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Siddharthnagar News: भारत में इंतजार, नेपाल में भंसार दफ्तर तैयार
Thu, 29 Feb 2024 10:48 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 29 Feb 2024 10:48 PM IST
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल के रिश्ते को और मजबूती देने के लिए अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय बनना जरूरी है। अलीगढ़वा सीमा के पार नेपाल के कपिलवस्तु जिले की सीमा स्थित चाकरचौड़ा में छोटी भंसार (कस्टम कार्यालय) बनकर तैयार है। भारतीय सीमा में कस्टम कार्यालय बनने के बाद दोनों देशों के लोगों की सुविधाएं बढ़ जाएंगी। कार्यालय बनने से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के छात्र-छात्राओं, जिले के मेडिकल कॉलेज में दवा करवाने आने वाले नेपाली नागरिकों और पर्यटकों को विशेष सुविधा मिलेगी।
कस्टम कार्यालय मौैजूद नहीं होने के कारण अलीगढ़वा सीमा पर भारत-नेपाल के चार पहिया वाहन एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। इस कारण असुविधा और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कस्टम कार्यालय शुरू होने पर दोनों देशों के राजस्व में भी वृद्धि होगी। कस्टम कार्यालय बनने से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने में आसानी होगी। वहीं, शुल्क जमा करके वाहन पड़ोसी देश की सीमा में जा सकेंगे। कस्टम कार्यालय नहीं बनने से मैत्री महोत्सव में आए नेपाल के जनप्रतिनिधियों को लगभग 500 मीटर बॉर्डर पर पैदल चलना पड़ा। लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
कस्टम कार्यालय नहीं होने से नेपाली मेहमान भारत में आने से कतराते हैं। जबकि अधिक आवश्यक कार्य होने पर 100 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। जबकि, अन्य देशों से आए पर्यटक नेपाल के लुंबनी में आने के बाद दूरी अधिक होने से भारत के स्तूपों का भ्रमण किए बिना लौट जाते हैं। ककरहवा बॉर्डर पर बड़ी बसों के बंद होने से भी पर्यटक आने में परेशानी जताते हैं। जबकि कस्टम कार्यालय खुलने से लुंबिनी से कपिलवस्तु स्तूप की दूरी मात्र 20 किमी ही रह जाएगी।
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अलीगढ़वा सीमा से 500 मीटर दक्षिण में भगवान बुद्ध की क्रीड़ा स्थली स्तूप मौजूद है। उसी से 200 मीटर दक्षिण राज प्रसाद राज भवन है। कुछ ही दूरी पर केंद्रीय म्यूजियम और राजकीय संग्रहालय भी मौजूद हैं। जहां देश विदेश से पर्यटक आया करते हैं। वहां से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुंबिनी में जाने की दूरी भी कम हो जाएगी। अलीगढ़वा सीमा खुलने से सिद्धार्थनगर मुख्यालय की दूरी 20 किलोमीटर होगी। नेपाल कपिलवस्तु मुख्यालय की दूरी 18 किलोमीटर होगी। लुंबिनी की दूरी 22 किलोमीटर और तिलौराकोट की दूरी 20 किलोमीटर होगी, जो पर्यटकों की संख्या और सुविधा बढ़ाने में काफी सुखद होगी।
पैदल आती जाती हैं दुल्हनें
भारत- नेपाल के युवक-युवतियों की शादी एक-दूसरे पड़ोसी देश में होती रही है। अलीगढ़वा सीमा पर बरात आती है, तो दूल्हा- दुल्हन सजी हुई कार से उतर कर पैदल सीमा पार करते हैं। उसके बाद दूसरी गाड़ी में बैठकर घर जाते हैं। इसमें आर्थिक नुकसान भी होता है। कस्टम कार्यालय बनने के बाद स्थानीय लोगों का निर्धारित सीमा तक शुल्क माफ होगा।
इस बॉर्डर पर मौजूद है कस्टम कार्यालय
बढ़नी-कपिलवस्तु जिले के कृष्णानगर, खुनुवां-कपिलवस्तु जिले के मर्यादपुर में कस्टम कार्यालय /भंसार है। जबकि ककरहवा - रूपनदेही जिले केकालीदह में कस्टम कार्यालय/ भंसार है। नेपाल के चाकर चौड़ा में छोटी भंसार का कार्यालय बन गया है। जबकि अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय नहीं है। ककरहवा में बने कस्टम कार्यालय में बड़े वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। बड़े वाहनों का आवागमन ठप होने से अब लोगों को 100 किमी का चक्कर लगा कर लुंबिनी जाना पड़ता है। ऐसे में विदेशी पर्यटक लुंबनी में आने के बाद जिले के बौद्ध स्थलों का भ्रमण करने नहीं आते हैं।
