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महिला शिक्षा के प्रति जागरूक होकर सशक्त बने

Sun, 06 Jan 2019 11:32 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jan 2019 11:32 PM IST
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महिला शिक्षा के प्रति जागरूक होकर सशक्त बने
सांडा (सीतापुर)। अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत सकरन के ब्लॉक संसाधन केंद्र सांडा में ‘महिला शिक्षा के प्रति जागरूक होकर सशक्त बनें’ विषय पर परिचर्चा हुई। इसमें डीएलएड प्रशिक्षुओं व शिक्षिकाओं ने वर्तमान में महिलाओं की शिक्षा पर विचार प्रस्तुत किए।
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कहा कि स्त्री शिक्षा, स्त्री और शिक्षा को अनिवार्य रूप से जोड़ने वाली अवधारणा है। इसका एक रूप शिक्षा में स्त्रियों को पुरुषों की ही तरह शामिल करने से संबंधित है। दूसरे रूप में ये स्त्रियों के लिए बनाई गई विशेष शिक्षा पद्धति को संदर्भित करता है।
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भारत में मध्य व पुनर्जागरण काल के दौरान स्त्रियों को पुरुषों से अलग तरह की शिक्षा देने की धारणा विकसित हुई थी। वर्तमान दौर में ये बात सर्वमान्य है कि स्त्री को भी उतना शिक्षित होना चाहिए, जितना कि पुरुष हो। ये सिद्ध सत्य है कि यदि माता शिक्षित न होगी तो देश की संतानों का कदापि कल्याण नहीं हो सकता।
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महिला विकास में महत्वपूर्ण है शिक्षा
शिक्षा लड़कियों और महिलाओं को सक्षम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शिक्षा महिला विकास का साधन है।
रफी सिद्दीकी, प्रभारी बीडीओ


सह-शिक्षा की आवश्यकता
सह-शिक्षा व्यक्तित्व, नेतृत्व विकास के साथ-साथ संप्रेक्षण क्षमता में सहायक है। वर्तमान युग में सह-शिक्षा आवश्यक है। इससे विद्यार्थी अपने जीवन में अधिक सफल रहते हैं।
दीपक श्रीवास्तव, मेंटर


गृह कार्य में शिक्षा बहुत उपयोगी
गृह विज्ञान के तहत पाक शास्त्र, पोषण, गृह अर्थशास्त्र, उपभोक्ता विज्ञान, बच्चों की परवरिश, मानव विकास आदि का अध्ययन किया जाता है।
प्रमोद तिवारी, प्रशिक्षक/शिक्षक


शोषण का विरोध करने में साधक
शिक्षा महिलाओं को शोषण का विरोध करने का ज्ञान कराती है। विधिक ज्ञान के चलते महिलाएं शोषण के विरुद्ध न्याय पा सकती हैं।
ओमप्रकाश वर्मा, शाखा प्रबंधक


महिला शिक्षा की समस्याएं
रूढ़िवादी नजरिए के कारण लड़कियों को अक्सर पाठशाला जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इससे देश की आधी आबादी का विकास बाधित है। प्रीति वर्मा, प्रशिक्षु


नारी शिक्षा की भूमिका
बालक के विकास पर प्रथम और सबसे अधिक प्रभाव उसकी माता का ही पड़ता है। ऐसे में माता का शिक्षित होना आने वाली पीढ़ी को प्रभावित करता है।
रुफीना रियाज, प्रशिक्षु


आत्मसम्मान के साथ-साथ रोजगार
शिक्षा महिलाओं को आत्मसम्मान के साथ साथ रोजगार उपलब्ध कराती है। जिससे उनका सुखमय जीवन यापन व्यतीत होता है।
दीप्ती गुप्ता, प्रशिक्षु


प्रशिक्षण की आवश्यकता
शिक्षा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में विभिन्न प्रशिक्षणों की आवश्यकता होती है। महिलाओं के लिए विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। मंतशा अंसारी, प्रशिक्षु



आधी आबादी का प्रतिनिधित्व
किसी भी देश का विकास वहां की प्रति व्यक्ति आय से परिभाषित होता है। ऐसे में आधी आबादी के रूप में महिलाओं के विकास की आवश्यकता है। रेखा वर्मा, प्रशिक्षु


लैंगिक समानता को प्राथमिकता
लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा मिला है। इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना चाहिए।
वीनू देवी, प्रशिक्षु
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