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तस्करों व दुकानदारों पर कसेगा शिकंजा
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तस्करों व दुकानदारों पर कसेगा शिकंजा
नेपाल में खाद की तस्करी रोकने की 127 कर्मियों को दी गई जिम्मेदारी
सिद्धार्थनगर। खाद की किल्लत पर लगाम लगाने के लिए तस्करों और क्षमता से अधिक खाद देने वाले दुकानदरों पर शिकंजा कसा जाएगा। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए ब्लॉकवार टीम तैयार की गई है। 127 कर्मियों को नामित करते हुए उनकी जवाबदेही तय की गई है। नामित कर्मी यह देखेंगे किस किसान को कितना खाद मिलना चाहिए और कितना दिया गया।
जनपद नेपाल सीमा से सटा हुआ है। 68 किमी सीमा पूरी तरह से खुली है। बैरिकेडिंग भी नहीं है। बताया जाता है कि खेती का समय आते ही यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के साथ सीमा पर तस्करी बढ़ जाती है। खाद की कालाबाजारी और तस्करी को रोकने के लिए शासन ने विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसमें सहकारी समितियों के साथ फुटकर विक्रेताओं पर नजर रखी जाएगी।
जांच करने वालों को नियमित क्षेत्र के सहकारी समिति, निजी उर्वरक की दुकान के स्टाक, बिक्री, अगर बेच रहे हैं तो प्रति किसान कितना बोरी दे रहे हैं, जोतबही या खतौनी ले रहे हैं या नहीं, कहीं कालाबाजारी तो नहीं कर रहे हैं, क्षेत्र में अगल से भंडारण, किसानों के आरोप की जांच, समस्याओं का निस्तारण भी करेंगे।
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सीमावर्ती ब्लॉक क्षेत्रों में रहेगी विशेष नजर
नेपाल सीमा से लगने वाले लोटन, बर्डपुर, शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के कृषि विभाग के कर्मियों की विशेष नजर बॉर्डर क्षेत्र की सहकारी समिति, निजी दुकान और सीमा क्षेत्र के किसानों पर रहेगी। यह नियमित भ्रमण करके जांच करते रहेंगे। अगर कोई किसान अधिक मात्रा में खाद लेकर जाता है तो उसकी भी जांच करेंगे। खेत के रकबे के बारे में जानकारी लेंगे। अगर तस्करी का संदेह होता है तो तत्काल जिम्मेदारों को जानकारी देते हुए खाद जब्त कर लेंगे।
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इतने खाद की है खपत
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में खेती के क्षेत्रफल के हिसाब 96 हजार मीट्रिक टन यूरिया आवंटित होती है। जबकि 25 हजार मीट्रिक टन डीएपी सहित अन्य खाद आवंटित होती है।
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कोट
खाद की कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए बनाई गई टीम किसानों की समस्याओं का भी समाधान करेगी। नियमित अपने क्षेत्र की समिति और दुकानों की जांच करेंगे।
सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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नेपाल में खाद की तस्करी रोकने की 127 कर्मियों को दी गई जिम्मेदारी
सिद्धार्थनगर। खाद की किल्लत पर लगाम लगाने के लिए तस्करों और क्षमता से अधिक खाद देने वाले दुकानदरों पर शिकंजा कसा जाएगा। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए ब्लॉकवार टीम तैयार की गई है। 127 कर्मियों को नामित करते हुए उनकी जवाबदेही तय की गई है। नामित कर्मी यह देखेंगे किस किसान को कितना खाद मिलना चाहिए और कितना दिया गया।
जनपद नेपाल सीमा से सटा हुआ है। 68 किमी सीमा पूरी तरह से खुली है। बैरिकेडिंग भी नहीं है। बताया जाता है कि खेती का समय आते ही यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी के साथ सीमा पर तस्करी बढ़ जाती है। खाद की कालाबाजारी और तस्करी को रोकने के लिए शासन ने विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसमें सहकारी समितियों के साथ फुटकर विक्रेताओं पर नजर रखी जाएगी।
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जांच करने वालों को नियमित क्षेत्र के सहकारी समिति, निजी उर्वरक की दुकान के स्टाक, बिक्री, अगर बेच रहे हैं तो प्रति किसान कितना बोरी दे रहे हैं, जोतबही या खतौनी ले रहे हैं या नहीं, कहीं कालाबाजारी तो नहीं कर रहे हैं, क्षेत्र में अगल से भंडारण, किसानों के आरोप की जांच, समस्याओं का निस्तारण भी करेंगे।
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सीमावर्ती ब्लॉक क्षेत्रों में रहेगी विशेष नजर
नेपाल सीमा से लगने वाले लोटन, बर्डपुर, शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के कृषि विभाग के कर्मियों की विशेष नजर बॉर्डर क्षेत्र की सहकारी समिति, निजी दुकान और सीमा क्षेत्र के किसानों पर रहेगी। यह नियमित भ्रमण करके जांच करते रहेंगे। अगर कोई किसान अधिक मात्रा में खाद लेकर जाता है तो उसकी भी जांच करेंगे। खेत के रकबे के बारे में जानकारी लेंगे। अगर तस्करी का संदेह होता है तो तत्काल जिम्मेदारों को जानकारी देते हुए खाद जब्त कर लेंगे।
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इतने खाद की है खपत
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में खेती के क्षेत्रफल के हिसाब 96 हजार मीट्रिक टन यूरिया आवंटित होती है। जबकि 25 हजार मीट्रिक टन डीएपी सहित अन्य खाद आवंटित होती है।
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कोट
खाद की कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए बनाई गई टीम किसानों की समस्याओं का भी समाधान करेगी। नियमित अपने क्षेत्र की समिति और दुकानों की जांच करेंगे।
सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी