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Siddharthnagar News: पृथ्वी कर्मभूमि, जहां मानव करता है धर्म का पालनर
Thu, 03 Sep 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 03 Sep 2026 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
भवानीगंज। डुमरियागंज क्षेत्र के जखौली गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार रात अयोध्या के कथावाचक आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि वैदिक सनातन धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।
इसके अनुसार आत्मा 84 लाख योनियों भ्रमण करने के बाद मानव शरीर को प्राप्त करती है। यह पृथ्वी लोक कर्म भूमि है, जहां जाकर मानव को अपनी मानवता धर्म का पालन करना होता है।
उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य अपने जीवन में धर्म का पालन करें और ईश्वर में पूर्ण निष्ठा रखें। भगवान के नाम का जाप दान, पुण्य सत्कर्म, करें व सदैव लोक कल्याण की भावना रखें व खूब पुण्य अर्जित करें। तब मृत्यु निकट आने पर उसे घबराना नहीं पड़ता है। प्रसन्नता के साथ मृत्यु को स्वीकार कर इस मानव जीवन की परीक्षा में सफल होकर स्वर्ग लोक को प्राप्त करता है।
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इस प्रकार विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करने के बाद परीक्षा में बैठता है तो उसे घबराना नहीं पड़ता है। परीक्षा को पास करके कोई पद प्राप्त कर लेता है। वहीं जिन परीक्षार्थियों ने ठीक ढंग से तैयारी नहीं की होती तो परीक्षा में बैठने पर उनका पसीना छूट जाता है। आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मनुष्य जीवन बेकार न हो जाए इसीलिए खूब सत्कर्म करें।
इस दौरान कार्यक्रम आयोजक अंगद पांडेय, हरिप्रसाद श्रीवास्तव, राजकुमार पांडेय, छोटे पांडेय, मुकेश श्रीवास्तव, विश्वनाथ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।च
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भवानीगंज। डुमरियागंज क्षेत्र के जखौली गांव में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार रात अयोध्या के कथावाचक आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि वैदिक सनातन धर्म में पुनर्जन्म की मान्यता है।
इसके अनुसार आत्मा 84 लाख योनियों भ्रमण करने के बाद मानव शरीर को प्राप्त करती है। यह पृथ्वी लोक कर्म भूमि है, जहां जाकर मानव को अपनी मानवता धर्म का पालन करना होता है।
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उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य अपने जीवन में धर्म का पालन करें और ईश्वर में पूर्ण निष्ठा रखें। भगवान के नाम का जाप दान, पुण्य सत्कर्म, करें व सदैव लोक कल्याण की भावना रखें व खूब पुण्य अर्जित करें। तब मृत्यु निकट आने पर उसे घबराना नहीं पड़ता है। प्रसन्नता के साथ मृत्यु को स्वीकार कर इस मानव जीवन की परीक्षा में सफल होकर स्वर्ग लोक को प्राप्त करता है।
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इस प्रकार विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी करने के बाद परीक्षा में बैठता है तो उसे घबराना नहीं पड़ता है। परीक्षा को पास करके कोई पद प्राप्त कर लेता है। वहीं जिन परीक्षार्थियों ने ठीक ढंग से तैयारी नहीं की होती तो परीक्षा में बैठने पर उनका पसीना छूट जाता है। आचार्य हरिवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मनुष्य जीवन बेकार न हो जाए इसीलिए खूब सत्कर्म करें।
इस दौरान कार्यक्रम आयोजक अंगद पांडेय, हरिप्रसाद श्रीवास्तव, राजकुमार पांडेय, छोटे पांडेय, मुकेश श्रीवास्तव, विश्वनाथ श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।च