सिद्धार्थ विवि और मेडिकल कॉलेज
नेपाल से भारत का रोटी-बेटी का संबंध सदियों से रहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी भारत से मिलती रही हैं। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय अलीगढ़वा से डेढ़ किमी दूर है। जबकि मेडिकल कॉलेज की दूरी महज 22 किलोमीटर रह जाएगी। स्वास्थ्य शिक्षा की सुविधा के लिए भी अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय की दरकार है।
कस्टम कार्यालय के लिए सदन में मांग उठाया था। दोनों देश का संबंध बहुत ही मधुर है। दोनों एक दूसरे के पूरक भी है। इस बॉर्डर से हजारों लोगों का प्रतिदिन आना-जाना लगा रहता है। कस्टम कार्यालय बनने से लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी
-बलराम अधिकारी, सांसद कपिलवस्तु नंबर एक नेपाल
मैत्री महोत्सव में आने-जाने में असुविधा हुई। कई नागरिकों को सोनौली बॉर्डर से होकर आना पड़ा। लोगों को समस्या के साथ-साथ समय भी अधिक लगा। ऐसे में कपिलवस्तु बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय बनने से लोगों को सुविधा मिलेगी।
मधुसूदन शरण चौधरी, विधायक क्षेत्र नंबर एक नेपाल
दोनों देश का संबंध बहुत पुराना है। जिले में गौतम बुद्ध के अनेक धरोहर मिलते रहते हैं। जिसका उल्लेख अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। घूमने आने के लिए पर्यटकों के पास केवल सोनौली बॉर्डर ही सहारा है। जबकि अलीगढ़वा के पास अनेक धरोहर मिलते हैं। गौतम बुद्ध की जन्म स्थली भी 20 किमी की दूरी पर है। ऐसे में कस्टम कार्यालय नहीं होने से लोग 100 किमी से अधिक दूरी तय करते हैं। लोगों को असुविधा भी होती है।
-डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर पुरातात्विक विभाग
अलीगढ़वा बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय खोलने के लिए छह वर्ष पूर्व मांग की गई थी। कपिलवस्तु का विकास करने के लिए अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय खुलना जरूरी है। विदेशी छात्रों को सबसे अधिक असुविधा होती है। बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय नहीं खुलने से क्षेत्र का विकास भी नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के लोग भी सैकड़ों बार इसकी मांग कर चुके हैं। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
-प्रो. दीपक बाबू मिश्र, वाणिज्य विभाग
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कस्टम कार्यालय मौैजूद नहीं होने के कारण अलीगढ़वा सीमा पर भारत-नेपाल के चार पहिया वाहन एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। इस कारण असुविधा और नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कस्टम कार्यालय शुरू होने पर दोनों देशों के राजस्व में भी वृद्धि होगी। कस्टम कार्यालय बनने से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में विदेशी छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ने में आसानी होगी। वहीं, शुल्क जमा करके वाहन पड़ोसी देश की सीमा में जा सकेंगे। कस्टम कार्यालय नहीं बनने से मैत्री महोत्सव में आए नेपाल के जनप्रतिनिधियों को लगभग 500 मीटर बॉर्डर पर पैदल चलना पड़ा। लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
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कस्टम कार्यालय नहीं होने से नेपाली मेहमान भारत में आने से कतराते हैं। जबकि अधिक आवश्यक कार्य होने पर 100 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। जबकि, अन्य देशों से आए पर्यटक नेपाल के लुंबनी में आने के बाद दूरी अधिक होने से भारत के स्तूपों का भ्रमण किए बिना लौट जाते हैं। ककरहवा बॉर्डर पर बड़ी बसों के बंद होने से भी पर्यटक आने में परेशानी जताते हैं। जबकि कस्टम कार्यालय खुलने से लुंबिनी से कपिलवस्तु स्तूप की दूरी मात्र 20 किमी ही रह जाएगी।
