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घाघरा की लहरों ने किया आबादी का रुख
Updated Sun, 02 Sep 2018 11:18 PM IST
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रेउसा/तंबौर (सीतापुर)। जिले में तीन दिनों से हो रही तेज बारिश के चलते घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। रविवार को बाढ़ का पानी चहलारी घाट के करीब स्थित त्यागी महराज की कुटिया पहुंच गया है। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे आबादी की तरफ बढ़ रहा है। जिससे रेउसा इलाके में घाघरा के तटवर्ती करीब 20 गांवों पर बाढ़ का खतरा फिर मंडराने लगा है। इन गांवों के ग्रामीण सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
उधर, शारदा नदी का जलस्तर रविवार को स्थिर रहने से तंबौर इलाके में बाढ़ का प्रकोप फिलहाल थम गया है। लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के बाशिंदों की मुसीबतें अभी बरकरार हैं। गांव के अंदर पानी भरा होने से ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित है। लगभग 35 गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ में डूबने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर होने वाली बरसात के कारण घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। रविवार को चहलारी घाट से कुछ दूर स्थित त्यागी महाराज के आश्रम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
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नगीनापुरवा, फौजदारपुरवा, मरेली, बिल्लरपुरवा, गार्गीपुरवा, परमेश्वरपुरवा, जैतहिया, जिन्नापुरवा समेत करीब 20 तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यहां के ग्रामीण अपनी घर-गृहस्थी का सामान बटोरकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। वहीं, बाढ़ प्रभावित गांवों में कीचड़ व गंदगी से संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी प्रबल हो गई है।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा नदी का जलस्तर स्थिर होने से इलाके में बाढ़ का प्रकोप फिलहाल थम गया है। मगर प्रभावित गांवों में दुश्वारियां अभी भी बरकरार हैं। इन गांवों के बाशिंदों के चेहरों पर खिचीं चिंता की लकीरें उनकी बर्बादी की दास्तान सुना रही हैं। शारदा की बेकाबू लहरों ने इनके घरों को तहस-नहस करने के अलावा फसलें भी तबाह कर दी हैं।
क्षेत्र के लगभग 35 गांवों को तंबौर से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी बहने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में मुसीबतें उठानी पड़ रही है। इन गांव के लोगों को तंबौर आने जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का सहारा लेना पड़ रहा है। रास्तों पर भरा बाढ़ का पानी और गहरे गड्ढ़ों की वजह से आवागमन के दौरान जान का जोखिम बना रहता है।
एडीएम ने किया बाढ़ प्रभावित गांवों का मुआयना
एडीएम विनय पाठक ने तंबौर इलाके में बाढ़ प्रभावित गांवों का मुआयना किया। एडीएम ने बुधवा व बरेला गांव पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। यहां ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें हर मुमकिन सहायता उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिलाया। एडीएम ने मातहतों को लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए चला रहे लंगर
लहरपुर। नगर के बागवानी टोला निवासी हाजी जावेद गौरी व जुबेर अहमद बाढ़ प्रभावित बिचला बरेली के 600 ग्रामीणों को सुबह-शाम भोजन मुहैया करा रहे हैं। इसके लिए गांव में ही उन्होंने भोजन बनाने का इंतजाम किया है। पिछले तीन दिनों से लंगर चल रहा है। हाजी जावेद गौरी ने बताया कि उनके बड़े भाई जुबेर अहमद चार दिन पहले इस गांव में राहत सामग्री बांटने गए थे।
