक रखने वाले पहले लर्निंग का लाइसेंस बनवाते हैं। उसके तीन माह बाद इसे स्थाई लाइसेंस में बदल दिया जाता हैं। लर्निंग के दौरान आपको प्रशिक्षण लेना होता हैं।
अब जब इंस्टीट्यूट बन जाएगा तो पहले लर्निंग का लाइसेंस बनवाना होगा। उसके बाद आवेदनकर्ता इस इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेगा। वह तीन माह तक कोर्स को पढ़ेगा। अगले तीन माह वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। छह माह बाद आपको पास का सार्टिफिकेट मिलेगा।
इस सार्टिफिकेट को अब आरटीओ कार्यालय में जमा करेंगे। तभी आपका लाइसेंस परमानेंट होगा। इस दौरान प्रशिक्षणकर्ता से कोई वसूली नहीं की जाएगी। बस उन्हें एक निर्धारित फीस जमा करनी होगी। बिना इस प्रक्रिया को अपनाए लाइसेंस स्थाई नहीं बनेगा।
इंस्टीट्यूट में दी जाएगी शिक्षा
यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने को आवेदकों को ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके लिए सीतापुर में सरकारी ड्राइविंग इंस्टीट्यूट खुलेगा। यह इंस्टीट्यूट आईटीआई परिसर में ढाई एकड़ जमीन पर बनेगा। यहां पर सौ आवेदकों को शिक्षित किया जाएगा।
-डॉ. उदित नारायण पांडेय, एआरटीओ