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कटान की भेंट चढ़ी 150 बीघा जमीन

Sat, 02 Jul 2022 12:30 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 12:30 AM IST
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150 bighas of land offered by harvesting
तंबौर/रेउसा (सीतापुर)। जिले में बुधवार को हुई जोरदार बारिश के बाद बैराजों से शारदा व सरयू नदियों में पानी छोड़ दिया गया है। इसकी वजह से नदियों के जलस्तर में वृद्धि हो गई है। जिसके कारण बाढ़ जैसे हालात तो नहीं हैं, लेकिन नदियों ने कटान करना शुरू कर दिया है। करीब 150 बीघा जमीन कटान में समा गई है। इससे यहां के बाशिंदों की मुसीबतें बढ़ गईं हैं।
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तंबौर में शारदा नदी में पानी बढ़ने के साथ कृषि भूमि की कटान तेज हो गई है। नदी किनारे बसे गांव के लोग निशाना बन रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को जलस्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई। लेकिन नदी की कटान जारी है। शारदा की तलहटी में बसे खानामडोर के करीब 20 से अधिक लोगों की जमीन कटान में समा गई है। विनय, श्रवण, सुरेश, मिथिलेश, ओंकार, जंगबहादुर, हरिनाम, खेमकरन, जगदीश, रमेश, प्रेम, रामसागर, हीरामन, श्रीराम, मायाराम, सुनील कुमार, अनिल कुमार, हरीश व हरिनाम की 80 बीघा से अधिक भूमि नदी में समा गई। प्रधान राधेश्याम की सूचना पर पहुंचे लेखपाल रामपाल ने बताया कि जिन लोगों की जमीन नदी में कटी है उनकी सूची बनाकर तहसील भेजी जा रही है।
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वहीं रेउसा के बढ़ईनपुरवा, शेखूपुर, पासियनपुरवा, जटपुरवा, रतनगंज आदि गांवों में करीब 70 बीघा जमीन कटान में समा गई है। इसकी वजह से यहां के लोग बहुत ही चिंतित हो रहे हैं। शिवाकांत, सदाशिव, गिरीश, सुशील कुमार, मथुरा प्रसाद आदि ने बताया कि बाढ़ राहत परियोजनाओं पर बहुत ही धीमी गति से कार्य किया जा रहा है। अगर यही हाल रहा तो समय से पहले काम पूर्ण नहीं हो पाएगा। इससे इस बार भी बाढ़ का दंश झेलना पड़ सकता है।
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बाढ़ राहत चौकियों पर नहीं है कोई सुविधा
जिलाधिकारी ने एक दिन पहले ही बाढ़ राहत चौकी मारूबेहड़ का निरीक्षण किया था। डीएम ने इस चौकी पर बाढ़ राहत प्रभारी का नंबर लिखने के निर्देश दिए थे। साथ ही यहां पर उजाला व अन्य व्यवस्थाएं करने की हिदायत दी थी। इसके बावजूद यहां पर अभी तक कोई सुविधा नहीं हो सकी है। अगर किसी को जरूरत पड़ जाए तो उसके बाद भटकने के अलावा कोई दूसरा साधन नहीं है।
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