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पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अलीगढ़वा सीमा से 500 मीटर दक्षिण में भगवान बुद्ध की क्रीड़ा स्थली स्तूप मौजूद है। उसी से 200 मीटर दक्षिण राज प्रसाद राज भवन है। कुछ ही दूरी पर केंद्रीय म्यूजियम और राजकीय संग्रहालय भी मौजूद हैं। जहां देश विदेश से पर्यटक आया करते हैं। वहां से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुंबिनी में जाने की दूरी भी कम हो जाएगी। अलीगढ़वा सीमा खुलने से सिद्धार्थनगर मुख्यालय की दूरी 20 किलोमीटर होगी। नेपाल कपिलवस्तु मुख्यालय की दूरी 18 किलोमीटर होगी। लुंबिनी की दूरी 22 किलोमीटर और तिलौराकोट की दूरी 20 किलोमीटर होगी, जो पर्यटकों की संख्या और सुविधा बढ़ाने में काफी सुखद होगी।
पैदल आती जाती हैं दुल्हनें
भारत- नेपाल के युवक-युवतियों की शादी एक-दूसरे पड़ोसी देश में होती रही है। अलीगढ़वा सीमा पर बरात आती है, तो दूल्हा- दुल्हन सजी हुई कार से उतर कर पैदल सीमा पार करते हैं। उसके बाद दूसरी गाड़ी में बैठकर घर जाते हैं। इसमें आर्थिक नुकसान भी होता है। कस्टम कार्यालय बनने के बाद स्थानीय लोगों का निर्धारित सीमा तक शुल्क माफ होगा।
इस बॉर्डर पर मौजूद है कस्टम कार्यालय
बढ़नी-कपिलवस्तु जिले के कृष्णानगर, खुनुवां-कपिलवस्तु जिले के मर्यादपुर में कस्टम कार्यालय /भंसार है। जबकि ककरहवा - रूपनदेही जिले केकालीदह में कस्टम कार्यालय/ भंसार है। नेपाल के चाकर चौड़ा में छोटी भंसार का कार्यालय बन गया है। जबकि अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय नहीं है। ककरहवा में बने कस्टम कार्यालय में बड़े वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। बड़े वाहनों का आवागमन ठप होने से अब लोगों को 100 किमी का चक्कर लगा कर लुंबिनी जाना पड़ता है। ऐसे में विदेशी पर्यटक लुंबनी में आने के बाद जिले के बौद्ध स्थलों का भ्रमण करने नहीं आते हैं।
सिद्धार्थ विवि और मेडिकल कॉलेज
नेपाल से भारत का रोटी-बेटी का संबंध सदियों से रहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी भारत से मिलती रही हैं। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय अलीगढ़वा से डेढ़ किमी दूर है। जबकि मेडिकल कॉलेज की दूरी महज 22 किलोमीटर रह जाएगी। स्वास्थ्य शिक्षा की सुविधा के लिए भी अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय की दरकार है।
कस्टम कार्यालय के लिए सदन में मांग उठाया था। दोनों देश का संबंध बहुत ही मधुर है। दोनों एक दूसरे के पूरक भी है। इस बॉर्डर से हजारों लोगों का प्रतिदिन आना-जाना लगा रहता है। कस्टम कार्यालय बनने से लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी
-बलराम अधिकारी, सांसद कपिलवस्तु नंबर एक नेपाल
मैत्री महोत्सव में आने-जाने में असुविधा हुई। कई नागरिकों को सोनौली बॉर्डर से होकर आना पड़ा। लोगों को समस्या के साथ-साथ समय भी अधिक लगा। ऐसे में कपिलवस्तु बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय बनने से लोगों को सुविधा मिलेगी।
मधुसूदन शरण चौधरी, विधायक क्षेत्र नंबर एक नेपाल
दोनों देश का संबंध बहुत पुराना है। जिले में गौतम बुद्ध के अनेक धरोहर मिलते रहते हैं। जिसका उल्लेख अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है। घूमने आने के लिए पर्यटकों के पास केवल सोनौली बॉर्डर ही सहारा है। जबकि अलीगढ़वा के पास अनेक धरोहर मिलते हैं। गौतम बुद्ध की जन्म स्थली भी 20 किमी की दूरी पर है। ऐसे में कस्टम कार्यालय नहीं होने से लोग 100 किमी से अधिक दूरी तय करते हैं। लोगों को असुविधा भी होती है।
-डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर पुरातात्विक विभाग
अलीगढ़वा बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय खोलने के लिए छह वर्ष पूर्व मांग की गई थी। कपिलवस्तु का विकास करने के लिए अलीगढ़वा में कस्टम कार्यालय खुलना जरूरी है। विदेशी छात्रों को सबसे अधिक असुविधा होती है। बॉर्डर पर कस्टम कार्यालय नहीं खुलने से क्षेत्र का विकास भी नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के लोग भी सैकड़ों बार इसकी मांग कर चुके हैं। पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
-प्रो. दीपक बाबू मिश्र, वाणिज्य विभाग