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स्थाई परिसम्पतियों के सृजन में बजट का दुरुपयोग
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सीतापुर। मनरेगा योजना की धनराशि का जिले में दुरुपयोग हो रहा है। इसे विभाग के प्रदेश स्तरीय अफसर ही स्वीकार कर रहे हैं। इनका कहना है कि स्थाई परिसम्पत्तियों के सृजन में परियोजनाओं की जियो टैगिंग के विश्लेषण से यह प्रतीत होता है कि परिसंपत्तियां गुणवत्ता विहीन हैं। ऐसे में इसकी जांचकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मनरेगा का उद्देश्य स्थाई परिसंपत्तियों का सृजन एवं ग्रामीण परिवारों की आजीविका में वृद्धि करना है। इसके लिए बीते वित्तीय बरस में प्रदेश में लगभग पांच हजार आठ सौ करोड़ की धनराशि खर्च की गई, जो ग्राम पंचायतों में स्थाई परिसंपत्तियों का सृजन करके ग्रामीण क्षेत्रों के आधारभूत ढांचे एवं आजीविका संवर्धन में भारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
वर्तमान में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार सभी परियोजनाओं की जियो टैगिंग कर फोटो ग्रॉफ भुवन एप पर अपलोड किए जाते हैं। इन फोटो का शासन स्तर पर विश्लेषण किया गया। इससे यह प्रतीत हुआ कि सृजित परिसम्पत्तियां गुणवत्ताविहीन हैं।
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स्थाई परिसंपत्तियों के सृजन के लिए जो फोटो अपलोड किए गए। इनका मनरेगा सेल ने रैंडम आधार पर विश्लेषण किया। इसमें यह पाया गया कि सिटीजन इन्फारमेशन बोर्ड की स्थापना किसी भी कार्य में नहीं की गई। जबकि इसकी स्थापना पारदर्शिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मानक है।
परिसंपत्तियों के फोटो ग्रॉफ से पता चला कि पुराने कामों को बीते वित्तीय बरस में पूरा होना दिखाया गया है। इतने पुराने कार्य न केवल कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं बल्कि कार्य की वास्तविकता पर संदेह भी उत्पन्न करते हैं। इसके साथ ही अन्य कमी का उल्लेख करते हुए अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने डीएम को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।
इसके मार्फत कहा है कि भेजे जा रहे परिसंपत्तियों के फोटो ग्रॉफ्स के अतिरिक्त अन्य सृजित परिसम्पत्तियों की जांच कराई जाए। मानक के अनुरूप एवं गुणवत्तापरक परिसंपत्तियों के न होने पर एसओपी के आधार पर कार्रवाई की जाए।
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मनरेगा का उद्देश्य स्थाई परिसंपत्तियों का सृजन एवं ग्रामीण परिवारों की आजीविका में वृद्धि करना है। इसके लिए बीते वित्तीय बरस में प्रदेश में लगभग पांच हजार आठ सौ करोड़ की धनराशि खर्च की गई, जो ग्राम पंचायतों में स्थाई परिसंपत्तियों का सृजन करके ग्रामीण क्षेत्रों के आधारभूत ढांचे एवं आजीविका संवर्धन में भारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
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वर्तमान में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार सभी परियोजनाओं की जियो टैगिंग कर फोटो ग्रॉफ भुवन एप पर अपलोड किए जाते हैं। इन फोटो का शासन स्तर पर विश्लेषण किया गया। इससे यह प्रतीत हुआ कि सृजित परिसम्पत्तियां गुणवत्ताविहीन हैं।
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स्थाई परिसंपत्तियों के सृजन के लिए जो फोटो अपलोड किए गए। इनका मनरेगा सेल ने रैंडम आधार पर विश्लेषण किया। इसमें यह पाया गया कि सिटीजन इन्फारमेशन बोर्ड की स्थापना किसी भी कार्य में नहीं की गई। जबकि इसकी स्थापना पारदर्शिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मानक है।
परिसंपत्तियों के फोटो ग्रॉफ से पता चला कि पुराने कामों को बीते वित्तीय बरस में पूरा होना दिखाया गया है। इतने पुराने कार्य न केवल कार्य की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं बल्कि कार्य की वास्तविकता पर संदेह भी उत्पन्न करते हैं। इसके साथ ही अन्य कमी का उल्लेख करते हुए अपर आयुक्त मनरेगा योगेश कुमार ने डीएम को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।
इसके मार्फत कहा है कि भेजे जा रहे परिसंपत्तियों के फोटो ग्रॉफ्स के अतिरिक्त अन्य सृजित परिसम्पत्तियों की जांच कराई जाए। मानक के अनुरूप एवं गुणवत्तापरक परिसंपत्तियों के न होने पर एसओपी के आधार पर कार्रवाई की जाए।