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स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों के बिना भारतीय इतिहास अधूरा
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शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय शोहरतगढ़ में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी विषय पर राष्ट्रीय सेमिन?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों के बिना भारतीय इतिहास अधूरा
शिवपति पीजी कॉलेज में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी विषय पर हुआ सेमिनार
सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों के बिना भारतीय इतिहास अधूरा है। भारतीय सिद्धांतों की अवहेलना कर इतिहास लिखा गया है। यह वास्तविकता से दूर है और अपमानित करने वाले तथ्यों को जानबूझकर रखा गया है। शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय शोहरतगढ़ में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित सिद्धार्थनगर के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहासकार डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने ये बातें कहीं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने कहा कि वर्तमान इतिहास अजनबियों द्वारा लिखा गया है। आजादी के गुमनाम नायकों पर शोध करने की आवश्यकता है और उन्हें इतिहास के पन्नों में स्थान देने से ही भारतीय इतिहास पूर्ण होगा।
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, सारस्वत के राष्ट्रीय सचिव डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को गुमराह करने वाले तथ्यों की सम्यक विवेचना की। कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों में जिन सेनानियों ने खून पसीना बहाया, उन्हें स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा बनाना इतिहासकारों का दायित्व है।
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प्रो. हरीश शर्मा ने बताया कि साहित्य और इतिहास एक-दूसरे के पूरक होते हैं। अपने अतीत और पूर्वजों का स्मरण करना हमारी सभ्यता और संस्कृति रही है। प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस सेमिनार में मुकेश, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. रामकिशोर सिंह, डॉ. ज्योति सिंह, प्रियंका चंद्रा, वीके सिंह, प्रवीण कुमार, रमेश, देवेंद्र तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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शिवपति पीजी कॉलेज में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी विषय पर हुआ सेमिनार
सिद्धार्थनगर। स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों के बिना भारतीय इतिहास अधूरा है। भारतीय सिद्धांतों की अवहेलना कर इतिहास लिखा गया है। यह वास्तविकता से दूर है और अपमानित करने वाले तथ्यों को जानबूझकर रखा गया है। शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय शोहरतगढ़ में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित सिद्धार्थनगर के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहासकार डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने ये बातें कहीं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने कहा कि वर्तमान इतिहास अजनबियों द्वारा लिखा गया है। आजादी के गुमनाम नायकों पर शोध करने की आवश्यकता है और उन्हें इतिहास के पन्नों में स्थान देने से ही भारतीय इतिहास पूर्ण होगा।
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अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, सारस्वत के राष्ट्रीय सचिव डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को गुमराह करने वाले तथ्यों की सम्यक विवेचना की। कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्षों में जिन सेनानियों ने खून पसीना बहाया, उन्हें स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा बनाना इतिहासकारों का दायित्व है।
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प्रो. हरीश शर्मा ने बताया कि साहित्य और इतिहास एक-दूसरे के पूरक होते हैं। अपने अतीत और पूर्वजों का स्मरण करना हमारी सभ्यता और संस्कृति रही है। प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
इस सेमिनार में मुकेश, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डॉ. रामकिशोर सिंह, डॉ. ज्योति सिंह, प्रियंका चंद्रा, वीके सिंह, प्रवीण कुमार, रमेश, देवेंद्र तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।