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कृषि कानून से किसानों को उत्पाद बेचने के कई विकल्प मिलेंगे
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कृषि कानून से किसानों को उत्पाद बेचने के कई विकल्प मिलेंगे
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की तरफ से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में बोले वक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु। नए कृषि कानून से किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए कई विकल्प मिलेंगे, इससे उनको उचित और बढ़िया मूल्य प्राप्त हो सकेगा। ये बातें कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने कहीं। वह सिद्धार्थ विश्वविद्यालय तथा महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसन के संयुक्त तत्वावधान में कृषि सुधार कानून का औचित्य विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसानों को भी खुले बाजार का स्वागत करना चाहिए। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, इस कानून में किसान को किए गए करार को जरूरत पड़ने पर तोड़ने का अधिकार है, जबकि व्यापारी को यह अवसर नहीं है। अब लिखित करार होने से किसान हित सुरक्षित रहेगा। कुलपति प्रो. सुरेंद दुबे ने कहा कि नया कृषि कानून दलाली व्यवस्था को तोड़ने वाला कानून है। नब्बे के दशक के बाद यह पहला अवसर है जब किसान को भी अन्य उद्योग की तरह बाजार मिलने जा रहा है। कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि नए कृषि कानून में सामूहिक खेती की व्यवस्था छोटे किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसमें महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह आदि शामिल रहे।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की तरफ से आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में बोले वक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु। नए कृषि कानून से किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए कई विकल्प मिलेंगे, इससे उनको उचित और बढ़िया मूल्य प्राप्त हो सकेगा। ये बातें कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने कहीं। वह सिद्धार्थ विश्वविद्यालय तथा महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसन के संयुक्त तत्वावधान में कृषि सुधार कानून का औचित्य विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि किसानों को भी खुले बाजार का स्वागत करना चाहिए। इससे घबराने की जरूरत नहीं है, इस कानून में किसान को किए गए करार को जरूरत पड़ने पर तोड़ने का अधिकार है, जबकि व्यापारी को यह अवसर नहीं है। अब लिखित करार होने से किसान हित सुरक्षित रहेगा। कुलपति प्रो. सुरेंद दुबे ने कहा कि नया कृषि कानून दलाली व्यवस्था को तोड़ने वाला कानून है। नब्बे के दशक के बाद यह पहला अवसर है जब किसान को भी अन्य उद्योग की तरह बाजार मिलने जा रहा है। कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि नए कृषि कानून में सामूहिक खेती की व्यवस्था छोटे किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसमें महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव, राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह आदि शामिल रहे।
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