वहां उन्होंने ग्रामीणों की मुसीबतें देख गांव में ही उन्हें भोजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके बाद से अब तक लगातार गांव के 600 से अधिक ग्रामीणों को सुबह-शाम दोनों समय भोजन कराया जा रहा है। गांव के मिंकू, श्यामू, रामू, राधेश्याम, दिलीप, किशोरी, तुलसीराम, खूबचंद, पप्पू आदि ने बताया सरकार से जो भी सहायता मिलती थी, उससे कोई भला नहीं हो रहा था। अब ताजा भोजन मिलने से काफी राहत हो गई है।
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उधर, शारदा नदी का जलस्तर रविवार को स्थिर रहने से तंबौर इलाके में बाढ़ का प्रकोप फिलहाल थम गया है। लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के बाशिंदों की मुसीबतें अभी बरकरार हैं। गांव के अंदर पानी भरा होने से ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित है। लगभग 35 गांवों के संपर्क मार्ग बाढ़ में डूबने से ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।
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रेउसा प्रतिनिधि के अनुसार पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर होने वाली बरसात के कारण घाघरा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। रविवार को चहलारी घाट से कुछ दूर स्थित त्यागी महाराज के आश्रम तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
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नगीनापुरवा, फौजदारपुरवा, मरेली, बिल्लरपुरवा, गार्गीपुरवा, परमेश्वरपुरवा, जैतहिया, जिन्नापुरवा समेत करीब 20 तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यहां के ग्रामीण अपनी घर-गृहस्थी का सामान बटोरकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। वहीं, बाढ़ प्रभावित गांवों में कीचड़ व गंदगी से संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी प्रबल हो गई है।
तंबौर प्रतिनिधि के अनुसार शारदा नदी का जलस्तर स्थिर होने से इलाके में बाढ़ का प्रकोप फिलहाल थम गया है। मगर प्रभावित गांवों में दुश्वारियां अभी भी बरकरार हैं। इन गांवों के बाशिंदों के चेहरों पर खिचीं चिंता की लकीरें उनकी बर्बादी की दास्तान सुना रही हैं। शारदा की बेकाबू लहरों ने इनके घरों को तहस-नहस करने के अलावा फसलें भी तबाह कर दी हैं।
क्षेत्र के लगभग 35 गांवों को तंबौर से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी बहने के कारण ग्रामीणों को आवागमन में मुसीबतें उठानी पड़ रही है। इन गांव के लोगों को तंबौर आने जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का सहारा लेना पड़ रहा है। रास्तों पर भरा बाढ़ का पानी और गहरे गड्ढ़ों की वजह से आवागमन के दौरान जान का जोखिम बना रहता है।
एडीएम ने किया बाढ़ प्रभावित गांवों का मुआयना
एडीएम विनय पाठक ने तंबौर इलाके में बाढ़ प्रभावित गांवों का मुआयना किया। एडीएम ने बुधवा व बरेला गांव पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। यहां ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें हर मुमकिन सहायता उपलब्ध कराए जाने का भरोसा दिलाया। एडीएम ने मातहतों को लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए चला रहे लंगर
लहरपुर। नगर के बागवानी टोला निवासी हाजी जावेद गौरी व जुबेर अहमद बाढ़ प्रभावित बिचला बरेली के 600 ग्रामीणों को सुबह-शाम भोजन मुहैया करा रहे हैं। इसके लिए गांव में ही उन्होंने भोजन बनाने का इंतजाम किया है। पिछले तीन दिनों से लंगर चल रहा है। हाजी जावेद गौरी ने बताया कि उनके बड़े भाई जुबेर अहमद चार दिन पहले इस गांव में राहत सामग्री बांटने गए थे।
वहां उन्होंने ग्रामीणों की मुसीबतें देख गांव में ही उन्हें भोजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके बाद से अब तक लगातार गांव के 600 से अधिक ग्रामीणों को सुबह-शाम दोनों समय भोजन कराया जा रहा है। गांव के मिंकू, श्यामू, रामू, राधेश्याम, दिलीप, किशोरी, तुलसीराम, खूबचंद, पप्पू आदि ने बताया सरकार से जो भी सहायता मिलती थी, उससे कोई भला नहीं हो रहा था। अब ताजा भोजन मिलने से काफी राहत हो गई है।